सिरसा। जिले में नशे के कारोबार को रोकने व सप्लायर को पकड़ने के लिए पुलिस ने ऑपरेशन क्लीन अभियान चलाया हुआ। वहीं प्रशासन स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से नशा मुक्ति के लिए भी प्रयास कर रहा है। विभाग की इसी मुहिम की बदौलत इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। पुलिस ने नशा तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए काफी सख्त कार्रवाई की, वहीं स्वास्थ्य विभाग अभी तक 99 हजार से ज्यादा लोगों को नशा मुक्ति के लिए इलाज कर चुकाहै। जागरूकता अभियान का ही असर है कि 6 वर्षों के दौरान नशा छोड़ने के लिए आने वालों की संख्या 1400 से बढ़कर अब प्रतिवर्ष 28 हजार तक जा पहुंची है। यानी हर वर्ष नागरिक अस्पताल में 28 हजार से ज्यादा लोग अपना इलाज करवाने पहुंचते हैं।
नशे की गिरफ्त में आने वाले मरीजों को इलाज की सुविधा देने के लिए सरकार की ओर से नागरिक अस्पताल में चलाया गया नशा मुक्ति केंद्र अब मरीजों का सहारा बना हुआ है। केंद्र में मरीजों को दाखिल कर उन्हें पूरा इलाज उपलब्ध करवाया जा रहा है। अब नशा मुक्ति केंद्र की ओपीडी में मरीजों की संख्या भी छह वर्षों में 20 गुना तक अधिक बढ़ी है। जबकि इलाज लेेने के लिए आठ गुना अधिक मरीज दाखिल हो रहे है। वर्ष 2014 में नागरिक अस्पताल में सरकार की ओर से नशा मुक्ति केंद्र खोला गया। पहले वर्ष नागरिक अस्पताल में 1405 मरीजों की एक वर्ष में ओपीडी हुई थी जबकि 99 मरीजों को दाखिल कर उनको इलाज दिया गया। वर्ष 2019 में ओपीडी बढ़कर 28 हजार से 32 हजार तक पहुंच गई। जबकि इस दौरान 863 मरीजों को दाखिल कर उनका इलाज दिया गया। लेकिन कोरोना काल के बाद पाबंदियों के चलते अब ओपीडी में मरीजों के आने की संख्या पहले से कुछ कम हुई है। कोरोना काल के कारण वर्ष 2021 में ओपीडी कम होकर 19135 तक पहुंच गई। जबकि 391 मरीजों को दाखिल कर उनका इलाज किया गया। हालांकि नशे की गिरफ्त मरीजों की संख्या इससे बेहद अधिक है। स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ पुलिस की ओर से अभियान चलाकर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को नशे न करने के प्रति जागरूक किया जा रहा है। जिसके बाद नशा पीड़ित मरीज इलाज करवाने के लिए केंद्र में पहुंच रहे हैं।
नशा मुक्ति केंद्र के वार्ड में दस बेड, सभी रहते है फुल
नशा पीड़ित मरीजों को दाखिल कर उनका इलाज करने के लिए केंद्र में ही 10 बेड लगाए गए हैं। जिले में तेजी से फैल रहा नशा युवाओं के लिए घातक साबित हो रहा है। जागरूक करने के बाद अब नशा छोड़ने वालों की संख्या भी बढ़ गई है। लेकिन नशा मुक्ति केंद्र में केवल 10 बेड हैं और सभी फुल रहते हैं। इसके अलावा 25 से 30 मरीज दाखिल होने के लिए वेटिंग में रहते हैं। हालांकि अब कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण मरीजों को कम ही दाखिल किया जा रहा है। विशेषज्ञ की ओर से अधिक मरीजों की जांच कर उन्हें परामर्श और दवाई देकर लौटा दिया जाता है और कुछ दिनों बाद फिर से जांच करवाने के लिए उन्हें बुलाया जाता है।
इस तरह हर वर्ष बढ़ी मरीजों की ओपीडी, आईपीडी
वर्ष, ओपीडी, आईपीडी(इंडोर पेशेंट डिपार्टमेंट)
2014, 1405, 99
2015, 1919, 117
2016, 2438, 116
2017, 5872, 327
2018, 18551, 649
2019, 28283, 863
2020, 21714, 263
2021, 19135, 391
उपलब्धि : 70 फीसदी मरीज स्वस्थ होकर लौटे
नशे की गिरफ्त में आए मरीज नशा छोड़ने के इच्छुक होने के बाद केंद्र में उन्हें दाखिल किया जाता है। दाखिल होने वाले मरीजों में से 70 फीसदी मरीज स्वास्थ्य होकर वापस लौट रहे हैं। इनमें से करीब 30 फीसदी मरीजों के परिजनों की ओर से देखरेख न किए जाने के कारण वह दोबारा से नशे की चपेट में भी आते हैं। जिसके कारण उन मरीजों का दोबारा से इलाज शुरू किया जाता है।
जिलेभर के मरीज नशा मुक्ति केंद्र में इलाज लेने के लिए पहुंच रहे है। मरीज अधिक प्रभावित है तो उसे दाखिल कर इलाज किया जाता है। कोरोना काल से पहले 28 हजार से 32 हजार के करीब मरीजों की वर्ष में ओपीडी होती थी। मरीजों को इलाज देने के लिए 10 बेड की सुविधा उपलब्ध है। हर रोज 150 के करीब जांच करवाने के लिए पहुंचते हैं इनमें से 80 से 90 फीसदी मरीज नशे से पीड़ित है।
-डॉ. पंकज शर्मा, मनोरोग विशेषज्ञ, नशा मुक्ति केंद्र सिरसा।