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जिले के 166 खेतों में जलाई गई पराली

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पराली संबंधित दिशा- निर्देश देते उपायुक्त अशोक गर्ग। - फोटो : Sirsa
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जिले में धान की कटाई का सीजन चल रहा है। जिसके साथ ही पराली जलाने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। प्रशासन ने पूरे जिले में पिछले एक सप्ताह में 166 ऐसे खेतों की पहचान की है, जहां पर पराली जलाई गई है। ऐेसे में प्रशासन इन किसानों को जुर्माना भी करेगा। यदि किसानों ने जुर्माना न अदा किया तो उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज होगी।
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जिला में 85 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की बिजाई की गई थी। प्रशासन ने पराली जलाने की सूचना देने के लिए दो रिपोर्टिंग सेल बनाए हैं। जिसके नोडल अधिकारी कृषि विभाग के उप कृषि निदेशक बाबूलाल हैं। एक रिपोर्टिंग सेल डीसी कार्यालय में है और दूसरा कृषि विभाग कार्यालय में बनाया गया है। प्रशासन ने गांवों में पराली जलाने को रोकने के लिए तीन सदस्यों की कमेटी गठित की है। जिसमें नंबरदार, ग्राम सचिव व सहायक कृषि अधिकारी शामिल हैं। गांव में पराली जलाने पर तीन सदस्यीय कमेटी प्रशासन को सूचना देगी और मौके पर पहुंच कर फायर बिग्रेड की गाड़ी को बुलाकर आग बुझाएगी। फायर बिग्रेड का खर्च संबंधित किसान से वसूल किया जाए। यदि किसी गांव में पराली जलाई गई और टीम ने प्रशासन को सूचना न दी तो टीम के खिलाफ ही कार्रवाई की जाएगी।
62 पंचायतों को दस लाख तक के कृषि यंत्र अनुदान पर दिए जाएंगे
फसल अवशेष प्रबंधन के लिए प्रशासन पंचायतों को दस लाख रुपये तक कृषि यंत्र अनुदान पर उपलब्ध करवाने जा रहा है। जिले की 62 पंचायतों को कृषि उपकरण अनुदान पर देने हैं। इसके लिए 41 पंचायतों ने कृषि विभाग के पास आवेदन भी जमा करवा दिए हैं। यदि कोई भी ग्राम पंचायत इन कृषि यंत्रों को लेना चाहती है तो वे प्रस्ताव पास करके 10 लाख रुपये तक के कृषि यंत्र ले सकती है। ये कृषि यंत्र किसानों को नो प्रोफिट नो लोस पर उपलब्ध करवाए जाएंगे।
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पिछले वर्ष 1900 जगहों पर जलाई गई थी पराली
पिछले वर्ष धान की कटाई के बाद 1900 जगहों पर पराली जलाई गई थी। करीब आठ किसानों पर एफआईआर दर्ज की गई थी। साथ ही किसानों से 35 लाख रुपये जुर्माना वसूला गया। वहीं पराली को लेकर ही गांव करीवाला के सरपंच बूटा सिंह को तत्कालीन डीसी प्रभजोत सिंह ने सस्पेंड कर दिया था। हालांकि बाद में उन्हें बहाल कर दिया गया।
ये है जुर्माने का प्रावधान
दो एकड़ तक पराली जलाने पर 2500 रुपये, दो से पांच एकड़ तक पांच हजार रुपये, पांच से ऊपर पर 15 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है। यदि दोबारा पराली जलाई तो हर बार 15 हजार रुपये वसूले जाएंगे। जुर्माना न भरने पर एफआईआर का प्रावधान है।
डीसी ने पंचायतों व अधिकारियों की ली बैठक
उपायुक्त अशोक कुमार गर्ग ने कहा कि धान की पराली जलाने से न केवल भूमि की उर्वरा शक्ति कम होती है अपितु मानव जीवन पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। वे बुधवार को स्थानीय पंचायत भवन में जिला के समस्त सरपंचों, ग्राम सचिवों, नंबरदारों, पटवारियों, कृषि विकास अधिकारी व विभिन्न गांवों के किसान की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उपायुक्त ने कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के साथ-साथ केंद्र व राज्य सरकार इसे लेकर बहुत गंभीर है। ग्राम स्तरीय कमेटियां कड़ी नजर रखें यदि कोई भी फसल अवशेष जलाने का मामला सामने आता है तो उसकी सूचना तुरंत प्रशासन को दें। तहसीलदार व बीडीपीओ को निर्देश दिए कि पटवारियों व ग्राम सचिवों से प्रतिदिन उनकी रिपोर्ट लें। यदि कोई पटवारी या ग्राम सचिव समय पर रिपोर्ट नहीं देता तो उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई करें।
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