चुनाव आयोग को गलत जानकारी देकर गांव मिठड़ी की चौधर पाने वाले पाल सिंह उर्फ गुरपाल सिंह विवादों में घिर गए हैं।
सिविल जज (वरिष्ठ मंडल) परवेश सिंगला की अदालत ने शुक्रवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला चुनाव अधिकारी को उन्हें सरपंच का चार्ज न देने का आदेश दिया है।
अदालत ने नवनिर्वाचित सरपंच, रिटर्निंग अधिकारी तथा जिला चुनाव अधिकारी को तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई नौ फरवरी को होगी।
गांव मिठड़ी निवासी भूपेंद्र सिंह ने चुनाव से कुछ दिन पूर्व पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करके आरोप लगाया था कि गांव मिठड़ी के सरपंच पद के लिए प्रत्याशी बने पाल सिंह ने पंचायती राज एक्ट 1994 का उल्लंघन करते हुए चुनाव आयोग से जानकारी छिपाई है।
हाईकोर्ट ने सिविल कोर्ट को ट्रांसफर किया मामला :
याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने चुनाव लड़ने पर रोक न लगाते हुए याचिका को डबवाली स्थित सिविल अदालत में ट्रांसफर कर दिया है।
शुक्रवार को सिविल जज (वरिष्ठ मंडल) परवेश सिंगला ने उपरोक्त याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला चुनाव अधिकारी को आदेश दिए कि गांव मिठड़ी के नवनिर्वाचित सरपंच पाल सिंह को सरपंच का कार्यभार न दिया जाए।
क्या है आरोप
शिकायतकर्ता भूपेंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2007 में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां गांव घुकांवाली आए थे।
इस दौरान कुछ लोगों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया था। इसी मामले में पाल सिंह के खिलाफ जानलेवा हमला करने के आरोप में केस दर्ज है।
जोकि अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में विचाराधीन है। भूपेंद्र सिंह के अनुसार पंचायती राज एक्ट की धारा 175 (ए) के तहत कोई भी ऐसा व्यक्ति जिस पर अपराधिक मामला दर्ज है या 10 साल से अधिक सजा वाले केस में चार्जशीटड है, वह चुनाव लड़ने के अयोग्य है।
लेकिन पाल सिंह उर्फ गुरपाल सिंह ने चुनाव आयोग को दिए शपथपत्रों में स्वयं को किसी भी अपराधिक मामले में संलिप्त न होना बताया है। शपथ पत्रों को चुनाव लड़ने के लिए जमा करवाए गए फार्म के साथ लगाया गया है।