चोपटा।साहिल ज्याणी अपने परिवार के लिए साथ। स्वयं
चोपटा। कहते हैं कि मजबूत इच्छाशक्ति, निरंतर अभ्यास और अनुशासन से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। पैंतालिसा क्षेत्र के गांव खेड़ी के 18 वर्षीय साहिल ज्याणी ने यह सिद्ध कर दिया। महज 18 वर्ष की आयु में अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया को पहले ही प्रयास में सफलता से पार कर साहिल ने यह दिखा दिया कि संसाधनों की कमी से ज्यादा महत्वपूर्ण है समर्पण और मेहनत। साहिल ने भारतीय सेना में अग्निवीर बनकर अपने परिवार और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
लक्ष्य से समझौता नहीं किया
साहिल की मां राजबाला ने बताया कि साहिल बचपन में सेना में जाने का सपना देखा करता था। वह लकड़ी की बंदूक थाम देशभक्ति के रंग में रंग जाता था। छोटी उम्र में ही उसने अनुशासन अपनाया और दौड़ को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया। उसने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। मां ने गर्व के साथ कहा कि साहिल परिवार का पहला सदस्य है, जो भारतीय सेना में शामिल हुआ है।
साहिल के पिता दलीप सिंह ने बेटे की सफलता पर गर्व जताया और कहा कि अग्निवीर की चयन प्रक्रिया बेहद कठिन होती है और इसे पार करना कोई आसान काम नहीं है। किसान का बेटा होने के बावजूद साहिल ने अपने दम पर यह मुकाम हासिल किया है। यह सिर्फ हमारे परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। यह संदेश है कि सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखे जा सकते हैं और उन्हें साकार भी किया जा सकता है।
बरेली में ट्रेनिंग के लिए हुए रवाना
साहिल ने इस वर्ष रामपुरा ढिल्लो स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी की। अपनी शिक्षा का अधिकांश हिस्सा उन्होंने सरकारी स्कूल से प्राप्त किया। साहिल के पिता दलीप सिंह किसान हैं और मां राजबाला गृहिणी हैं। 19 नवंबर को अग्निवीर भर्ती परीक्षा का अंतिम परिणाम जारी हुआ, जिसमें साहिल का नाम चयनित सूची में था। इस सफलता के बाद साहिल 12 दिसंबर को बरेली, उत्तर प्रदेश स्थित सेना के ट्रेनिंग सेंटर के लिए रवाना हो गए, जहां वे छह महीने की कड़ी सैन्य ट्रेनिंग प्राप्त करेंगे।
गांव और क्षेत्र के युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत
साहिल ज्याणी की इस उपलब्धि ने गांव खेड़ी और नाथूसरी चौपटा क्षेत्र के युवाओं को प्रेरणा दी है। उनकी सफलता ने यह संदेश दिया कि अगर इरादा मजबूत हो और मेहनत से काम किया जाए, तो किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है। साहिल की कहानी आज के युवाओं के लिए एक बड़ा प्रेरणास्रोत बन गई है। उनकी उपलब्धि ने साबित कर दिया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि इंसान पूरी लगन और समर्पण के साथ मेहनत करता है, तो वह किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल कर सकता है।