गांव बुर्जभंगू में कथा श्रवण करते हुए महिलाएं।
सिरसा। गांव बुर्ज भंगू में चल रही श्री धेनू मानस कथा के तीसरे दिन कथा व्यास गो ऋषि स्वामी राजेंद्रानंद महाराज के प्रवचनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। स्वामी राजेंद्रानंद महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि गो माता केवल एक प्राणी नहीं, बल्कि सृष्टि की पालक हैं। उनके संरक्षण में ही मानवता की समृद्धि संभव है। जो व्यक्ति गोसेवा करता है, उसे समस्त देवताओं की कृपा स्वत: प्राप्त होती है।
उन्होंने श्रीमद्भागवत, वेदों और अन्य धर्मग्रंथों के संदर्भों के माध्यम से बताया कि गो माता के प्रत्येक अंग में दिव्यता समाहित है। गो दुग्ध, गोमूत्र और पंचगव्य केवल आयुर्वेदिक औषधि ही नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धि के प्रमुख स्रोत भी हैं। महाराज ने कहा कि प्राचीन भारत में राजाओं और महापुरुषों ने अपनी गो भक्ति के बल पर यश और कीर्ति अर्जित की। भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन गोसेवा और संरक्षण का ही संदेश देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे गोशालाओं की रक्षा करें और अपने जीवन में गोसेवा को स्थान दें।
गोमाता की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें : संत परमात्मानंद
कथा में संत परमात्मानंद महाराज ने कहा कि गोमाता की सेवा केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के कल्याण का माध्यम है। उन्होंने समाज से आग्रह किया कि वे गोमाता की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और उन्हें सनातन संस्कृति की मूल आत्मा के रूप में सम्मान दें।
गो रक्षा का संकल्प और भक्तिभाव का अद्भुत संगम
कथा के अंत में गो ऋषि स्वामी राजेंद्रानंद महाराज ने समस्त श्रद्धालुओं को गोरक्षा का संकल्प दिलवाया। उन्होंने कहा कि आज के युग में गोमाता की रक्षा केवल धर्म का नहीं, बल्कि मानवता का परम कर्तव्य बन चुका है। उन्होंने सभी को प्रेरित किया कि वे अपने जीवन में गोसेवा को अपनाएं और अधिक से अधिक गोशालाओं के उत्थान में सहयोग दें। भक्तिभाव के इस दिव्य प्रवाह के पश्चात संगीतमय भजन संध्या और आरती का आयोजन किया गया।