वरच्युस क्लब ने शनिवार रात रामलीला पार्क में आयोजित रामलीला के मंच पर हास्य व्यंग्य से भरपूर नाटक ‘आरएसवीपी’ का मंचन किया।
इसमें नाट्य ग्रुप जैतों के कलाकारों ने कीर्ति कृपाल के निर्देशन में सामाजिक ताने-बाने व रिश्तों में उलझे इस नाटक की शानदार प्रस्तुति दी।
नाटक की शुरुआत होते ही बताया जाता है कि आरएसवीपी का मतलब रोंदा सत्ती व्याह तो पहला है। नाटक का मुख्य पात्र सत्ती विदेश जाने की चाह में अपनी पत्नी को तलाक देने के लिए तैयार हो जाता है।
दूसरी ओर ट्रेवलिंग एजेंट उसकी बजाय उसकी पत्नी की शादी विदेश में करवाने के लिए तैयार कर लेते हैं। वे इसके लिए सत्ती को अपनी पत्नी जीतो का बड़ा भाई बनने के लिए मजबूर कर देते हैं।
इससे सत्ती को सबक मिलता है और वह विदेश जाने की जिद छोड़ देता है। नाटक को देखकर दर्शक हंस-हंस कर लोट पोट हो जाते हैं।
नाटक के आखिर में जीतो कहती है कि ‘जेेड़े मुल्क दा खाइए, उसदा बुरा नहीं मंगी दा, लख परदेसी होईये अपना देस नहीं भंडी दा’ और इसके साथ ही नाटक का समापन हो जाता है।
नाटक में सत्ती का किरदार गगनदीप, जीतो का किरदार सिमरनप्रीत कौर, ट्रेवलिंग एजेंट का किरदार हरजोत नटराज, विदेशी दूल्हे का किरदार युसुफ मसीह ने निभाया।
नाटक देखने के लिए पहुंचे एसडीएम सतीश कुमार ने नाटक निर्देशक कीर्ति कृपाल को वरच्युस अवार्ड देकर सम्मानित किया।
इससे पूर्व जय श्री राम नगर नाट्यशाला के मंच पर मुख्यातिथि रमेश काला ने भगवान राम का राजतिलक किया। इस मौके पर रामलीला के सभी कलाकारों को स्मृति चिह्न दिए गए।
गोपाल मित्तल व कपिल बांसल को चलाना अवार्ड दिया गया। मंच संचालन बृज महेंद्रु व संजीव शाद ने किया।
इस मौके पर केशव शर्मा, परमजीत कोचर, तरसेम गर्ग, संतोष शर्मा, रिपुदमन बत्तरा, सुमित भारती, सोनू बजाज, विजय बांसल, राजेंद्र चावला, विजय मुंजाल, वासदेव मेहता व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।