सिंचाई विभाग के कर्मचारियों व किसानों ने चार घंटे की मशक्कत के बाद नहर के कटे हिस्से को भरा
पीड़ित किसानों ने प्रशासन से की प्रति एकड़ 70 हजार रुपये मुआवजा देने की मांग
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संवाद न्यूज एजेंसी
डबवाली। मौजगढ़ हेड से निकलने वाली भाखड़ा नहर काला तीतर के पास सोमवार सुबह टूट गई। इससे 230 एकड़ गेहूं की फसल जलमग्न हो गई। सूचना मिलने पर सिंचाई विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मौके पर पहुंचे। कर्मचारियों ने जेसीबी मशीन से 25 फीट कटी नहर चार घंटे की मशक्कत कर मिट्टी डालकर दुरुस्त की।
सुबह किसान अपने खेतों की ओर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि नहर में कटान है। पानी तेज बहाव के साथ खेतों की तरफ जा रहा है। किसानों ने तुरंत एक-दूसरे को फोन के माध्यम से सूचना दी। गांव में लाउडस्पीकर के जरिए मुनादी कराकर आसपास के गांवों के लोगों को सूचना दी गई। साथ ही सिंचाई विभाग को भी घटना की जानकारी दी गई।
सूचना मिलते ही गांव अबूबशहर, गुरु नानक नगरी, नया राजपुरा, लखूवाना और गीदड़खेड़ा सहित आसपास के कई गांवों के किसान बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। किसानों ने फावड़े, मिट्टी और अन्य संसाधनों की मदद से नहर की कटान रोकने के प्रयास शुरू कर दिए। इस दौरान पानी का बहाव लगातार खेतों में जाता रहा जिससे कई किसानों की गेहूं की फसल डूब गई।
कुछ समय बाद सिंचाई विभाग के जेई रोहित शर्मा अपनी टीम और मशीनरी के साथ मौके पर पहुंचे। किसानों और विभाग के कर्मचारियों की करीब चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दोपहर तक नहर को बांधने में सफलता मिली।
स्थिति का जायजा लेने नहीं पहुंचे बड़े अधिकारी
प्रभावित किसानों का कहना है कि सुबह ही प्रशासन को सूचना दे दी गई थी लेकिन सिंचाई विभाग के अधिकारी देर से पहुंचे जिससे नुकसान बढ़ गया। इसके अलावा, दोपहर तक एसडीएम डबवाली, तहसीलदार और पटवारी सहित कोई भी प्रशासनिक अधिकारी मौके पर स्थिति का जायजा लेने नहीं पहुंचा।
किसान बोले- जल्द गिरदावरी कराए प्रशासन
जिन किसानों की फसल को नुकसान हुआ है उनमें गुरविंदर सिंह, नरेंद्र सिंह, विजेंद्र कुमार, जगदीश कुमार, छिंद्रपाल, जोगिंदर सिंह चीमा, खजान सिंह व भिंदर सिंह सहित कई किसान शामिल हैं। प्रभावित किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द गिरदावरी कराकर नुकसान का सही आकलन किया जाए। प्रति एकड़ लगभग 70 हजार रुपये के हिसाब से मुआवजा दिया जाए।