सिरसा। न्यायालय के आदेश का अनुपालन न करने वाला एचडीएफसी बैंक मैनेजर गैर जमानती वारंट जारी होते ही वीरवार को उपभोक्ता न्यायालय में पेश हो गया। इसके बाद उसने तुरंत प्रभाव से पीड़ित उपभोक्ता को न्यायालय के आदेश अनुसार 10 हजार रुपये मुआवजा व अवैध वसूल किए गए 20 हजार 469 रुपये दे दिए।
बैंक मैनेजन ने छह प्रतिशत ब्याज सहित पीड़ित गुलाब जैन के एचडीएफसी बैंक अकाउंट में 32 हजार 107 रुपये जमा करा दिए। गौरतलब है कि उपभोक्ता न्यायालय इससे पहले एचडीएफसी बैंक मैनेजर अनिल कुमार को नोटिस व जमानती वारंट जारी किया था, लेकिन वह न्यायालय में पेश नहीं हुआ था। मामले के अनुसार, शहर के नोहरिया बाजार निवासी गुलाब जैन ने फरवरी 2022 में सांगवान चौक स्थित एचडीएफसी बैंक से नौ लाख रुपये का लोन लिया था।
वर्ष 2023 में गुलाब जैन ने सारी राशि बैंक में जमा करा दी, लेकिन बैंक ने उससे ब्याज के रूप में 20 हजार 469 रुपये अतिरिक्त जमा करवा लिए। इसके बाद गुलाब जैन ने 28 अगस्त 2023 में एचडीएफसी बैंक के खिलाफ उपभोक्ता न्यायालय में शिकायत दायर कर न्याय की गुहार लगाई।
9 फरवरी 2024 को उपभोक्ता न्यायालय ने शिकायत को स्वीकार करते हुए फैसला सुनाया कि शिकायतकर्ता बैंक की ओर से अवैध रूप से वसूल की गई 20 हजार 469 रुपये वापसी का हकदार है। इसलिए बैंक को आदेश दिया जाता है कि वह 45 दिनों भीतर पीड़ित उपभोक्ता को 10 हजार रुपये मुआवजा व 20 हजार 469 रुपये लौटाए।
जमानती वारंट जारी होने पर भी पेश नहीं हुआ
न्यायालय के फैसले के बाद भी बैंक ने पीड़ित गुलाब जैन को उक्त राशि नहीं लौटाई। इसके बाद गुलाब जैन ने 15 अप्रैल 2024 को फिर से न्यायालय में शिकायत दर्ज कर दी। न्यायालय ने तुरंत प्रभाव से एचडीएफसी बैंक मैनेजर अनिल कुमार को नोटिस जारी कर दिया, लेकिन वह न्यायालय में पेश नहीं हुआ। इसके बाद न्यायालय ने जमानती वारंट जारी दिए, लेकिन बैंक मैनेजर पेश नहीं हुआ।
ब्याज सहित किया राशि का भुगतान
जनवरी 2025 न्यायालय ने बैंक मैनेजर अनिल कुमार के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिए। 15 मई को मैनेजर अनिल कुमार न्यायालय में पेश हो गया। उसने न्यायालय से कहा वह आदेश का अनुपालन करेगा। इसके बैंक मैनेजर अनिल कुमार ने छह प्रतिशत ब्याज सहित पीड़ित गुलाब जैन के एचडीएफसी बैंक अकाउंट में 32 हजार 107 रुपये जमा करा दिए।