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नियमों को दरकिनार कर सड़कों पर दौड़ाई जा रही हैं 2005 में आई एएलएस गाडिय़ां

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नियमों को दरकिनार कर सड़कों पर दौड़ाई जा रही एएलएस गाड़ियां
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सिरसा। सरकार की ओर से जिला नागरिक अस्पताल सिरसा में सबसे पहले 2005 में इमरजेंसी सेवाओं के लिए उपलब्ध करवाई गई दो गाड़ियां नियमों को दरकिनार कर सड़कों पर दौड़ाई जा रही हैं। लगातार 13 साल सड़कों पर दौड़ने के बाद गाड़ियां काफी खस्ताहाल में हैं और इनमें लगे उपकरण खराब हो चुके हैं। विभाग की ओर से मात्र पासिंग के आधार पर इन गाड़ियों को सरपट रोड पर दौड़ाया जा रहा है। विभाग की ये लापरवाही गाड़ी में आने जाने वाले मरीजों के साथ गाड़ी के चालक पर भी भारी पड़ सकती है। हालांकि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे नई गाड़ियों के लिए कई बार विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत करवा चुके हैं। अभी तक विभाग की ओर से नई गाड़ियों को लेकर अभी कोई रिस्पांस नहीं आया है।
उपकरण हो चुके हैं खराब:
एएलएस (एडवांस लाइफ सपोर्ट) गाड़ियों का प्रयोग केवल इमरजेंसी सेवाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है। वर्ष 2005 में कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद प्रदेशभर के अस्पताल में सरकार की ओर से गाड़ियां दी गई थी। 2005 के बाद से लेकर अब तक वही गाड़ियां सड़कों पर दौड़ रही है। इन गाड़ियों में इमरजेंसी के तहत इस्तेमाल करने वाले उपकरण, जैसे वेंटिलेटर, ऑक्सीजन, फायर सिस्टम लगाए गए थे। 13 साल बीतने, देखभाल के अभाव व नई गाड़ियां न आने के कारण उपकरण भी नकारा हो चुके हैं।
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सरकारी नियमों के मुताबिक दो से ढाई लाख किमी के बाद नहीं चल सकती गाड़ी
सरकारी नियमों के मुताबिक एएलएस गाड़ी दो से ढाई लाख किलोमीटर चलने के बाद रोड पर इमरजेंसी सेवाओं के लिए नहीं दौड़ाई जा सकती। एएलएस गाड़ी रोड पर तभी दौड़ाई जा सकती है, जब पासिंग में वह रोड पर चलने लायक हो। दूसरी ओर सिरसा में 2005 में आई दोनों एएलएस गाड़ियां 4 से 5 लाख किलोमीटर चल चुकी हैं। दोनों गाड़ियां कई बार दुर्घटनाग्रस्त हो चुकी हैं। इसके बावजूद अभी तक दोनों गाड़ियों को रोड पर सरपट दौड़ाया जा रहा है।
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कोट्स:
-सिरसा पहला जिला था, जिसमें सबसे पहले एएलएस गाड़ियां आई थी। 2005 में एएलएस गाडिय़ां शुरू की गई थी। नई गाड़ियों के लिए कई बार डिमांड भेजी गई है। लेकिन अभी तक गाड़ियां उपलब्ध नहीं हो पाई है। नई न आने के कारण उन्हीं गाड़ियों से काम चलाया जा रहा है। हर साल गाड़ियों की पासिंग करवाई जाती है। इसके बाद ही गाड़ियों को ऑन रोड रखा जा रहा है।
-डॉ. वीरेश भूषण, डिप्टी सिविल सर्जन, नागरिक अस्पताल सिरसा।
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