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नौ साल पहले भीख मांगने वाली बच्ची को लगाया था सीने से

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 बेटी का जन्म हो तो बड़ों-बड़ों का मुंह उतर जाता है लेकिन इस खबर को पढ़ने के बाद बेटियों से घृणा करने वाले लोग खुद से नफरत करने लगेंगे। इंदिरा नगर में किराए के मकान में रहने वाले बलविंद्र सिंह की उम्र 62 वर्ष है। करीब एक साल पहले वह ट्रैक्टर चलाते थे।
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आज ऑटो चलाते हैं। नौ साल पहले इस शख्स के साथ हुए घटनाक्रम ने इनकी जिंदगी बदल दी। दरअसल एक नशेड़ी डबवाली की अनाज मंडी में पड़ा हुआ था। उसकी सात वर्षीय बेटी अपना पेट भरने के लिए भीख मांग रही थी। भीख मांगते-मांगते बच्ची वहां ट्रैक्टर लिए खड़े बलविंद्र सिंह के पास पहुंची।

 बच्ची ने बलविंद्र सिंह से पैसे मांगे। उसने बच्ची से सवाल किया कि भीख क्यों मांगती हो। पलटते हुए बच्ची ने जवाब दिया कि पेट दा सवाल है। बलविंद्र ने उसे वही दिलाया, जो उसने मांगा। बलविंद्र ने नशेड़ी से उसके परिवार के बारे में पूछा। नशेड़ी की चार बेटियां थी।
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 ट्रैक्टर चालक ने उससे पूछ लिया कि वह दो बेटियों को उसे दे दे। नशेड़ी ने तुरंत जवाब दिया कि तू इसे ही संभाल ले। जिस पर बलविंद्र सात वर्षीय बच्ची को घर ले आए। उसे स्कूल भेजना शुरू किया। 16 वर्षीय सुमनपाल अब नौवीं कक्षा में पढ़ती है।

आज तक नहीं छोड़ी अंगुली
करीब एक साल पहले उम्र दराज बलविंद्र ने ट्रैक्टर चलाना छोड़ दिया। बेरोजगार होने के बाद उन्होंने तत्कालीन उपमंडलाधीश सुभाष श्योराण के पास अर्जी लगाकर काम मांगा। इस बीच उनका तबादला हो गया। उपमंडलाधीश सतीश कुमार आए। बलविंद्र ने पुन: अर्जी दाखिल की।

 उपमंडलाधीश सतीश कुमार की बदौलत उन्हें ऑटो गरुड़ मिली। हर रोज 400 से 500 रुपये कमाने वाले बलविंद्र सुमनपाल को अपनी बेटी मानते हैं। बेटी की खातिर उनके भतीजे-भतीजियां तक दूर हो गए लेकिन उसने सुमनपाल को नहीं छोड़ा। खुद हृदय रोगी होने के बावजूद वे बेटी की अच्छे से परवरिश कर रहे हैं। उन्हेें शिक्षा दिला रहे हैं। नौ साल पहले पकड़ी बच्ची की अंगुली, वह आज तक थामे हुए है।

बेटी को देखना चाहते हैं आगे
नौ साल पहले मैंने सुमनपाल को गोद लिया था। उसे पहली कक्षा में दाखिल करवाया था। आज वह नौवीं में पढ़ रही है। हालांकि इस बार वह फेल हो गई थी लेकिन वह मायूस नहीं। बेटी को पुन: उसी कक्षा में दाखिल करवाया है। वह सुमनपाल को पढ़ा-लिखाकर अच्छा अफसर बनाना चाहता है।
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-बलविंद्र सिंह, चालक


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