डेरा सच्चा सौदा में अवैध रूप से स्किन बैंक चलाने के मामले में न्यायालय ने उद्घोषित करार शाह सतनाम डेवलपमेंट फाउंडेशन के चेयरमैन अभिजीत भगत की संपत्ति कुर्क के आदेश दिए हैं। इस संबंध के न्यायालय ने प्रक्रिया शुरू करते हुए जिला मजिस्ट्रेट से संपत्ति की सूची मांगी है।
न्यायालय ने आदेश दिया है कि 16 नवंबर तक सारी सूची प्रस्तुत की जाए। आरोपी अभिजीत भगत चार वर्षों से फरार है। सूची मिलने के बाद आरोपी की संपत्ति देश के किसी भी राज्य के जिले में होगी वहां के मजिस्ट्रेट को न्यायालय द्वारा आदेश दिए जाएंगे। न्यायालय ने सीआरपीसी की धारा 83 के तहत सिरसा जिला मजिस्ट्रेट को आदेश देकर आरोपी अभिजीत भगत की समस्त संपत्ति का ब्यौरा मांगा है।
बता दें कि गत दिनों उद्घोषित अभिजीत भगत ने जिला एवं सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। न्यायालय ने उसे खारिज कर दिया था। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि उद्घोषित आरोपी अग्रिम जमानत का हकदार नहीं।
नवंबर 2021 में निचली अदालत ने आरोपी चेयरमैन अभिजीत भगत के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर डीएसपी संजय बिश्नोई को निर्देश दिया था कि आरोपी को गिरफ्तार कोर्ट समक्ष पेश किया जाए। इसके बाद अदालत ने आरोपी को उद्घोषित करार दिया था।
इस मामले में चीफ मेडिकल ऑफिसर शाह सतनाम सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉ. एमपी सिंह, प्लास्टिक सर्जन डॉ. स्वप्निल गर्ग व टेक्नीशियन स्किन बैंक बलबीर सिंह भी आरोपी हैं। डेरा के स्किन बैंक को सील करने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कानूनी कार्रवाई करते हुए जनवरी 2018 में कोर्ट में शिकायत दर्ज की थी। स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक ने इस संबंध में सिरसा के सिविल सर्जन डॉ. गोबिंद गुप्ता को कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए थे।
हाईकोर्ट ने नियुक्त किया था कोर्ट कमिश्नर
बता दें कि साध्वी रेप मामले में पंचकुला सीबीआई कोर्ट द्वारा डेरा मुखी को बीस साल कैद की सजा सुनाए जाने के बाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को डेरा में सर्च ऑपरेशन चलाने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश एकेएस पंवार को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया था। कोर्ट कमिश्नर के नेतृत्व में सिरसा प्रशासन ने डेरा सच्चा सौदा में सर्च ऑपरेशन चलाया था।
इस दौरान हुई जांच में डेरा परिसर में डेरा प्रबंधन की ओर से खोला गया स्किन बैंक अवैध पाया गया। यह बैंक दो वर्ष पहले ही शुरू हुआ था। स्वास्थ्य विभाग की जांच के अनुसार डेरे में गुरमीत राम रहीम ने बगैर किसी रजिस्ट्रेशन या कागजी कार्रवाई के न सिर्फ इस बैंक को शुरू किया बल्कि डॉक्टरों की मदद से लोगों से स्किन दान में लेनी भी शुरू कर दी। दान में मिली स्किन से कितने लोगों को फायदा हुआ, यह स्किन बैंक के रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं मिला।
दिल्ली के डॉक्टर करते थे मदद
शाह सतनाम अस्पताल की जांच से खुलासा हुआ था कि यहां कई बड़े अवैध काम होते थे। यह पूरा प्रोजेक्ट डेरा मुखी के सहयोगी आदित्य इंसां की देखरेख में चल रहा था। जिसकी मदद दिल्ली के कई बड़े सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टर कर रहे थे।
एनजीओ से लिया दान
जुलाई 2017 में सिरसा स्थित डेरे में एक बड़ा समारोह रखा गया था जिसमें राम रहीम ने सार्वजनिक रूप से हड्डियों का बैंक बनाए जाने की घोषणा भी की थी। सूत्रों के मुताबिक इसी दौरान कुछ एनजीओ ने मिलकर बैंक के लिए 25 और 50 लाख रुपये बतौर दान में भी दिए थे। गुरमीत ने खुद भी एमएसजी फिल्म से हुई कमाई में से 25 लाख इस बैंक के लिए दान किए थे।