बैंक अधिकारी बनकर सिरसावासियों के खातों में सेंध लगाने में साइबर ठग जुटे हुए हैं। हर रोज सैकड़ों कॉल मोबाइल पर आ रही हैं। साइबर ठगों के हाथों अब एक डॉक्टर लाखों की ठगी का शिकार हुआ है।
कालांवाली मॉडल टाउन निवासी डॉक्टर ओमप्रकाश के मोबाइल पर आठ फरवरी को एक कॉल आई थी, कॉल करने वाले ने कहा कि हैलो, मैं स्टेट बैंक का मैनेजर बोल रहा हूं, आपके एटीएम कार्ड पर अंकित 16 अंकों का नंबर और खाता नंबर बताएं, नहीं तो आपका अकाउंट बंद हो जाएगा। ओमप्रकाश जैसे ही ये जानकारी कॉल करने वाले को बैंक अधिकारी समझकर दी तो उसके खाते एक लाख 70 हजार रुपये निकाल लिए गए।
ठगी का पता उसे तब लगा जब वह एटीएम से रुपये निकलवाने गया। बैलेंस चेक किया तो खाते से एक लाख 70 हजार रुपये निकाले जा चुके थे। डॉक्टर को अहसास हुआ कि वह साइबर ठग के हाथों ठगी का शिकार हो चुका है। मॉडल टाउन निवासी डॉक्टर ओमप्रकाश का कहना है कि उसका खाता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा कालांवाली में है। ठगी का पता चलते ही उसने बैंक अधिकारियों को फोन करके खाता बंद करवा दिया। इसके बाद पुलिस थाने जाकर जाकर शिकायत दी। जांच अधिकारी नरेंद्र कुमार का कहना है कि शिकायत पर कार्रवाई करते हुए अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि जिस नंबर से कॉल आई उसकी लोकेशन झारखंड में मिली है। इस घटना से पहले 11 जनवरी को सिरसा के गांव मेहना खेड़ा निवासी किसान अमर सिंह के पास भी इसी जगह से कॉल आई थी, अनपढ़ होने के कारण अमर सिंह ने एटीएम कार्ड के संबंध में सारी जानकारी कॉल करने वाले को दे दी और चंद मिनट बाद उसके बैंक खाते से ठगों ने दो लाख तीन हजार रुपये निकाल लिए गए।
हजारों किलोमीटर दूर से आती है कॉल
हर दिन मोबाइल फोन पर इस प्रसार से आने वाली कॉल आसपास से नहीं बल्कि सिरसा से 1300 किलोमीटर दूर झारखंड के जामताड़ा क्षेत्र आती है। बताया जाता है कि इस क्षेत्र में घर-घर फर्जी कॉल सेंटर चल रहे हैं। यहां के स्थानीय 60 प्रतिशत युवा ऑनलाइन ठगी के धंधे में शामिल हैं। पिछले तीन चार सालों में पुलिस को पता चला है इस प्रकार की 70 प्रतिशत कॉल झारखंड से आती हैं। यहां पर कई क्षेत्रों से साइबर ठगी का धंधा चल रहा है। इसके अलावा यूपी के कानपुर व महाराष्ट्र के पुणे से भी इस प्रकार की फर्जी कॉल सेंटरों का संचालन होने की सूचना है।
ठगी की दी जाती है ट्रेनिंग
विभिन्न राज्यों की पुलिस साइबर ठगी से जुड़ी सूचनाएं सांझा करती है। इन सूचनाओं से यह पता चला है कि झारखंड में साइबर ठगी की बाकायदा ट्रेनिंग दी जाती है। इसके बाद ये साइबर ठगी गिरोह कई टीमों में काम करता है। मेन ठग अलग-अलग जिम्मेदारी देकर काम करवाते हैं। डाटा कलेक्टर्स, कॉल कर एटीएम और खाते की जानकारी लेने और पैसा निकालने वाली टीमों को नकदी के हिसाब से कमीशन दिया जाता है। ठग रात को अपने घरों में नहीं साते बल्कि पास के जिलों या राज्यों में चले जाते हैं। ठगी में प्रयोग लाई जाने वाली मोबाइल सिम गलत नाम और पते पर ली जाती है।
बेबस हो जाती है पुलिस
एक सीनियर पुलिस ऑफिसर का कहना है कि सिरसा से जामताड़ा क्षेत्र करीब 1300 किलोमीटर दूर है। जहां पर बड़े पैमाने पर साइबर ठगी का काम होता है, लेकिन ये पता लगा पाना बेहद मुश्किल है कि ठगी को किसने अंजाम दिया। ठगों का कोई स्थाई ठिकाना नहीं होता। सारा काम लैपटॉप से होता है। ये ठग ऐसे ब्राउजर का इस्तेमाल करते हैं, जिनका आईपी एड्रेस छिपा होता है इसलिए इनका आसानी से पता नहीं लगाया जा सकता।
अब तक 41 लोग हुए शिकार
पुलिस अधीक्षक सतेंद्र गुप्ता जनता से सैकड़ों बार अपील कर चुके हैं कि किसी को भी अपना खता नंबर, एटीएम पासवर्ड न बताएं, देशभर में कई बड़े गिरोह सक्रिय है जो यह जानकारी हासिल करके बैंक खातों से रुपये निकाल लेते हैं। पुलिस अधीक्षक बार-बार अपील करते हैं, लेकिन फिर भी लोग अपनी लापरवाही से ठगी का शिकार हो रहे हैं। पिछले कुछ सालों में करीब 41 ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। ठगी का शिकार होने वालों में बुद्धिजीवी वर्ग ज्यादा है। इसमें तीन महिला पुलिस अधिकारी, पांच मुख्य अध्यापक, दो प्राध्यापक, सरपंच, नंबरदार, सेना के जवान और डॉक्टर तक शामिल हैं।
न बताएं अकाउंट नंबर
मैं सिरसावासियों से अपील करता हूं कि मोबाइल या लैंड लाइन नंबर पर कोई कॉल आए तो अपना अकाउंट व पिन नंबर उसे न बताए। बैंकों की तरफ से कभी ऐसे कॉल नहीं आती, लोगों को गुमराह करने के लिए ठग गिरोह जिस नंबर से कॉल करता है उस नंबर पर कॉलर ट्यून बैंक वाली लगाई होती है। देशभर में सक्रिय ठग गिरोह कभी लॉटरी निकलने का झांसा देते तो कभी आपका इनाम निकलने का, ऐसी किसी भी कॉल पर विश्वास न करें। सीधा पुलिस चौकी या थाने में जाकर शिकायत दें।
-सतेंद्र गुप्ता, पुलिस अधीक्षक सिरसा।