फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sirsa News: स्टे के बावजूद दो कनाल जमीन की रजिस्ट्री, नायब तहसीलदार समेत सात पर केस

Mon, 07 Sep 2026 11:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
विज्ञापन
विज्ञापन
सिरसा। गांव वैदवाला की करीब दो कनाल नहरी जमीन को अदालत के स्टे के बावजूद बेचने और फर्जी दस्तावेज तैयार कर रजिस्ट्री करवाने के आरोप में सिविल लाइन थाना पुलिस ने नायब तहसीलदार, डीड राइटर, नंबरदार समेत सात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोपियों में सुखविंद्र कौर, उसका बेटा मनजीत सिंह निवासी गांव वैदवाला, गुरमीत कौर निवासी हुडा कॉलोनी सिरसा, नायब तहसीलदार अशोक कुमार, डीड राइटर जगदेव सिंह, नंबरदार हरबंस सिंह और जसपाल सिंह शामिल हैं। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है ।
विज्ञापन




जांच अधिकारी राधेश्याम के अनुसार, फ्रेंड्स कॉलोनी निवासी शिकायतकर्ता रजतपाल कौर ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसने गांव वैदवाला की जमाबंदी वर्ष 2021-22 के अनुसार खेवट नंबर 541, खाता नंबर 781 से 785 की कुल जमीन में से 361/13824 हिस्से के तहत दो कनाल नहरी भूमि खरीदने का सौदा सुखविंद्र कौर से 20 फरवरी 2026 को किया था। सौदा 96 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से तय हुआ था।

शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने गवाहों की मौजूदगी में 11 लाख 11 हजार रुपये बयाने के रूप में दिए। रजिस्ट्री की तारीख 30 मई 2026 तय की गई थी। इकरारनामे पर सुखविंद्र कौर के बेटे मनजीत सिंह ने भी सहमति के तौर पर हस्ताक्षर किए थे। दस्तावेज पर अन्य गवाहों के हस्ताक्षर भी हुए और इकरारनामा नोटरी से सत्यापित कराया गया।
विज्ञापन




स्टे के बावजूद हुई रजिस्ट्री :

शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद में आरोपी पक्ष ने उसे धमकाकर बयाने की रकम हड़पने और जमीन की रजिस्ट्री उसके नाम न कराने की बात कही। जमीन किसी अन्य व्यक्ति को बेचने की तैयारी की जानकारी मिलने पर उसने अतिरिक्त सिविल जज, सिरसा की अदालत में सिविल केस दायर किया। अदालत ने 7 अप्रैल 2026 को जमीन को आगे बेचने पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद 25 मई 2026 को बेनामा नंबर 1535 के जरिये जमीन गुरमीत कौर के नाम कर दी गई। शिकायतकर्ता के अनुसार, इसमें नायब तहसीलदार, डीड राइटर और अन्य आरोपियों ने मिलीभगत की।



दो दिन पहले सामने आया फर्जीवाड़ा:
1 जून को वह इकरारनामे के अनुसार रजिस्ट्री कराने के लिए बकाया रकम और खर्च लेकर तहसील कार्यालय पहुंची लेकिन उसे पूर्व में हो चुकी रजिस्ट्री की जानकारी नहीं दी गई। दो दिन पहले गुरमीत कौर जमीन पर पहुंची और खुद को मालिक बताते हुए कब्जा लेने की बात कही। इसके बाद शिकायतकर्ता को कथित फर्जीवाड़े का पता चला।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें