फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शास्त्रों में गो को मां का दर्जा दिया गया : दाधीच

विज्ञापन
​औढ़ा। कथावाचक जयदेव दाधीच कथा करते हुए। संवाद
विज्ञापन
ओढां। गांव रोहिड़ांवाली के निकट नेशनल हाईवे के किनारे स्थित बेसहारा गोमाता अस्पताल में श्रीमद्भागवत कथा में शुक्रवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। कथावाचक जयदेव दाधीच ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गो सेवा का उपदेश देते हुए कहा कि शास्त्रों में गो को मां का दर्जा दिया गया है, इसलिए इसकी सेवा में हमेशा आगे रहना चाहिए।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित के जन्म की कथा सुनाते हुए कहा की द्रौपदी को जब समाचार मिला कि उसके पांचों पुत्रों का वध अश्वत्थामा ने कर दिया है, जिसके बाद द्रौपदी आमरण अनशन पर बैठ गई। इसके बाद अर्जुन अश्वत्थामा को पकड़ने के लिए निकल पड़े। अश्वत्थामा और अर्जुन के मध्य भीषण युद्ध छिड़ गया।

अश्वत्थामा ने अर्जुन पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया, इस पर अर्जुन ने भी ब्रह्मास्त्र छोड़ा। नारद मुनि व महर्षि व्यास के कहने से अर्जुन ने अपने ब्रह्मास्त्र का उपसंहार कर दिया, किन्तु अश्वत्थामा ने पांडवों को जड़-मूल से नष्ट करने के लिए अभिमन्यु की गर्भवती पत्नी उत्तरा पर ब्रह्मास्त्र का वार किया।
विज्ञापन


अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया तो सभी पांडव भयभीत हो गए

जब अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया तो सभी पांडव भयभीत हो गए। भगवान जिसके स्वयं रक्षक होते हैं उसका भला संसार में कोई क्या बिगाड़ सकता है। पापी अश्वत्थामा ने तो उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु को समाप्त करने का भरसक प्रयास किया, लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने उसकी रक्षा की। राजा परीक्षित ने लंबे समय तक धरा पर रहकर धर्म की स्थापना में अपना विशेष योगदान दिया। कृष्ण अश्वत्थामा को श्राप देते हैं की हे पापी अश्वत्थामा तू इतने वधों का पाप ढोता हुआ तीन हजार वर्ष तक निर्जन स्थानों में भटकेगा। तेरे शरीर से सदैव रक्त की दुर्गंध आती रहेगी और तूं अनेक रोगों से पीड़ित रहेगा, फिर अर्जुन ने उसके माथे में लगी दिव्य मणि निकालकर द्रौपदी को दे दी।

इंसान को पाप कर्म कभी भी नहीं करना चाहिए

कथावाचक जयदेव दाधीच ने सुनाया कि जब युधिष्ठिर लौटकर आए और परीक्षित जन्म का समाचार सुना तो वे अति प्रसन्न हुए। उन्होंने गाय, हाथी, घोड़े, अन्न आदि ब्राह्मणों को दान दिए और ज्योतिषियों को बुलाकर बालक के भविष्य के बारे में पूछा। ज्योतिषियों ने बताया कि बालक अति प्रतापी, यशस्वी और दानी, धर्मी, पराक्रमी और भगवान श्री कृष्ण का भक्त होगा। इंसान को पाप कर्म कभी भी नहीं करना चाहिए। इसका अंत अश्वत्थामा की तरह बुरा ही होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें