मुख्य फायर अधिकारी सुखदेव सिंह ने बताया कि डायल 112 अच्छी सुविधा है, लोकेशन भी साथ ही प्राप्त हो जाती है। इससे अपग्रेड करनी जरूरत है। हमारे पास अलग-अलग आग की घटना के लिए वाहन अलग- अलग है। वाहनों की क्षमता और एरिया के अनुसार उन्हें मौके पर भेजा जाता है।
सिरसा के अग्निशमन विभाग में वाहनों और कर्मचारियों की कमी नहीं है। एक मैसेज और फोन कर अधिकारी और कर्मचारी सतर्क रहते हैं और बिना देरी किए लोगों की जान माल की सुरक्षा के लिए पहुंच जाते हैं। सरकार ने अब विभाग को डायल 112 से जोड़ दिया है। नए सॉफ्टवेयर से जहां विभाग को लाभ पहुंचा है, वहीं कई परेशानियों का सबब भी यह सॉफ्टेवयर बन गया है।
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सॉफ्टवेयर से सीधे गाड़ी नंबर पर आग लगने की घटना का मैसेज जाता है, लेकिन घटना किस स्तर की है यह निर्धारण नहीं हो पाता है। इस कारण कई बार छोटी-छोटी घटना में बड़ी गाड़ियां मौके पर पहुंच जाती हैं, इससे विभाग को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और कर्मचारियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दिवाली के दिन ऐसा ही एक मामला सुरतगढि़या बाजार में गाड़ी में रॉकेट से लगी आग के दौरान देखने को मिला। यहां छोटी गाड़ी व बुलेट वाहन से आग पर काबू किया जा सकता था, वहां पर बड़ी गाड़ी भेजनी पड़ी। इसको लेकर अधिकारियों ने मुख्यालय स्तर पर समस्या से अवगत करवाया है, ताकि डायल 112 सॉफ्टवेयर में सुधार किया जा सके।
इस प्रकार है वाहनों की स्थिति
रेस्क्यू टेंडर : 2
वाटर टेंडर : 14
बुलेट वाहन : 2
फोम टेंडर : 2
वाटर बाउजर : 4
वाहनों की क्षमता और गुणवत्ता के हिसाब से हो अपग्रेड सॉफ्टवेयर
मुख्य फायर अधिकारी सुखदेव सिंह ने बताया कि डायल 112 अच्छी सुविधा है, लोकेशन भी साथ ही प्राप्त हो जाती है। इससे अपग्रेड करनी जरूरत है। हमारे पास अलग-अलग आग की घटना के लिए वाहन अलग- अलग है। वाहनों की क्षमता और एरिया के अनुसार उन्हें मौके पर भेजा जाता है। तंग गलियाें के लिए अलग वाहन है और मलबे आदि दबने या किसी को बचाने की स्थिति या रेस्क्यू के लिए अलग वाहन है। डायल 112 में सीधे वाहन नंबर के हिसाब से मैसेज चालक पर आता है। ऐसे में मजबूरन उसी नंबर का वाहन भेजना पड़ता है। भले ही उसकी जरूरत उस घटना के दौरान नहीं है। इसको लेकर अधिकारियों से बातचीत की गई है। उम्मीद है कि जल्द ही इस सॉफ्टवेयर को फायर विभाग के अनुरूप अपग्रेड कर दिया जाएगा।