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कार्यकारी परिषद की बैठक में कार्रवाई : कानूनी नोटिस के बावजूद मंथन के बाद दो प्रोफेसरों का लीयन बर्खास्त, अब कोठी भी खाली करवाएंगे

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सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद यानी ईसी मंगलवार को एक्शन में नजर आई। कुलपति सहित 17 सदस्यों को एक प्रोफेसर की ओर से एडवांस लीगल नोटिस मिलने के बावजूद कार्यकारी परिषद के सदस्यों ने दो प्राध्यापकों के लीयन बर्खास्तगी पर अपनी सहमति देते हुए मोहर लगा दी। अब प्राध्यापक की ओर से कब्जा की गई कोठी को भी खाली करवाया जाएगा और विभाग में प्रोफेसर के नाम पर बंद पड़े कमरों को भी खाली करवाना होगा। कोठी खाली नहीं की तो सील कर दी जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी परिस्थिति से बचने के लिए नियम बनाया है कि 3 साल से ज्यादा लीयन अवधि आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।
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सीडीएलयू में मंगलवार को कार्यकारी परिषद की बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता चेयरमैन कुलपति प्रो. अजमेर सिंह मलिक ने की। बैठक में दो प्राध्यापकों के लीयन को बर्खास्त करने संबंधित फैसले पर मोहर लगा दी। विधि विभाग के प्रो. राजेश मलिक और केमिस्ट्री विभाग के डॉ. हरीश के लीयन को बर्खास्त कर दिया गया था। प्रो. राजेश मलिक ने कुलपति सहित कार्यकारी परिषद के 17 सदस्यों को एडवांस लीगल नोटिस भेजकर इस फैसले पर आपत्ति जताई थी। लेकिन इसके बावजूद लीयन बर्खास्त के फैसले पर मोहर लगा दी। अब वीसी ने आदेश दिए हैं कि प्राध्यापक को विभाग में अलॉट कमरों को भी खाली करवाया जाए और कोठी को भी। यदि प्राध्यापक कोठी खाली नहीं करेंगे तो सील कर दिया जाएगा। इसके अलावा एक अन्य फैसला लिया गया ताकि ऐसी स्थिति दोबारा पैदा ना हो। इसके लिए नया नियम बना दिया है कि लीयन पर जाने वाले किसी भी प्राध्यापक को 3 वर्ष से ज्यादा का समय ना दिया जाए। बता दें कि सीडीएलयू से चार प्राध्यापक लीयन पर गए हैं। इनमें से एक प्राध्यापक वापस आ चुके हैं जबकि दो प्राध्यापकों का लीयन बर्खास्त किया जा चुका है। जबकि एक प्राध्यापक अभी भी ऐसे हैं जो लीयन पर चल रहे हैं। बता दें कि एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में नौकरी करने के दौरान अवकाश और मंजूरी को लीयन कहा जाता है। दोनों विश्वविद्यालयों की सहमति से लीयन अवधि निर्धारित की जाती है। लेकिन दोनों में से किसी भी एक विश्वविद्यालय में नौकरी कंफर्म होने के बाद दूसरे विश्वविद्यालय से प्राध्यापक की संबद्धता समाप्त हो जाती है।
अधिकारियों की पदोन्नति को मंजूरी, 4 नए असिस्टेंट बने
कार्यकारी परिषद की बैठक के दौरान 12 गैर शिक्षक कर्मचारियों को भी लाभ दिया गया। चार अधीक्षकों को पदोन्नति देकर असिस्टेंट रजिस्ट्रार बना दिया गया। अधीक्षक से असिस्टेंट बनने वालों में प्रेम किरण, प्रेम भल्ला, बजरंग लाल और ओमदा शामिल हैं। इसके अलावा दो सहायकों को अधीक्षक बना दिया गया। इतना ही नहीं हंसराम कोच, विजय रंगा, सुंदर लाल, रश्मि और वीरेंद्र कुमार को एसीपी का लाभ भी दिया गया है।
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रिसर्च को दिया जाएगा बढ़ावा, 5 संस्थानों से सीडीएलयू ने किया ओएमयू
विश्वविद्यालय में रिसर्च कार्यों को बढ़ावा देने के लिए सीडीएलयू ने पांच संस्थानों से एमओयू साइन किए हैं। इन संस्थानों के साथ मिलकर अब सीडीएलयू के विद्यार्थी और प्राध्यापक रिसर्च करेंगे। सीडीएलयू के बायो विभाग ने सीआईसीआर के साथ अनुबंध किया है। लाइफ साइंस ने केंद्र सरकार के लाइफ साइंस विभाग के साथ अनुबंध किया। इसके अलावा सीडीएलयू ने वाईएमसीए फरीदाबाद के साथ-साथ दो अन्य संस्थानों के साथ भी अनुबंध किया है। एक एजेंसी अब विश्वविद्यालय की वेबसाइट चलाने का काम करेगी। इसके अलावा एक अन्य फैसला लेते हुए सीडीएलयू ने निर्णय लिया है कि अब कैलेंडर जुलाई से शुरू होगा और जून पर खत्म। जबकि इससे पहले जनवरी से दिसंबर तक कैलेंडर था।
कॉलेजों में दी नये कोर्स को मंजूरी
सीडीएलयू ने कॉलेजों को मांग और जरूरत अनुसार नये कोर्स चलाने के लिए भी मंजूरी दी है। भोडिया खेड़ा के कॉलेज में अब एमए राजनीतिक विज्ञान, ऐलनाबाद के छोटे राम कॉलेज और कालांवाली के शहीद भगत सिंह कॉलेज में बीए बीएड कोर्स संचालित किया जा सकेगा। इसके साथ-साथ शहर के राजकीय नेशनल कॉलेज में बीएससी नॉन मेडिकल का कोर्स चलाने के लिए भी मंजूरी दी है। 80 सीटों पर दाखिला किया जा सकता है।
मंगलवार को कार्यकारी परिषद की बैठक आयोजित की गई है। इस दौरान कई अहम फैसले लिए गए हैं। इनमें रिसर्च को बढ़ावा देने, कर्मचारियों को पदोन्नति देने और दो प्राध्यापकों का लीयन बर्खास्त करने संबंधी फैसले शामिल हैं। मंथन के बाद सदस्यों की सहमति से इन फैसलों पर मोहर लगी है।
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-प्रो. अजमेर सिंह मलिक, कुलपति, सीडीएलयू, सिरसा।
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