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चालान काटे तो बच्चों को ऑटो में छोड़ भागे चालक

Fri, 12 Feb 2016 01:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/सिरसा
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मासूमों की जान से खिलवाड़ करने वाले ऑटो रिक्शा चालकों पर वीरवार से ट्रैफिक पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। दोपहर में ट्रैफिक इंचार्ज स्कूलों की छुट्टी होते ही रेलवे स्टेशन रोड पर अपनी टीम के साथ चेकिंग करने पहुंचे।


क्षमता से अधिक बच्चे बैठाने वाले ऑटो रिक्शा चालकों का पुलिस ने चालान काटना शुरू किया तो कुछ चालक बच्चों को ऑटो में ही छोड़कर भाग गए। पुलिस की सख्ती देख ऑटो चालकों में हड़कंप मच गया। बाद में जब बच्चे स्कूल से छुट्टी के बाद घर नहीं लौटे तो अभिभावक खुद अपने बच्चों को लेने स्कूल पहुंचे।
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वीरवार को ट्रैफिक पुलिस क्षमता से अधिक बच्चे बैठाने वाले ऑटो चालकों पर सख्त नजर आई। वहीं बच्चों को ऑटो में छोड़कर भागने वाले चालकों के खिलाफ अभिभावकों ने रोष जताया। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को इस तरह ऑटो में छोड़कर भागना चालकों की घोर लापरवाही है। पुलिस ने 24 ऑटो रिक्शा चालकों का चालान किया और जिन चालकों के पास कागजात कम मिले, उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया।

अमर उजाला ने बच्चों की सुरक्षा ताक पर रखकर नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले वाहनों से संबंधित समाचार दस फरवरी को प्रकाशित किया था। इस समाचार से संज्ञान लेेते हुए ट्रैफिक पुलिस ने विशेष अभियान शुरू किया है। ट्रैफिक इंचार्ज अनिल सोढ़ी ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे को प्रमुखता से उठाने पर अमर उजाला की पहल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।

जिंदगी से बंद करो खिलवाड़
ऑटो चालक का फोन आया था, जिसमें उसने कहा था कि बच्चे रेलवे रोड पर खड़े हैं, आकर ले जाओ। बच्चे ऑटो के पास काफी देर तक खड़े रहे। मेरे पहुंचने के बाद बच्चों ने राहत की सांस ली। ऑटो चालकों ने लापरवाही का परिचय दिया है। मासूम बच्चों को छोड़कर भाग जाना गलत है। चालकों को नियमों के अनुसार चलना चाहिए। चंद रुपयों के लालच में बच्चों की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़ बंद होना चाहिए।
दीपक गनेरीवाला, अभिभावक

नियमों से ज्यादा रुपयों की परवाह
नियमों की परवाह भले ही स्कूल संचालकों को हो या न हो, लेकिन नियमों से कहीं ज्यादा उन्हें रुपयों परवाह होती है। शहर की सड़कों से गुजरने वाले स्कूल वाहनों को देखा जाए तो शायद ही कोई वाहन पूरी तरह से सुरक्षा मानकों पर खरा उतरता नजर आए। हजारों रुपये किराया वसूलने के बावजूद क्षमता से अधिक बच्चों को बसों में बैठाया जाता है। इतना ही नहीं कुछ स्कूलों ने तो सस्ते साधन के तौर पर ऑटो वालों तक से डील कर ली है। तीन पहियों की इस सवारी में बच्चों को ठूंस-ठूंसकर भरा जाता है।

ऑटो में स्कूली बैग पीछे लटकाना हो सकता है खतरनाक
ऑटो रिक्शा एक सिंगल हैंड गाड़ी है। इसमें सवारी बैठने के बाद वजन 945 किलोग्राम के करीब हो जाता है। इसमें एक ड्राइवर के साथ तीन सवारी ही मान्य हैं। इसके अलावा यदि कोई ड्राइवर सात से ज्यादा सवारी बैठाता है तो ऑटो रिक्शा के पलटने का खतरा होता है। ड्राइवर की बगल में बैठना भी खतरे से खाली नहीं है। ड्राइवर के साथ बैठने पर हैंडल सही नहीं मुड़ता। दोनों बाजू की मूवमेंट सही नहीं होने और ड्राइवर के बाजू पर किसी का हाथ लगने पर बैलेंस बिगड़ सकता है। वहीं यदि बच्चे के बैग ऑटो के पीछे लटकाए जाते हैं, जिससे ऑटो को मोड़ते समय बैलेंस बिगड़ सकता है।

हादसे का शिकार हो चुके हैं कई बच्चे
जिले में स्कूली बच्चों से खचाखच भरे ऑटो रिक्शा कई बार दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं। 19 जनवरी को ही ऑटो रिक्शा में सवार दस बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। गनीमत यह रही कि बच्चों की जान बच गई। कुछ समय पहले स्कूल वाहन से उतरते समय  एक बच्चा हादसे का शिकार हो गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी।
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सख्ती से से निपटेंगे
बच्चों की जिंदगी से तनिक भी खिलवाड़ सहन नहीं किया जाएगा। ऑटो रिक्शा में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने वाले चालक का  चालान किया जाएगा। ट्रैफिक पुलिस की नजर लगातार ऑटो रिक्शा पर रहेगी। जो भी नियमों की अवहेलना करता मिला, उससेसख्ती से निपटा जाएगा।
अनिल सोढ़ी, ट्रैफिक इंचार्ज सिरसा
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