जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग बैंक को 10 हजार रुपये मुआवजा व 30 हजार रुपये बीमा राशि देने का दिया आदेश
बीमा कंपनी ने भारतीय स्टेट बैंक की शाखा को ठहराया जिम्मेदार
रबी सीजन 2021-22 में ओलावृष्टि से नष्ट हो गई थी किसान की पांच एकड़ फसल
सीएम विंडो पर शिकायत करने के बाद भी नहीं हुई थी कोई सुनवाई
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सिरसा। प्राकृतिक आपदा से गेहूं की फसल खराब होने के बावजूद बीमा राशि नहीं मिलने पर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने पीड़ित किसान के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने भारतीय स्टेट बैंक की डबवाली रोड शाखा को आदेश दिया है कि वह किसान को 30 हजार रुपये की बीमा राशि के साथ 10 हजार रुपये मुआवजा भी अदा करे। आयोग ने यह भी कहा है कि यदि 45 दिनों के अंदर भुगतान नहीं किया गया तो पीड़ित किसान 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित बीमा राशि लेने का हकदार होगा।
मामले के अनुसार, गांव जोधकां निवासी किसान सुभाष चंद्र ने रबी सीजन 2021-22 के दौरान अपनी पांच एकड़ जमीन में गेहूं की फसल बोई थी। फसल बीमा योजना के तहत बैंक ने उसके खाते से 2023.80 रुपये का प्रीमियम काटकर एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड को भेजने की प्रक्रिया दिखाई। इसी बीच प्राकृतिक आपदा के कारण उसकी फसल पूरी तरह खराब हो गई।
जिला कृषि विभाग की ओर से किए गए सर्वे में यह सामने आया है कि किसान को 6 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से कुल 30 हजार रुपये का बीमा क्लेम मिलना चाहिए। इसके बावजूद किसान को कोई भुगतान नहीं मिला। सुभाष चंद्र ने इस संबंध में सीएम विंडो पर भी शिकायत दर्ज करवाई लेकिन वहां से भी उसे राहत नहीं मिली। संवाद
बैक ने बीमा कंपनी को जमा नहीं कराई प्रीमियम राशि
आखिरकार सुभाष चंद्र ने 20 अप्रैल 2023 को अपने अधिवक्ता के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करवाई। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने आयोग को बताया कि संबंधित किसान का विवरण पीएमएफबीवाई योजना के तहत पोर्टल पर उपलब्ध था लेकिन बैंक की ओर से प्रीमियम राशि जमा नहीं करवाई गई। इस कारण किसान की फसल का बीमा सक्रिय नहीं हो पाया और उसे कवरेज देने से इन्कार कर दिया गया। कंपनी ने इस लापरवाही के लिए बैंक को जिम्मेदार ठहराया।
बैक के कारण किसान को उठाना पड़ा नुकसान
आयोग के अध्यक्ष पदम सिंह ठाकुर ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बैंक की लापरवाही के कारण किसान को नुकसान उठाना पड़ा है। आयोग ने किसान की शिकायत को सही मानते हुए बैंक को आदेश दिया कि वह 30 हजार रुपये की बीमा राशि अदा करे। साथ ही मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च के लिए 10 हजार रुपये का अतिरिक्त मुआवजा भी दिया जाए।