बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से सरकार खौफजदा रही। परिणामस्वरूप सबस्टेशनों पर हथियारों से लैस पूर्व सैनिकों को तैनात किया गया। जबकि कार्यालयों की सुरक्षा पर स्थानीय पुलिस को लगाया गया। बुधवार को बिजली निगम मंडल डबवाली में कार्यरत 226 रेगुलर कर्मचारियों में से 146 तथा आउटसोर्सिंग के तहत नियुक्त 193 कर्मचारियों में 68 हड़ताल पर रहे। अदालत की पाबंदी के बाद बिजली कर्मचारियों ने कार्यालय से पांच सौ मीटर दूर रहकर ऐलनाबाद रोड पर मजदूर तथा किसान यूनियन सदस्यों के साथ मिलकर धरना दिया। सरकार के विरुद्ध नारेबाजी करके प्रदर्शन किया। हड़ताल के दूसरे दिन वीरवार को कर्मचारी सीएम मनोहर लाल खट्टर का पुतला फूंकेंगे।
यहां रही हड़ताल
मंडल डबवाली के तहत आने वाले उपमंडल डबवाली तथा चौटाला में हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। उपमंडल डबवाली में रेगुलर 84 कर्मचारियों में से 76 तथा 53 आउटसोर्सिंग कर्मचारियों में से 32 हड़ताल पर रहे। जबकि चौटाला में कुल 35 रेगुलर कर्मचारियों में से 34 हड़ताल पर रहे। 29 आउटसोर्सिंग कर्मचारियों में से 21 हड़ताल पर रहे। उपमंडल चौटाला में सर्वाधिक 97.14 फीसदी रेगुलर कर्मचारी हड़ताल पर रहे। दूसरी ओर कालांवाली में हड़ताल बेअसर साबित होती नजर आई।
बिजली निगम के रिकॉर्ड अनुसार 88 रेगुलर कर्मचारियों में से 20 हड़ताल पर रहे। कुछ ऐसी ही स्थिति आउटसोर्सिंग की रही। उपमंडल कालांवाली में 106 कर्मचारियों में से महज 15 आउटसोर्सिंग कर्मचारी ही हड़ताल पर गए। बिजली निगम मंडल डबवाली में कार्यरत 64.60 फीसदी रेगुलर कर्मचारी हड़ताल पर रहे। उनके साथ करीब 35.23 फीसदी आउटसोर्सिंग कर्मचारी भी हड़ताल पर चले गए।
ऐलनाबाद रोड़ पर जुटे हड़ताली बिजली कर्मचारियों का साथ भवन निर्माण कामगार यूनियन, अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन ने दिया। सरकार के खिलाफ धरना दिया। नारेबाजी करके रोष जताया। मंडल डबवाली के अंतर्गत आने वाले 19 सबस्टेशनों की सुरक्षा के लिए निगम ने 38 हथियारबंद पूर्व सैनिक तैनात किए हुए हैं। प्रत्येक सबस्टेशन पर बिजली को सुचारू रूप से चलाने के लिए आउटसोर्सिंग से पांच-पांच कर्मचारियों की नियुक्ति की हुई है। कार्यालयों की सुरक्षा पुलिस कर रही है। वीडियोग्राफर भी तैनात हैं।
एक दिन में 25 लाख का झटका
बिजली कर्मचारियों की एक दिन की हड़ताल से बिलिंग कार्य बुरी तरह से प्रभावित हुआ। कालांवाली, चौटाला तथा डबवाली में एक ही दिन में करीब 25 लाख का झटका लगा। चूंकि प्रतिमाह निगम आठ करोड़ रुपये का कलेक्शन करता है।
कर्मचारी नहीं थे, फिर भी चलते रहे पंखे
बिजली निगम कार्यालय खाली होने के बावजूद भी बल्ब जलते रहे। कार्यालय में पंखे तथा कूलर मेज पर पड़ी फाइलों को हवा देते रहे। सरेआम बिजली फूंकी गई। कार्यालयों में बैठे पूरी स्थिति पर नियंत्रण कर रहे अधिकारी खामोश रहे।
निर्बाध रूप से मिली बिजली
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से लोगों को फायदा हुआ। बिजली निर्बाध रूप से मिली। हालांकि कट आए, लेकिन बहुत ही कम समय के लिए। आमतौर पर सुबह से शाम तक ही तीन से पांच घंटे बिजली बंद रहती है। लेकिन बुधवार को ऐसा नहीं हुआ।
आज सीएम का पुतला फूंकेंगे कर्मचारी
ऐलनाबाद रोड पर धरना देकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे बिजली कर्मचारी तथा अन्य यूनियन के सदस्य हड़ताल के दूसरे दिन आंदोलन को तेज करते हुए सीएम मनोहर लाल खट्टर का पुतला जलाएंगे।
गांव सकताखेड़ा में एक लाइन पर टहनी गिर गई थी। जैसे ही शिकायत आई, तुरंत समाधान कर दिया गया। सरकार को प्रत्येक घंटे रिपोर्ट भेजी गई कि बिजली सुचारू चल रही है। हड़ताली कर्मचारियों की एबसेंट लगाकर रिपोर्ट सरकार को भेजी गई है।
-डीआर वर्मा, कार्यकारी अभियंता, बिजली निगम, मंडल डबवाली