सामाजिक कार्य को लेकर जब भी चर्चा होती है तो हर किसी की जुबां पर सिरसा का ही नाम आता है। समाज सेवा में यहां के लोग आगे रहते है। हर किसी के सुख-दुख में लोग कदम से कदम मिलाकर चलते हैं। बात जब रक्तदान की हो तो सिरसा इस क्षेत्र में आज भी विश्व का सिरमौर बना हुआ है। डेरा सच्चा सौदा, शिवशक्ति ब्लड बैंक सिरसा और अन्य सामाजिक संगठनों ने लोगों को रक्तदान के लिए इतना प्रेरित किया है तो यहां के लोग चलते फिरते ब्लड पंप है, जब भी किसी को जरूरत पड़ती है रक्तदाता तैयार मिलता है। वर्ष 2003 से अब तक डेरा करीब साढ़े चार लाख से अधिक ब्लड यूनिट एकत्रित कर चुका हैं, जबकि सरकारी अस्पताल इस मामले में काफी पीछे हैं। डेरा रक्तदान में हर बार एक नया रिकार्ड बनाता है और अगले साल ही उसे तोड़ देता है।
वर्ष 1996 में सिरसा के तत्कालीन एसडीएम युद्धवीर सिंह ख्यालिया और आईएमए के अध्यक्ष डॉ. वेद बैनीवाल ने लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक किया और चौ. दलबीर सिंह स्टेडियम में विशाल रक्तदान शिविर आयोजित कर सिरसा के लिए एक इतिहास रच दिया। डॉ. बैनीवाल ने वर्ष 1999 में शिव शक्ति ब्लड बैंक की स्थापना की जहां लोगों को आसानी से ब्लड मिलने लगा। सिरसा के सरकारी अस्पताल में रक्तदान की सुविधा तो थी पर स्टोरेज की पर्याप्त सुविधा नहीं थी। रक्तदान के क्षेत्र में डेरा सच्चा सौदा के संत गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां ने जो क्रांति पैदा की वो आज तक जारी है और विश्व में सिरसा की अपनी अलग ही पहचान बन चुकी है। विश्व को रक्तदान का संदेश देने वाला डेरा सच्चा सौदा रक्तदान के क्षेत्र में विश्व में तीन बार सिरमौर बना और चौथा रिकार्ड भेजा हुआ है। यहां के रक्तदाताओं को चलते-फिरते ट्रयू ब्लड पंप की संज्ञा दी जाती है। हर माह के अंतिम शनिवार को सीमाओं पर देश की रक्षा करने वाले सैनिकों के लिए रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाता है।
यूं बनते गए विश्व रिकॉर्ड
डेरा के प्रवक्ता पवन इंसां ने बताया कि रक्तदान के क्षेत्र में डेरा सच्चा सौदा के संत गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां ने जो रीत चलाई है आज सारा देश उसका अनुसरण कर रहा है। सात दिसंबर 2003 को सिरसा के शाह सतनाम जी धाम में आयोजित रक्तदान कैंप में 15432 यूनिट रक्तदान किया गया जो कि रक्तदान के क्षेत्र में डेरा सच्चा सौदा का पहला गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड है। इसके बाद 10 अक्टूबर 2004 को डेरा प्रमुख की जन्मस्थली श्रीगुरुसर मोडिया में लगाए गए कैंप में आठ घंटे में 17921 यूनिट रक्तदान हुआ वह भी वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल हुआ है। 8 अगस्त 2010 को डेरा प्रमुख के 43 वें जन्मदिवस पर शाह सतनाम जी धाम के सचखंड हाल में एक विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें 43732 यूनिट रक्त संग्रहीत किया गया जो कि डेरा सच्चा सौदा का रक्तदान के क्षेत्र में तीसरा वर्ल्ड रिकॉर्ड है। 12 अप्रैल 2014 को सौवी रूबरू नाइट का आयोजन दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में किया गया जहां पर 75771 लोगों ने रक्तदान किया। यह भी एक रिकॉर्ड बना। डेरा में वर्ष 2003 से लेकर अब तक 463162 लोग रक्तदान कर चुके हैं। डेरा के अस्पताल में 24 जुलाई 2007 को बापू मग्घर सिंह इंटरनेशनल ब्लड बैंक स्थापित किया गया है जहां पर वर्ष 2007 से लेकर अब तक 113164 यूनिट रक्त एकत्रित हुआ।
इस ब्लड बैंक की क्षमता करीब चार हजार यूनिट की है और रक्त को 35 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। सिरसा शहर में भगवान वाल्मीकि चौक पर शिव शक्ति ब्लड बैंक की 1999 में स्थापना हुई जहां पर अभी तक एक लाख 33 हजार यूनिट रक्त एकत्रित हुआ। सामान्य अस्पताल में प्रतिमाह औसतन 250 से 500 यूनिट रक्त एकत्रित होगा है पर वहां स्टोरेज क्षमता अन्य से कम है। सामान्य अस्पताल में रक्त नि:शुल्क उपलब्ध करवाया जाता है, जबकि अन्य में केवल जांच शुल्क वसूल किया जाता है। डेरा सच्चा देश मे थैलिसीमिया रोगियों को हर समय रक्त उपलब्ध करवाता है। रक्त की जरूरत पड़ने पर 01666-238687 नंबर डायल किया जा सकता है।
रक्त क्या है
-हमारे शरीर में लाल रंग का एक तरल पदार्थ होता है जिसे रक्त कहा जाता है। शरीर में रक्त की मात्रा लगभग पांच से छह लीटर होती है। रक्त पाचन पथ से पोषक तत्वों को ग्रहण करके शरीर के विभिन्न कोशिकाओं तक पहुंचाता है। शरीर से विषैले पदार्थों जैसे कि कार्बन डाई ऑक्साइड आदि तत्वों को फेफड़ों और गुर्दों के माध्यम से बाहर निकालता है। शरीर में हार्मोंस व अन्य पदार्थों को लाने-जाने का काम करता है। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी खून की सफेद कणिकाओं द्वारा प्रदान की जाती है।
रक्त के होते हैं चार
1:- लाल रक्त कणिकाएं : फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर के सभी अंगों तक पहुंचाती है। कार्बन डाईऑक्साइड जैसे विषैले तत्वों को बाहर निकालता है।
2:- श्वेत रक्त कणिकाएं : शरीर को रोगों व अन्य संक्रमण से बचाव करती है।
3:- प्लेटलेट्स : डेंगू जैसी खतरनाक बीमारी के मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाया जाता है।
4:- प्लाज्मा : यह रक्त का तरल भाग है जो कि पोषक तत्वों को शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंचाता है।
हमें रक्तदान क्यों करना चाहिए
रक्तदान की कमी एक राष्ट्रीय समस्या है। अशिक्षित एवं ग्रामीण रक्तदान करने से घबराते हैं। आश्चर्यजनक पहलू तो यह है कि भारत में 40 से 100 प्रतिशत साक्षरता दर होने के बावजूद दो प्रतिशत लोग ही रक्तदान नहीं करते। रक्तदान को महादान कहा गया है हम रक्तदान करके किसी को जीवनदान दे सकते हैं। रक्त का कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
कौन कर सकता है रक्तदान
कोई भी व्यक्ति जिसकी उम्र 18 से 65 वर्ष हो वह रक्तदान कर सकता है। कम से कम वजन 45 किलोग्राम होना चाहिए। हीमोग्लोबिन 12.5 होना चाहिए। हर तीन माह के बाद रक्तदान कर सकते हैं।