सूरज की बढ़ती तपिश के साथ ही लोगों को बीमारियों ने घेरना शुरू कर दिया है। जिले में उल्टी-दस्त और बुखार के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। मौसम में बदलाव और अनियमित खानपान से पेट संबंधी बीमारियां बढ़ी हैं। सरकारी अस्पताल की ओपीडी हजार प्लस तक पहुंच चुकी है और उल्टी-दस्त और बुखार से ग्रस्त बच्चों व बड़ों का अस्पताल में उपचार चल रहा है। प्राइवेट अस्पतालों के भी यही हालात हैं। दिनभर में बुखार व उल्टी-दस्त के औसतन 8 से 10 मरीज हर प्राइवेट अस्पताल में पहुंचने शुरू हो चुके हैं। मंगलवार को सिविल अस्पताल में चाहे दवाई काउंटर हो या फिर डॉक्टर का कमरा।
सभी जगह भीड़ बढ़ने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी। डॉक्टर भी परेशान दिखे। तमाम मरीजों को डॉक्टर से मर्ज का इलाज कराने के लिए घंटों तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। अस्पताल की ओपीडी में काफी मरीज और तीमारदार परेशान दिखे। लोगों ने कहा कि पर्ची काउंटर पर भीड़ होने से काफी देरी और परेशानी झेलकर पर्ची मिल रही है। डॉक्टरों के पास काफी भीड़ होने से डॉक्टर भी काफी परेशान रहे। गांव खुईयां मलकाना से मलकीत सिंह अस्पताल में अपने बच्चे को दिखाने आया। उसके दो वर्षीय पुत्र प्रभजोत तीन दिन से उल्टी-दस्त लगे हुए हैं। मलकीत सिंह सुबह साढ़े नौ बजे पर्ची बनवाने के लिए लाइन में लगा और दो घंटे बाद 11 बजे उसका नंबर आया। डॉक्टर के रूम में भीड़ होने से काफी देर तक उसे इंतजार करना पड़ा। डॉक्टर दीप का कहना है आज कल गर्मी से मरीजों कि संख्या काफी बढ़ गई है। गर्मी के कारण मरीजों में उल्टी दस्त, बुखार, पेट में दर्द, सांस की बिमारी, निमोनिया आदि के रोग बच्चों में हो रहे हैं। अस्पताल में पर्ची व दवाई काउंटर पर महिला व पुरुष की दोनों लाइन काफी लंबी रही। मंगलवार को सिरसा का पारा बढ़कर 41.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। सूरज की तपन से बचाव के लिए लोग कपड़ा और आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा का उपयोग कर रहे हैं।
पर्याप्त है दवाइयों का स्टाक
सिविल अस्पताल उल्टी दस्त की दवाएं और बच्चों सीरप पर्याप्त मात्रा में है। इसके अलावा ओआरएस के पैकिट भी अस्पताल में उपलब्ध हैं। अस्पताल में करीब 4 हजार ओआरएस पैकिट उपलब्ध हैं। गर्मियों के दिनों में इनकी डिमांड बढ़ जाएगी। मेडिकल वार्ड और ट्रॉमा सेंटर में ज्यादा बीमार बच्चों और बढ़ों का उपचार किया जा रहा है।
फिजीशियन नहीं, दूसरे डॉक्टर कर रहे हैं उपचार
सिविल अस्पताल में फिजीशियन का पद रिक्त पड़ा है। ऐसे में अस्पताल में सामान्य बीमारियों के उपचार सर्जन, एमओ, शिशु रोग विशेषज्ञ व एमएस कर रहे हैं। अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के चलते हमेश कार्यरत चिकित्सकों पर ज्यादा दबाव रहता है। अस्पताल में सामान्य बीमारियोें की रोजाना करीब तीन सौ ओपीडी है। गर्मियों में मरीजों की तादाद बढ़ जाती है।
चिकित्सकों की सलाह
भोजन में तरल पेय पदार्थ मसलन दही, छाछ, बेल का शरबत, सत्तू की लस्सी का सेवन करें।
शरीर में पानी की कमी न हो इसके लिए ग्लूकोज, इलेक्ट्राल आदि मिलाकर पीएं।
घरों के आसपास गंदगी व गंदा पानी एकत्रित न होने दें।
सादा व बिल्कुल ताजा भोजन ही करें, गरिष्ठ व घी, तेल वाले भोजन से बचें।
खुले में बिक रहे खाद्य पदार्थों के साथ ही बर्फ वाले गन्ने के रस व रंगीन शरबत के सेवन से बचें।
उल्टी-दस्त की शिकायत पर नमक, चीनी व पानी का घोल पीएं।
रात में मच्छरदानी लगाकर सोएं, धूप में निकलते समय शरीर को ढककर रखें।
कटे फलों व बाजार में खुले में बिकने वाली खाद्य सामग्री से बचें।
मौसम बदलाव का है असर
मौसम बदलाव का हमारे पर काफी असर पड़ता है, इसलिए मौसम के मुताबिक ही स्वयं को ढालना जरूरी है। गर्मी बढ़ने के साथ उल्टी, दस्त व वायरल के मरीजों की संख्या बढ़ी है, सिविल अस्पताल में उपचार के पर्याप्त मात्रा में दवाएं और संसाधन उपलब्ध हैं। फिजीशियन का पद खाली हैं, लेकिन अस्पताल में अनुभवी वरिष्ठ सर्जन, बाल विशेषज्ञ व एमओ हैं जो इन सामान्य बीमारियों का बेहतरीन उपचार कर रहे हैं। लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए और खासकर बच्चों के खान पान ध्यान रखना चाहिए।
-डॉ. वीरेश भूषण, सिविल सर्जन, सिरसा।