किसानों ने 15 टोलियों ने दुकानदारों के आगे हाथ जोड़े और दुकानें करवाई बंद
सिरसा । 2018 के फसल बीमा मुआवजे की मांग व स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट की सिफारिशों लागू करवाने की मांग को लेकर वीरवार को किसानों ने सिरसा बंद का आह्वान किया था। किसान सुबह आठ बजे लघु सचिवालय से धरने से बाजार की ओर चल दिए। सुभाष चौक में किसान इकट्ठा हुए । किसानों की करीब 15 टोलियां बनाई गई जो कि अलग अलग बाजारों की ओर निकल गई। किसानों की टोलियां अलग अलग बाजारों में जाकर दुकानदारों से दुकानें बंद करने का आग्रह करते नजर आए। दुकानदारों ने भी किसानों को सहयोग किया और करीब एक बजे तक बाजार बंद भी रहे।
मुआवजे की मांग को लेकर वीरवार सुबह की किसानों की टोलियां बाजारों में घूमती नजर आई। किसान अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए बस स्टेंड से बाबा अंबेडकर चौक से होकर भगत सिंह चौक पर पहुंचे। यहां पर कुछ दुकानें खुली थी तो कुछ बंद थी। दुकानों को खुली देख किसानों ने सरकार व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करनी शुरु कर दी। जिसके कारण थोड़ी जाम की स्थिति बन गई। बाद में पुलिस जवान ने मौके पर पहुंच कर किसानों को समझाया। किसी भी अप्रिय घटना को लेकर पुलिस के वाहन और जवान सुभाष चौक पर गश्त करते नजर आए। रोडी बाजार के अलावा पालिका बाजार, सदर बाजार, हिसारिया बाजार, बेगू रोड, शिव चौक, बरनाला रोड, गीता भवन रोड, सूरतगढिया बाजार में बंद का असर दिखा। हालांकि किसानों के जाने के बाद दुकानदारों ने अपनी दुकानें खोल ली।
हाथ जोड़ कर करवाई दुकानें बंद-
पालिका बाजार, गीता भवन रोड नोहरिया बाजार व सरकूलर रोड पर किसानों ने दुकानदारों से दुकानें हाथ जोड़कर बंद करवाई। इसके बाद किसानों की एक टोली ने दुकानें बंद करने वाले दुकानदारों से सरकार के किसान विरोधी नीतियों के बारे में बताया। किसानों ने कहा कि मौजूदा सरकार किसानों को सस्ता व उत्तम बीज मुहैया नहीं करवा रही। इसके बाद किसानों ने सरकार के विरोध में नारे लगाए। अनाज मंडी, पालिका बाजार, ऑटो मार्केट, रेलवे रोड, एमसी मार्केट के दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठानों को बंद रखा। बता दें कि किसान मुआवजे और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने के लिए पिछले 32 दिनों से लघु सचिवालय में धरने पर बैठे हैं। अपनी मांग को उपायुक्त के माध्यम से सरकार तक पहुंचाने के लिए कई बार किसानों ने उपायुक्त के मार्फत मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौंपा, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। राज्य मंत्री कृष्ण बेदी भी किसानों के धरने पर आकर धरना समाप्त करवाने के प्रयास किए। लेकिन किसानों ने कहा कि सीएम उनकी मांगे स्वीकार कर लें, आपको धरना खत्म करवाने के लिए भी आना नहीं पड़ेगा।
किसानों की मुख्य मांगों पर एक नजर
2018 में 230 गांवों में खराब फसलों का करीब 300 करोड़ क्लेम बनता है। इतनी ही राशि का मुआवजा बनता है। सरकार उसे जल्द जारी करें। फसल उत्पादन का मूल्य पचास प्रतिशत ज्यादा किसानों को मिले, किसानों का क्रेडिट कार्ड सरकार जारी करे। किसानों के लिए जोखिम फंड बनाया जाए। किसानों को अच्छी क्वालिटी के बीज सस्ते दामों पर मुहैया करवाए जाए। फसल बीमा सुविधा किसानों को मिलें, किसानों को खेती के लिए कर्ज मिलना चाहिए। प्राकृतिक आपदाओं के आने पर किसानों की सरकार मदद करे।
वर्जन
25 फरवरी तक बजट में हरियाणा सरकार किसानों के लिए क्या करती है, अब उसकी प्रतीक्षा की जाएगी। आगामी रणनीति जल्द ही बनाई जाएगी।
-विकल पचार, किसान नेता, सिरसा।