सनमीत सिंह थिंद
सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय ने कैंपस और कॉलेजों में प्रायोगिक परीक्षाओं में ड्यूटी देने वाले करीब 2000 आंतरिक परीक्षकों का पारिश्रमिक रोक दिया है। यह राशि लाखों में है। विश्वविद्यालय ने कोविड के कारण उत्पन्न हुई वित्तीय बाधाओं का हवाला दिया है। विश्वविद्यालय को अबकी बार बजट में 15 करोड़ रुपये कम मिले हैं।
कोविड 19 के चलते सीडीएलयू ने मई-जून में होने वाली प्रायोगिक परीक्षाओं को सितंबर, अक्तूबर, नवंबर 2020 में आयोजित करवाया था। उस समय विद्यार्थियों को थ्योरी परीक्षा के लिए ऑनलाइन व ऑफलाइन का विकल्प दिया गया था। प्रायोगिक परीक्षाएं में वाइवा लेने के लिए बाहरी परीक्षक के साथ आंतरिक परीक्षक की ड्यूटी लगाई जाती है। विश्वविद्यालय ने विभागों के अध्यक्ष, सिरसा व फतेहाबाद के कॉलेजों के प्रिंसिपल को पत्र जारी करके इन परीक्षाओं में ड्यूटी दे चुके आंतरिक परीक्षक को पारिश्रमिक न देने का फैसला लिया है। विश्वविद्यालय का तर्क है कि कोविड 19 के कारण वित्तीय बाधाएं पैदा हुई हैं, विश्वविद्यालय को राज्य सरकार से कोई अतिरिक्त बजट नहीं मिला।
प्रति छात्र मिलते हैं 25 रुपये
विश्वविद्यालय द्वारा कैंपस विभाग, कॉलेजों में प्रायोगिक परीक्षाओं के दौरान ड्यूटी देने वाले परीक्षक को करीब 25 रुपये प्रति छात्र के हिसाब से प्रायोगिक परीक्षा का पारिश्रमिक दिया जाता है। कॉलेज अपने बिल विश्वविद्यालय के पास भेजते हैं, जिसे विश्वविद्यालय द्वारा अदा किया जाता है। वहीं मार्च में शुरू हुईं परीक्षाओं में परीक्षक को पारिश्रमिक दिया जाएगा या नहीं, इस पर विश्वविद्यालय द्वारा कोई फैसला नहीं लिया गया।
विश्वविद्यालय को राज्य सरकार से मिला 35 करोड़ का बजट
सीडीएलयू को अबकी बार राज्य सरकार से करीब 35 करोड़ रुपये का बजट मिला है। पिछली बार विश्वविद्यालय को करीब 50 करोड़ रुपये का बजट मिला था। ऐसे में अबकी बार 15 करोड़ रुपये कम मिले हैं।
कोट्स
विश्वविद्यालय ने परीक्षक को प्रायोगिक परीक्षाओं का पारिश्रमिक जारी न करने का फैसला लिया है। इस संबंध में सिरसा व फतेहाबाद के कॉलेज प्रिंसिपल को पत्र जारी कर दिया गया है।
- राजकुमार सलार, परीक्षा नियंत्रक, सीडीएलयू सिरसा।