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बच्चे अभिभावकों को तेजगति से वाहन चलाने से रोकें

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सिरसा डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल में यातायात नियमों की जानकारी देते यातायात थाना प्रभारी। - फोटो : Sirsa
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सिरसा। यातायात पुलिस ने सड़क हादसों को रोकने के लिए अब विद्यार्थियों को नियमों का पालन करने के लिए जागरूक करने का अभियान चलाया है। जागरूकता शिविर में यातायात पुलिस की ओर से बच्चों को ट्रैफिक नियमों के अलावा साइबर क्राइम के बारे में जानकारी दी। इस दौरान यातायात प्रभारी बहादुर सिंह व विद्यालय के अध्यापक मौजूद रहे।
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पुलिस लाइन स्थित डीएवी स्कूल में मंगलवार को यातायात पुलिस की ओर से जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर में थाना प्रभारी बहादुर सिंह ने कहा कि बच्चे अपने अभिभावकों को वाहन तेज चलाने से रोकें। उन्होंने कहा कि दुर्घटना से देर भली है। किसी स्थान पर 10 मिनट देरी से पहुंचने से अच्छा है कि दुर्घटना से बचा जाए। उन्होंने कहा कि वाहन चलाते समय सीट बेल्ट व हेलमेट का हमेशा प्रयोग करें, ताकि अगर कोई दुर्घटना हो तो गंभीर चोट लगने से बचा जा सके। वाहन चलाते समय हेलमेट का प्रयोग करने से दुर्घटना होने पर गंभीर चोट लगने से 95 प्रतिशत तक बचा जा सकता है। यातायात प्रभारी ने कहा कि शराब पीकर वाहन चलाने से बचना चाहिए तथा जो शराब पीकर वाहन चलाता है उसके साथ नहीं बैठे। ऐसे लोग अपने साथ दूसरों की जान को भी खतरे में डालते हैं। इस दौरान एएसआई छोटूराम, रमेश कुमार, मनदीप सिंह, अध्यापक राजेश कुमार, अभिनव शर्मा, कुलदीप, पूजा नरूला, पूनम भूटानी आदि मौजूद रहे।
दुर्घटना होने पर पुलिस को दे सूचना, नहीं होगी कोई पूछताछ
यातायात थाना प्रभारी बहादुर सिंह ने कहा कि अगर रास्ते में कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जानकारी पुलिस के टोल फ्री नं. 100, 1073, 1091 पर दें। रास्ते में अगर कोई घायल मिलता है तो उसे अस्पताल पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि आमतौर पर देखा गया है कि पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने में लोग रुचि नहीं दिखाते। जबकि अगर दुर्घटना में कोई घायल व्यक्ति मिलता तो उसे अस्पताल पहुंचाने वाले से पुलिस की ओर से न तो कोई जानकारी ली जाती है और न ही कोई सवाल जवाब किया जाता है। यह पुण्य का कार्य है। अगर किसी के हाथों से एक भी जान बच जाती है तो वह उसका अहसान कभी नहीं भूलता।
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आपको बच्चों से प्यार नहीं है क्या
जागरूकता शिविर में एक घटना का जिक्र करते हुए थाना प्रभारी ने बताया कि बाजार में उन्हें एक नाबालिग बच्ची स्कूटी चलाते हुए मिली। उस बच्ची के पांव भी जमीन पर नहीं लग रहे थे। जब उन्होंने उसे रोका तो वह रोने लगी तथा कुछ भी नहीं बता रही थी, जिस पर उन्होंने उसे पानी पिलाया व खाने के लिए टॉफी दी। फिर भी वह बच्ची डर के मारे कुछ नहीं बोल पा रही थी। इतने में एक व्यक्ति वहां आया तो उस बच्ची के पिता को जानता था। उस व्यक्ति ने बच्ची के पिता से थाना प्रभारी की फोन पर बात करवाई। जिस पर थाना प्रभारी ने उसके पिता से पूछा कि क्या आपको अपने बच्चों से प्यार नहीं है। इस पर वह व्यक्ति बोला कि बहुत प्यार करते हैं। तो थाना प्रभारी ने कहा कि अगर करते हैं तो इसे वाहन देकर बाजार में क्यों भेज दिया। इसके पांव भी जमीन पर नहीं लगते हैं तथा अगर कोई दुर्घटना हो जाती है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। थाना प्रभारी ने कहा अभिभावक अपने बच्चों को बालिग होने तक वाहन देने से परहेज करें।
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