सिरसा। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार बेहद गंभीर है। इसके प्रोत्साहन के लिए सरकार ने योजना चलाई है। प्रायोगिक तौर पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग के अधिकारी प्रयासरत हैं। किसानों को गांव-गांव जाकर प्राकृतिक खेती के बारे में बताया जा रहा है। इच्छुक किसानों का ऑनलाइन आवेदन करवाया जा रहा है।
प्राकृतिक खेतों को बढ़ावा देने का मुख्य कारण किसानों को रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से होने वाले नुकसानों से बचाना है। यदि किसान दो से तीन एकड़ जमीन पर गेहूं और अन्य फसलों का उत्पादन करेगा तो स्वयं को बीमारियों से बचाकर रख सकता है। क्योंकि रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से कैंसर, हृदयरोग, दमा आदि गंभीर बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है। इनसे लोगों को बचाने के लिए सरकार किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का प्रयास कर रही है।
यह है योजना
चार ड्रम के लिए 3,000 रुपये सरकार देगी।
प्रदर्शन के लिए किसान को 4,000 रुपये की राशि दी जाएगी।
विशेष रूप से कुरुक्षेत्र में किसानों की प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।
देसी गाय के लिए किसान को 25,000 रुपये का अनुदान दिया जाएगा।
प्राकृतिक खेती के लिए सरकार विशेष अनुदान, प्रशिक्षण और देसी गाय खरीदने के लिए मदद दिलवा रही है। ताकि किसान कीटनाशकों का प्रयोग कम करें।
इस वेबसाइट पर कर सकते हैं आवेदन
www.agrihariyana.gov.in,naturalfarming
मिट्टी के नमूनों की होगी जांच
अधिकारियों के अनुसार प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को लाभ देने के साथ साथ उनकी भूमि की मिट्टी जांची जाएगी। उनके खेतों की मिट्टी की उर्वरा शक्ति जांचने के लिए चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार में नमूने भेजे जाएंगे। विवि की रिपोर्ट के आधार पर ही भूमि की तीन साल तक जांच चलेगी।
प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लिए विभाग की ओर से किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इस योजना के तहत 352 किसानों को जोड़ा गया है। गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है। -
डॉ. सुखदेव कंबोज, उप कृषि निदेशक, कृषि विभाग।