भिवानी के बहुचर्चित बड़ेसरा हत्याकांड मामले में न्यायालय ने तीसरी बार मुख्य अभियुक्त सहित छह आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। 2017 में गांव बड़ेसरा की महिला सरपंच सुदेश कुमारी की दसवीं की शैक्षणिक योग्यता की आरटीआई लगाए जाने को लेकर खूनी रंजिश शुरू हुई थी, जिसमें एक पक्ष के एक के बाद एक पांच लोगों की हत्या कर दी गई। इसी प्रकरण में सूबे सिंह की हत्या मामले में मुख्य अभियुक्त आनंद उर्फ बबलू पूर्व सरपंच सहित नौ दोषियों को उम्रकैद सजा सुनाई है।
अतिरिक्त सेसन जज डॉ संजीव आर्य की अदालत ने वर्ष 2020 में बडेसरा निवासी सूबे सिंह की गोली मारकर हत्या करने के मामले में मुख्य आरोपी आनंद उर्फ बबलू पूर्व सरपंच को धारा 302, 120 बी के तहत उम्र कैद व 10,000 रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। उसके साथी सूरज उर्फ श्रवण को धारा 302 व 120 बी के तहत उम्र कैद व 10,000 रुपये जुर्माना, वीरेंद्र उर्फ बॉक्सर को धारा 302 व 149 के तहत उम्र कैद, दस हजार रुपये जुर्माना, सूरज उर्फ श्रवण को धारा 302 व 149 के तहत उम्र कैद की सजा व 10,000 जुर्माना, सुमित को धारा 449 व 149 के तहत 10 वर्ष कैद व 5,000 रुपये जुर्माना, मनदीप को धारा 449 व 149 के तहत 10 वर्ष कैद व 5,000 रुपये जुर्माना, वीरेंद्र उर्फ बॉक्सर को 25 शस्त्र अधिनियम के तहत तीन वर्ष कैद व 2,000 रुपये जुर्माना, सुमित को 25 शस्त्र अधिनियम में तीन वर्ष कैद व 2,000 रुपये जुर्माना, मनदीप को 25 शस्त्र अधिनियम में तीन वर्ष की कैद व 2,000 रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।
गांव बड़ेसरा निवासी मोहित ने बवानीखेड़ा पुलिस थाना में जुलाई 2020 में शिकायत दर्ज करवाई थी। जिसमें शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया था कि 15 जुलाई 2020 की सुबह के समय उसके दादा सूबे सिंह उनकी बैठक के बाहर बैठे हुए थे। इसी दौरान वह अपने दादा को चाय देने के लिए गया था तभी आरोपी आनंद अपने अन्य साथियों के साथ उनकी बैठक के आगे आकर बैठक के बाहर बैठे उनके दादा सूबे सिंह की गोलियां मारकर हत्या करके गाड़ी में बैठकर भाग गया था। बवानीखेड़ा पुलिस ने इस संबंध में हत्या की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।
पुलिस अधीक्षक भिवानी नीतीश अग्रवाल ने जिला भिवानी के सभी प्रबंधक थाना, चौकी इंचार्ज व अनुसंधानकर्ताओं को विशेष निर्देश दिए हैं कि संगीन अपराध में शिकायत का बिना किसी विलंब के शिकायत के आधार पर केस दर्ज करें। पुलिस द्वारा महत्वपूर्ण साक्ष्य व तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर प्रभावी पुलिस कार्रवाई करते हुए न्यायालय में आरोपियों को दंड व पीड़ित को न्याय दिलाने का कार्य करें।