संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। जनगणना का कार्य 1 मई से शुरू हो जाने के बाद भी सोमवार को तहसील कार्यालय में सुबह जनगणना टूल किट लेने वालों की भीड़ रही। स्कूलों के शिक्षक, चपरासी व क्लर्क स्तर के कर्मचारी लाइनों में लगे हुए थे। कर्मचारियों की कमी के चलते इमरजेंसी में सिरसा ब्लॉक के स्कूलों के स्टाफ को इस कार्य में लगाना पड़ा।
अधिकारियों की मानें तो बीएलओ व अन्य कर्मचारियों की पहले ड्यूटी लगाई गई थी। बाद में बीएलओ की ड्यूटी हटा दी गई। इस कारण कर्मचारियों की कमी हो गई। वहीं, कुछ कर्मचारियों को मेडिकल व अन्य आधार पर छुट्टी दे दी गई या ड्यूटी हटा दी गई। इससे कर्मचारियों की कमी हो गई। ऐसे में निर्णय लिया गया कि स्कूलों के शिक्षकों से लेकर चपरासी तक को जनगणना के लिए मैदान में उतारा जाए।
इसीलिए सोमवार को तहसील में लाइनें बुकलेट व आईकार्ड को लेकर भीड़ देखने को मिली। हालांकि, इन कर्मचारियों में अधिकतर को ट्रेनिंग जनगणना को लेकर नहीं दी गई है। ऐसे में टूलकिट के अंदर की बुकलेट के आधार पर मोबाइल एप चलाना और उसकी प्रक्रिया को कर्मचारियों को समझाना होगा।
इतना ही नहीं, महिलाओं की बड़ी स्तर पर ड्यूटी इस बार जनगणना में लगाई गई है। पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में महिलाओं को दिया गया है। इस कारण मजबूरन महिलाओं को अपने पतियों के साथ जनगणना का काम करना पड़ रहा है। सूत्रों की मानें तो प्रशासन के पास रिजर्व कर्मचारी घट गए हैं। ऐसे में नये बैच को अब जल्द ही ट्रेनिंग देकर तैयार किया जाएगा। उन्हें मैदान में उतारा जाएगा ।
कागजों में नियम कुछ और धरातल पर कुछ और : कुछ कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें 150 घरों का लक्ष्य दिया गया था। दिन-रात काम में लगकर वे अपना लक्ष्य पूर्ण कर चुके हैं। इसके बाद अब लक्ष्य 500 कर दिया गया है। यह सरासर गलत है। कर्मचारी को कहा गया था कि वे अपना लक्ष्य निर्धारित समय पर पूर्ण कर दें तो उनका कार्य पूर्ण हो जाएगा लेकिन धरातल पर ऐसा नहीं है।
शिक्षा विभाग के कर्मचारी ने बताया कि जब उन्होंने इस बारे में अधिकारियों को बताया तो उन्होंने कहा कि आप लिखित में दे दें। उसी आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि यदि किसी ने अपना कार्य पूर्ण कर लिया है तो उच्चाधिकारियों को अवगत करवाए। उसे नियमानुसार रियायत दी जाएगी।