वर्ष 2019 में सिरसा में राजनीतिक तौर पर बड़ी हलचल हुई। इस वर्ष में पिछले 32 सालों से हार का मुंह देख रहे उम्मीदवार विधानसभा चुनाव जीते तो किसी के बेटे ने पिता की हार का रिकार्ड तोड़कर उसे जीत में बदला। वहीं यह वर्ष कई को राजनीतिक शिखर पर पहुंचाया तो किसी को धरातल पर। इस वर्ष में इनेलो को एक के बाद एक विधायक छोड़ते चले गए। आलम यह हुआ कि पिछले विधानसभा चुनावों में 19 सीटों वाली इनेलो अबकी बार प्रदेश में 90 विधानसभा सीटों से एक ही सीट जीत पाई। सिरसा जिले की ऐलनाबाद विधानसभा सीट से अभय सिंह चुनाव जीते। जिले की चार विधानसभा सीटों पर इनेलो समर्थित उम्मीदवार हारे। जबकि वर्ष 2014 में जिले की पांचों विधानसभा सीटों पर इनेलो का कब्जा था।
जजपा से उपमुख्यमंत्री बने दुष्यंत चौटाला
प्रदेश की 90 विधानसभा सीटों पर जजपा ने चुनाव लड़ा था। लेकिन केवल दस सीटों पर ही जीत दर्ज कर पाई। लेकिन फिर भी सत्ता की चाबी अपने हाथ में रखते हुए गठबंधन सरकार में उप मुख्यमंत्री बने। ऐसे में वे प्रदेश के सबसे युवा उप मुख्यमंत्री बने और सिरसा जिले के चौटाला गांव से ताल्लुक रखते हैं। चौटाला गांव से संबंध रखने वाले पांच व्यक्ति विधायक बने हैं। जिसमें से चौधरी देवीलाल के कुनबे से चार विधायक हैं। जिसमें कि बिजली मंत्री रणजीत सिंह, अभय सिंह चौटाला, दुष्यंत चौटाला, नैना चौटाला हैं। जबकि इस गांव से ही अमित सिहाग भी संबंध रखते हैं।
वर्ष 2019 में पहली बार भाजपा का सांसद बना
इस वर्ष जिले में लोकसभा चुनावों में पहली बार सिरसा संसदीय सीट पर कमल खिला। सुनीता दुग्गल सांसद का चुनाव जीतीं। अभी तक कभी इस संसदीय सीट पर कमल नहीं खिला था। लेकिन इसी वर्ष में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा का कोई भी उम्मीदवार विधानसभा चुनाव जीत नहीं पाया।
32 साल बाद विजयी हुए रणजीत सिंह
वर्ष 2019 के विधानसभा चुनावों में पिछले 32 सालों से चुनाव हार रहे रणजीत सिंह चौटाला को जीत नसीब हुई। कांग्रेस से टिकट कटी तो चौ. रणजीत सिंह ने इस बार किसी पार्टी का साथ ना लेकर खुद निर्दलीय ही चुनाव लड़ने का फैसला किया और विपक्षी पार्टी को करीब 20 हजार वोटों की गिनती से हराया। इससे पहले रणजीत सिंह कांग्रेस की टिकट पर दो बार रानियां विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं और हार रहे थे। जिसको लेकर रणजीत सिंह ने निर्दलीय ही चुनाव लड़ने का फैसला लिया और जीत हासिल की। रणजीत सिंह 1987 में चौधरी देवीलाल के नेतृत्व में लोकदल की सरकार में कृषि मंत्री बने थे।
कांडा तीसरे चुनाव में दूसरी बार जीते
वर्ष 2019 का विधानसभा चुनाव में सिरसा से हलोपा उम्मीदवार गोपाल कांडा ने निर्दलीय उम्मीदवार गोकुल सेतिया को हराकर जीत दर्ज की। हालांकि कांडा बड़े ही कम अंतर से जीते हैं। इससे पहले गोपाला कांडा 2009 में जीते थे और 2014 में हारे थे। पहली बार युवा उम्मीदवार गोकुल सेतिया चुनाव लड़े।
डॉ. केवी सिंह के बेटे अमित सिहाग जीते
डबवाली से कांग्रेसी नेता व पूर्व ओएसडी डॉ. केवी सिंह भी कभी विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाए। वे लगातार दो चुनाव डबवाली विधानसभा सीट से हारे। लेकिन अबकी बार खुद टिकट न लेकर अपने बेटे अमित सिहाग को दिलाई। अमित सिहाग पहली बार ही विधानसभा चुनाव जीत गए।