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अदालत परिसर की सुरक्षा को लेकर चिंतित प्रशासन:

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36 किलोग्राम अफीम तस्करी के दोषी तस्कर सुक्खा को दस साल कैद
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नारकोटिक कंट्रोल ब्यूरो चंडीगढ़ के स्पेशल पब्लिक प्रोसेक्यूटर बोले, अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में की जाएगी अपील
दोषी तस्कर है बड़ी सजा का हकदार: पब्लिक प्रोसेक्यूटर , जिनको बरी किया गया उन्हें दिलाई जाएगी सजा
सिरसा। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने नशे की तस्करी के दोषी सुखबीर सिंह उर्फ सुक्खा को दस साल कैद व एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं भरने पर उसे एक साल अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। न्यायालय के इस फैसले में दोषी तस्कर को बहुत कम सजा दिए जाने के खिलाफ नारकोटिक कंट्रोल ब्यूरो चंडीगढ़ के स्पेशल पब्लिक प्रोसेक्यूटर विरेंद्र गगनेजा का कहना है कि वे न्यायालय के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर करेंगे। उन्होंने कहा कि दोषी के पास 36 किलो 150 ग्राम अफीम बरामद हुई थी। दोषी तस्कर बड़ी सजा का हकदार है। हाईकोर्ट में अपील दायर करके दोषी तस्कर सुक्खा की सजा बढ़ाने जाने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही न्यायालय द्वारा इस मामले में बरी किए गए लखबीर सिंह उर्फ लक्खा व हरंबस सिंह को सजा दिलाने के लिए भी अपील दायर की जाएगी। बता दें कि इस मामले में सबसे बड़ी खास बात यह है कि सिरसा में अफीम तस्करी के बड़े अड्डे का पर्दाफाश करते हुए चंडीगढ़ नारकोटिक सेल की टीम ने अफीम की इतनी बड़ी खेप सहित तस्कर सुक्खा को पकड़ा था। सिरसा पुलिस की इस नाकामी के कारण तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अश्विन शैणवी ने पूरे सिरसा सीआईए थाने को सस्पेंड कर दिया था।
ये है पूरा मामला : मामले के अनुसार पांच मई 2015 को नारकोटिक कंट्रोल ब्यूरो चंडीगढ़ के डीएसपी कुलदीप शर्मा पर आधारित टीम ने हुडा सेक्टर के मकान नंबर 426 में छापा मारा। वहां मकान मालिक बल्ला शेखू के पुत्र सुक्खा सिंह व उसके भाई लखबीर सिंह उर्फ लक्खा टीम ने दबोच लिया। टीम सदस्यों ने दोनों भाइयों से सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने कई ठिकानों पर मादक पदार्थ होने की बात कही। पुलिस को उनके एक मकान से 16 किलोग्राम अफीम मिली। पूछताछ में दोनों ने जंडवाला जटान स्थित अपने ठिकाने का पता बताया। ठिकाने के साथ लगते पशु तबेले में पुलिस ने तलाशी ली तो यहां से 13 किलो अफीम बरामद हुई। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों के अलग-अलग ठिकानों से सात किलो 150 ग्राम ओर अफीम बरामद की। नारकोटिक कंट्रोल ब्यूरो चंडीगढ़ ने आरोपी सुक्खा, उसके भाई लखबीर सिंह उर्फ लक्खा व हरबंस सिंह के खिलाफ मादक पदार्थ अधिनियम के तहत केस दर्ज करके उन्हें अदालत में पेश किया। अदालत में तीन साल से अधिक समय तक चले इस मामले का वीरववार को निपटारा करते हुए न्यायाधीश जगभूषण गुप्ता ने तस्कर सुक्खा को दोषी करार देकर दस साल कैद की सजा सुना दी। 13 अगस्त को अदालत ने मामले में आरोपी लखबीर सिंह उर्फ लक्खा व हरबंस सिंह को बरी कर दिया था।
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धुकांवाली कांड: आरोपी बलजीत सिंह दादूवाल कोर्ट में नहीं हुए पेश, कोर्ट नहीं सुना सकी फैसला
पिछली चार तारीखों से कोई न कोई आरोपी हो रहा है गैर हाजिर, अब 24 अगस्त को कोर्ट सुनाएगी फैसला
नामचर्चा को लेकर डेरा सच्चा सौदा अनुयायियों व सिखों के बीच हुआ था टकराव
