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जांच में खुलासा, स्कूलों ने सामान खरीदने में तोड़े नियम

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सिरसा। सिरसा के दो सरकारी स्कूलों ने चाइल्ड वेलफेयर फंड से स्कूलों के लिए सामान खरीद में सरकारी नियमों की अनदेखी की है। इतना ही नहीं दोनों स्कूलों ने पानीपत और रोहतक से हरियाणा उद्योग कार्पोरेशन से जो कोटेशन मंगवाई थी, उस कोटेशन का भी पता नहीं चला कि वे कोटेशन मंगवाने की प्रक्रिया क्या थी।
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शिक्षा विभाग के डिप्टी डीईओ आत्म प्रकाश, कालांवाली सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल अनिल गुप्ता और जिला शिक्षा विभाग के एसओ अनिल गर्ग की जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सीएम विंडो के माध्यम से शिकायतकर्ता आरटीआई एक्टीविस्ट करतार सिंह के पास भेज दी है। जांच कमेटी द्वारा खरीद में सरकारी नियमों का उल्लंघन और ई टेंडरिंग की प्रक्रिया न अपनाए जाने की बात कहकर अनियमितताएं बरतने की रिपोर्ट सौंपी गई है। लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद दोनों स्कूल प्रिंसिपल के खिलाफ कार्रवाई न करके सीएम विंडो पर इसे डिस्पोज ऑफ करने के लिख दिया।

दोनों स्कूलों ने खरीदा था साढ़े पांच लाख से ज्यादा का सामान
जांच कमेटी की रिपोर्ट अनुसार जीएसएसएस रुपावास ने हरियाणा उद्योग कार्पोरेशन से खरीद की। जिस दिन खरीद की उसी दिन ही 6 वाउचर के सिंगल सिंगल पेमेंट की गई। ताकि ई टेंडरिंग की प्रक्रिया न अपनानी पड़े। 50 हजार से ज्यादा के सामान की ई टेंडरिंग करनी पड़ती है। जीएसएसएस रुपावास ने करीब एक लाख 98222 की खरीद की और एक जैसी आइटम की सिंगल सिंगल पेमेंट की। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि जीएमएसएसएस सिरसा ने 30 जुलाई 2018 को 22 वाउचर से सामान खरीदा। यह राशि करीब तीन लाख 63 हजार 545 रुपये बनती है। इन्होंने भी ई टेंडरिंग की प्रक्रिया नहीं अपनाई और एक जैसी आइटम के अलग अलग बिल बनाकर भुगतान कर दिया। साथ ही पानीपत और रोहतक से जो कोटेशन मंगवाई गई है, एकाउंट बुक में ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला जिससे कि यह पता चल सके कि ये कोटेशन व्यक्ति द्वारा दी गई या फिर पोस्ट के माध्यम से आई। ऐसे में खरीद में अनियमितताएं बरती गई हैं।
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ये था मामला
जीएमएसएसएस सिरसा ने जुलाई 2018 में चाइल्ड वेलफेयर फंड से करीब तीन लाख 63545 रुपये से सामान की खरीद की। स्कूल के पास इतनी डीडी पावर नहीं होती कि वह एक साथ इतना सामान बिना टेंडर के खरीदे। खरीद के बाद मामले की पोल खुलने के बाद स्कूल स्टाफ ने रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की। इसी प्रकार से जीएसएसएस रुपावास ने भी करीब एक लाख 98 हजार 222 की खरीद की लेकिन बिना टेंडर किए ही। दोनों ने पानीपत और रोहतक की फर्म से सामान खरीदा। आरटीआई एक्टिविस्ट करतार सिंह ने मामले की शिकायत शिक्षा निदेशालय और सीएम विंडो पर की।

ये है नियम
आरटीआई एक्टिविस्ट करतार सिंह ने बताया कि विभाग कि गाइडलाइन के अनुसार कोई भी सामान खरीदने के लिए स्कूल को 500 रुपये तक कोटेशन की जरूरत नहीं होती। यदि 500 की आइटम खरीद करते हैं तो एक साल में पांच हजार से ज्यादा नहीं हो सकती। 500 से ज्यादा की खरीद पर कोटेशन लेनी पड़ती है और 49990 तक कोटेशन की जरूरत होती है। इससे ज्यादा का सामान खरीदने के लिए टेंडर कॉल करनी पड़ती है और दो समाचार पत्रों में प्रकाशित करवाना होता है। ढाई लाख से ज्यादा की खरीद पर विभागीय वेबसाइट पर देनी पड़ती है।
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रूपावास स्कूल द्वारा खरीदा गया सामान
आइटम, कीमत
12 डस्टबिन, 26760
दो कॉटन दरी, 14676
एक डिस्प्ले स्टाफ स्टेटमेंट, 11670
एक मेडिकल किट, 11227
एक न्यूज पेपर स्टैंड, 15328
एक डिस्प्ले बोर्ड , 7776
6 लेक्चर स्टैंड, 71220
5 ग्रीन बोर्ड, 55330

सिरसा के अनाज मंडी स्थित जीएसएसएस स्कूल द्वारा खरीदा गया सामान
आइटम कीमत
दो लेक्चर स्टैंड, 23586
टेबल वुडेन लेमिना, 15552
तीन फुट स्टैप, 8789
एक डिस्प्ले स्टाफ स्टेटमेंट , 11670
एक बुक शेल्फ, 18968
दो डिस्प्ले बोर्ड गिलास, 19914
एक अलमारी, 22415
दो ग्रीन बोर्ड, 15553
एक रिवॉल्विंग चेयर, 10479
डिस्प्ले बोर्ड, 23331
दो फ्लोर कवरिंग, 14678
दो वुडन टेबल, 15553
दो लेक्चरर स्टैंड, 23586
दो ग्रीन बोर्ड, 15553

हमारे पास इतना समय नहीं होता कि हम किसी कार्रवाई को देखें। काम और भी बहुत हैं। जो रिपोर्ट है वो बता दी गई है।
- राजेश चौहान, जिला शिक्षा अधिकारी।
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