सिरसा। बेरोजगार युवाओं को नौकरी लगाने के नाम पर 35 लाख रुपये ठगने के मामले में पुलिस से गुम हुए अहम सबूत अभी तक नहीं मिल पाए हैं। एसपी दीपक सहारण ने कोर्ट को इस संबंध में पत्र लिखकर बताया है कि गायब अहम दस्तावेज ढूंढने की पूरी कोशिश की जा रही है। चार नवंबर को सिविल लाइन थाना प्रभारी इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार ने कोर्ट में उपस्थित होकर एक हलफनामा दायर किया था।
इसमें बताया गया था कि तीन जून 2020 को 6 पार्सल में इस से जुड़े दस्तावेज कांस्टेबल मनोज कुमार के माध्यम से एफएसएल को भेजे गए थे। कोविड-19 महामारी फैलने के कारण दस्तावेज जमा नहीं किए जा सके। इसके बाद दस्तावेज़ कांस्टेबल जयपाल सिंह के माध्यम से एफएसएल को फिर से भेजे गए। एफएसएल की ओर से उठाई गई कुछ आपत्तियों के कारण दस्तावेज फिर से पुलिस स्टेशन वापस भेज दिए गए।
उस समय सब इंस्पेक्टर कैलाश चंद्र मामले के जांच अधिकारी और एएसआई बलवान सिंह पुलिस थाना के मुख्य मुंशी थे। अब ये दस्तावेज मालखाने में नहीं मिल रहे हैं। थाना प्रभारी ने न्यायालय को बताया कि यह मामला 2019 की एक प्राथमिकी से संबंधित है और पुलिस के पास इस मामले के सबसे प्रासंगिक दस्तावेजों के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। इस मामले की अगली सुनवाई 11 दिसंबर को होगी।
कोर्ट जता चुकी है पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी
खास बात यह है कि न्यायाधीश गगनदीप गोयल ने पुलिस अधीक्षक को इस मामले की जांच करने का आदेश दिया था। 11 नवंबर को पुलिस अधीक्षक की ओर से न्यायालय में जवाब दायर किया गया। इसमें न्यायालय को बताया गया कि दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए मामले की जांच की जा रही है। इसके बाद न्यायाधीश गगनदीप गोयल ने कहा था कि ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस ने इस फाइल के सबसे प्रासंगिक दस्तावेज का पता लगाने के लिए कोई कार्रवाई शुरू नहीं की है।