सिरसा। गांव घूकांवाली में डेरा अनुयायियों व सिखों के बीच हुए टकराव मामले में वीरवार को अदालत फैसला नहीं सुना सकी। वीरवार को इस मामले में मुख्य आरोपी में शामिल सिख धर्म प्रचारक बलजीत सिंह दादूवाल अदालत समक्ष पेश नहीं हुए। जिसके चलते अदालत 11 सालों से विचाराधीन इस बहुचर्चित कांड का फैसला नहीं सुना सकी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जरनैल सिंह की अदालत में इस मामले की सुनवाई पूरी हुए डेढ़ माह हो चुका है। आरोपी बलजीत सिंह दादूवाल ने अपने वकील के माध्यम से पेशी पर छूट दिए जाने की एप्लीकेशन भेजी। एप्लीकेशन में अदालत को बताया गया कि बलजीत सिंह दादूवाल का स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण वे अदालत में पेश नहीं हो सकते। जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद अदालत ने फैसले के लिए 24 अगस्त की तारीख मुर्कर कर दी। बता दें कि 13 जुलाई को मामले में आरोपी प्रकाश सिंह अदालत समक्ष पेश नहीं हुआ था। उसके वकील ने वकील ने अदालत को बताया कि प्रकाश सिंह अदालत में पेश होने के लिए घर से रवाना हुआ, लेकिन रास्ते में उसकी तबीयत खराब हो गई। जिसके बाद उसे उपचार के लिए अस्पताल में दाखिल करवाया गया। इसके बाद 23 जुलाई को आरोपी साहब सिंह अदालत समक्ष पेश नहीं हुआ। इस मामले में सिख धर्म प्रचारक बलजीत सिंह दादूवाल, श्री गुरुग्रंथ साहिब सत्कार सभा के प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह खालसा व दशम पातशही गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान प्रकाश साहुवाला, महंत रणजीत सिंह त्रिलोकेवाला सहित 14 लोगों पर डेरा अनुयायियों पर जानलेवा हमला करने का आरोप है। जबकि डेरा सच्चा सौदा के सात अनुयायी के खिलाफ सिखों पर हमले का आरोप है।
ये है पूरा मामला : ओढां थाना क्षेत्र के गांव घूकांवाली में 16 जुलाई 2007 डेरा अनुयायियों ने नामचर्चा का आयोजन किया था। चर्चा थी कि डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम स्वयं सत्संग करने आएंगे। सिख समुदाय ने इसका विरोध किया। इसके बाद डेरा अनुयायियों व सिखों की बीच जबरदस्त झड़प हो गई। हालात पर काबू पाषने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। पुलिस फोर्स ने लाठी चार्ज करके दोनों पक्षों को खदेड़ा। झड़प में सिखों व डेरा प्रेमियों को चोटें आईं। ओढां पुलिस ने डेरा प्रेमियों की शिकायत पर सिख धर्म प्रचारक बलजीत सिंह दादूवाल, श्री गुरूग्रंथ साहिब सत्कार सभा के प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह खालसा व दशम पातशाही गुरु द्वारा कमेटी के प्रधान प्रकाश साहुवाला सहित 14 लोगों के खिलाफ धारा 307 सहित अन्य विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया।
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डीएसपी ने कोर्ट का मेन गेट खुला देख सुरक्षा कर्मियों को लगाई लताड़
सिरसा। जिला अदालत परिसर की सुरक्षा व्यवस्था वीरवार को काफी सख्त कर दी गई। वीरवार को अदालत में घुकांवाली कांड व तस्कर सुक्खा सिंह के मामले में फैसला सुनाया जाना था। इसलिए कोई जोखिम न उठाते हुए पुलिस प्रशासन ने सुबह ही अदालत परिसर के बाहर व अंदर कमांडो दस्ता व पुलिस फोर्स की तैनाती कर दी गई। करीब 11 बजे डीएसपी हैड क्वार्टर रविंद्र सिंवर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे। उन्होंने अदालत परिसर का जजों व कर्मियों के प्रवेशद्वार का गेट खुला हुआ देख सुरक्षा कर्मियों को लताड़ लगाई। डीएसपी ने सुरक्षा कर्मियों से कहा कि सुरक्षा को राम भरोसे न छोडना, कुछ भी हो सकता है। इसके बाद अदालत परिसर के अंदर चप्पे-चप्पे पर एके 47 से लैस कमांडो खड़े खड़े कर दिए गए। पेशी पर आने वाले हर शख्स की तलाशी ली जाने लगी। कमांडो वकीलों की सीटों से लेकर पार्किंग तक पूरा दिन गश्त करते रहे। पुलिस अधीक्षक हामिद अख्तर ने अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए है कि अदालत परिसर की सुरक्षा में तैनात अधिकारी व कर्मचारी ड्यूटी में कोई लापरवाही न बरतें। जो भी लापरवाही से काम करेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फोटो 20: कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था का जायला लेते डीएसपी रविंद्र सिंवर।
फोटो 21: कोर्ट परिसर के अंदर पेशी पर आई महिला की तलाशी लेती पुलिस।
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