घग्घर नदी की बाढ़ का खौफ जिलावासियों के दिलो-दिमाग पर छाया हुआ है। घग्गर में जुलाई, अगस्त और सितंबर माह में कई बार बाढ़ आ चुकी है, जिससे कई गांव पानी में डूब जाते हैं और भारी नुकसान होता है। विभाग जुलाई से पहले बांधों की मरम्मत और सफाई आदि पूरा करवाने का दावा कर रहा है, लेकिन इसमें कितनी सच्चाई है यह तो वक्त ही बताएगा।
बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन ने कसरत शुरू कर दी है। जून में तमाम तैयारियों पर काम पूरा कर लिया जाएगा। बांधों की सफाई का काम मनरेगा के तहत मजदूरों से करवाया जाएगा जिसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। विभाग का दावा है कि जुलाई माह से पूर्व सभी इंतजाम कर लिए जाएंगे।
कई बार तबाही मचा चुकी घग्घर से लोग डरने लगे हैं। जुलाई, अगस्त और सितंबर माह में बाढ़ का खतरा बना रहता है। जिला प्रशासन ने संबंधित विभागों को बाढ़ के मद्देनजर सतर्क होने के निर्देश दिए हैं।
घग्घर नदी में बाढ़ की आशंका को लेकर प्रशासन सक्रिय हो चुका है। संबंधित विभागों को बचाव कार्यों के लिए निर्देश दे दिए गए हैं। घग्घर नदी के आसपास रहने गांवों के लोगों के बाढ़ का नाम सुनते ही रौंगटे खड़े हो जाते हैं। संभावित बाढ़ से पूर्व घग्गर जल सेवा मंडल द्वारा कार्य शुरू कर दिए गए हैं।
घग्घर जल सेवा मंडल के कार्यकारी अभियंता एनके भोला ने बताया कि बांधों के भीतर की साइड सफाई का कार्य मनरेगा के तहत करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस कार्य के लिए प्रस्ताव भेजा गया है जो फिलहाल पंचायत विभाग के कार्यालय में पेंडिंग है।
जल्द ही बांधों के भीतरी साइड में सफाई का काम शुरू कर दिया जाएगा। सफाई के बाद बांध में कहीं कमी सामने आई तो उसे तुरंत ठीक करवाया जाएगा। जिले में 75 किलोमीटर और 52 किलोमीटर के लंबे बांध के अंदर झाड़ियों को मनरेगा के तहत मजदूरों से साफ करवाया जाएगा।
531 प्वाइंट की होगी जांच
कार्यकारी अभियंता ने बताया कि जिले की सीमा में 531 प्वाइंट हैं, जहां से बांध में से पाइप लाइन निकाली गई है। सभी प्वाइंट का निरीक्षण शुरू कर दिया गया है औैर जहां कमी होगी उसे ठीक करवाने के लिए संबंधित किसान को निर्देश दिए जाएंगे। इसके अलावा राजस्थान क्षेत्र में साइफन की सफाई करवाई जा चुकी है ताकि पानी की निकासी में अड़चन न आए।
फिलहाल ओटू झील में 647 लेवल पानी है और यदि पानी अधिक आता है तो राजस्थान की ओर छोड़ दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार जिले में आठ लिंक नहरों में भी पानी छोड़ा जा सकेगा, जो बाढ़ को रोकने में मदद करेंगी। बरुवाली लिंक नहर की सफाई करवाई गई है ताकि बाढ़ आने पर कुछ पानी इसमें छोड़ा जा सके।
बाढ़ की संभावना को लेकर संबंधित विभागों को डीसी की ओर से भी तैयारियां करने के निर्देश जारी हो चुका है। 15 से 20 हजार क्यूसेक पानी तक तो बचाया जा सकेगा अगर इससे ज्यादा पानी आ गया तो नुकसान होगा। बाढ़ राहत कार्यों के तहत किश्तियां व लाइफ जैकेट मंगवाई गई हैं। जिले में छह गोताखोर अनुबंध के आधार पर रखे गए हैं। दो मोटरवोट मशीनें उपलब्ध हैं।
घग्घर ने कब-कब बरपाया कहर
- वर्ष 1962 में घग्घर में 37845 क्यूसेक पानी आया था, उस समय जिला के बणी सहित अनेेक गांव बाढ़ की चपेट में आए थे।
- वर्ष 1988 में 34805 क्यूसेक पानी घग्घर नदी में दर्ज किया गया, उस वर्ष मल्लेवाला गांव के पास बांध टूटा था तो दर्जनों गांव डूब गए थे।
- वर्ष 1993 में 40763 क्यूसेक पानी नदी में दर्ज किया गया उस दौरान झोंपड़ा के पास बांध टूटा था तो शहर में भी पानी भर गया था। इस वर्ष अनेक गांव बाढ़ की चपेट में आए।
- वर्ष 1995 में 40313 क्यूसेक पानी रिकार्ड किया गया। इस दौरान भी फरवाईं ओर अन्य कई गांव डूब गए थे।
- वर्ष 2010 में 25920 क्यूसेक पानी ने नदी के आसपास के गांवों में कहर बरपाया था। गांव फरर्वाइं और फिरोजाबाद के निकट बांध टूटने से दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आए थे।