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Sirsa News: वायरल की चपेट में शहरवासी, स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के लिए स्टाफ का इंतजार

Thu, 14 Nov 2024 12:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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रोहित जैन
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कालांवाली। शहर में वायरल के कारण लोग बीमार पड़ रहे हैं। कई-कई घरों में तो पूरा परिवार और एक गली में करीब 40 लोग वायरल की चपेट में हैं। इसको लेकर न तो सरकार गंभीर है और न ही स्वास्थ्य विभाग।
इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सरकार द्वारा स्वीकृत सीएमओ, मेडिकल आफिसर सहित कुल 33 पद खाली पड़े हैं। शहरवासियों ने सरकार से सीएचसी में स्टाफ की कमी को पूरा करने, घर-घर जाकर सर्वे कर सैंपल लेने की मांग की है।
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शहर में ऐसी कोई गली या मोहल्ला नहीं है, जिसमें बुखार, जोड़ों के दर्द, चेहरे पर लाल निशान, खारिश आदि लक्षणों से पीड़ित मरीज न हो। हर दिन सरकारी व निजी अस्पताल में इलाज के लिए मरीजों की भीड़ लग रही है, जबकि सरकारी आंकड़ों में अब तक सिर्फ डेंगू के 8 मरीज ही मिले हैं।

सीएचसी कालांवाली की बात करे तो रोजाना 250 से 300 मरीज इलाज पहुंच रहे हैं। इसमें से ज्यादातर वायरल से पीड़ित हैं। शहर में 25 से अधिक छोटे-बड़े निजी अस्पताल है। इनमें मरीजों का आंकड़ा कई गुणा ज्यादा है। हर निजी चिकित्सक के पास रोजाना 50 से 200 तक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। मरीज महंगे दामों पर अपना इलाज करवाने को मजबूर हैं। संवाद



सीएमओ का एक तो मेडिकल आफिसर के चार पद खाली

सीएचसी कालांवाली में स्वीकृत कुल 53 पद में से 33 पद खाली है। इसमें सीएमओ का एक, मेडिकल आफिसर के चार, फार्मासिस्ट के दो, पीएचएन का एक, लैब टेक्नीशियन का एक, स्टाफ नर्स का एक, रेडियोग्राफर, ओटीए, ऑपथैल्मोलॉजी सहायक का एक, डाटा इंट्री ऑपरेटर एक, स्टेनो टाइपिस्ट एक, ड्राइवर एक, दंत मैकेनिक एक, एमपीएचएस मेल एक, एमपीएचडब्लू मेल के दो, एमपीएचडब्लू फिमेल का एक, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के 13 पद खाली हैं।

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एमपीएचडब्लू का पद खाली होने के कारण नहीं हुई लारवा की जांच

सीएचसी में पिछले कई सालों से एमपीएचडब्लू के पद खाली है। इसके कारण शहर में न लारवा की जांच की जा रही है और न ही बीमारी से बचने की जानकारी आमजन को दी जा रही है। एमपीएचडब्लू होने पर शहर में घर में रखे पानी के बर्तन, कूलर, फ्रिज, गमले, छतों पर रखा पुराना सामान, टंकी के पानी की नियमित जांच की जाती थी और लारवा मिलने पर दवाई का छिड़काव कर नष्ट किया जाता था।



महंगे टेस्ट करवाने को मजबूर मरीज

सीएचसी में सीबीसी के टेस्ट करवाने के लिए नई मशीन तो आई हुई है, लेकिन टेस्ट नहीं किए जा रहे। मरीजों को निजी लैब से सीबीसी व सीआरपी के लिए 200 से 500 रुपये खर्च करने पड़ रहे है। इसके अलावा मरीजों को डेंगू एनएन-1 और फिवर पैनल, जिसमें सीबीसी इएसआर, विडाल, एमपी, यूरिन रूटीन आदि के लिए 500 से 1500 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। चिकनगुनिया का टेस्ट महंगा होने के कारण कोई भी निजी लैब से टेस्ट नहीं करवा रहा।
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विभाग की टीमें शहर में लगातार सर्वे कर रही है। लारवा की भी जांच की जा रही है और उसे तुरंत नष्ट भी किया जा रहा है। सीएचसी में स्टाफ की कमी की हर माह में उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट जाती है। सीबीसी मशीन को पूर्ण रूप से चालू करने के लिए टेंडर होना है। शहर में अब तक 8 डेंगू के मरीज आ चुके हैं, जो ठीक हो चुके हैं। चिकनगुनिया का एक भी मरीज सामने नहीं आया है। -डाॅ. इंद्रजीत, एसएमओ कालांवाली।
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