कालांवाली। शहर निवासी 14 वर्ष की आयु में बालिका सीरत जैन पुत्री काका जैन ने अठाई व्रत तपस्या की है। महासाध्वी सर्वज्ञ महाराज एवं महासाध्वी नमिता महाराज के पावन सानिध्य में यह तपस्या कालांवाली में पहली बार इतनी छोटी उम्र में संपन्न हो रही है। सभा के प्रधान संदीप जैन ने बताया कि कालांवाली में वर्ष 1937 से चातुर्मास का आयोजन होता आ रहा है।
सीरत जैन ने इस तपस्या के दौरान केवल प्रासूक जल (उबाल कर ठंडा किया गया पानी) का ही सेवन किया। यह व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है और जैन धर्म में इसकी विशेष महिमा बताई गई है। इस विशेष तपस्या के उपलक्ष्य में सीरत जैन की मेंहदी रस्म दो अगस्त को आयोजित की जाएगी।
कार्यक्रम के दौरान सीरत को मंगल गीतों और जैन धर्म के जयघोषों के साथ घर से सामाजिक कार्यक्रम स्थल तक लाया जाएगा। वहां समाज की ओर से उनका भव्य अभिनंदन किया जाएगा। इस अवसर पर शहर एवं आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु शिरकत करेंगे। समाज के वरिष्ठ जनों एवं धार्मिक प्रवृत्ति के लोगों ने का कहना है कि महासाध्वी के मार्ग दर्शन में यह तपस्या धार्मिक आस्था, आत्मसंयम और जीवन की उच्च साधना का प्रतीक है।
बालिका सीरत जैन की इस तपस्वी भावना और साधना को समाज की ओर से अनुमोदना, मंगल गीत और पुष्पवर्षा के माध्यम से सम्मानित किया जाएगा।