आज लोगों की मेहनत की कमाई बाजारवाद की भेंट चढ़ती जा रही है। उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले विज्ञापनों, घटिया वस्तुएं एवं सेवाएं सहित अन्य बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए उपभोक्ता में उत्पादकता और गुणवत्ता संबंधित जागरूकता को बढ़ाने व उपभोक्ता कानूनों के बारे में लोगों को जानकारी देने के उद्देश्य से हर वर्ष 24 दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है।सिरसा जिला उपभोक्ता न्यायालय में उपभोक्ताओं से जुड़े 1400 विचाराधीन हैं। वर्ष 2023 में 22 दिसंबर तक 135 उपभोक्ताओं ने अपनी शिकायत उपभोक्ता न्यायालय में दर्ज करवाई। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष पदम सिंह ठाकुर ने जनवरी 2023 से लेकर 22 दिसंबर 2023 तक 600 शिकायतों का निपटारा किया है। अध्यक्ष पदम सिंह ठाकुर ने बताया कि उपभोक्ता न्यायालय में पीड़ित स्वयं ही अपनी शिकायत लिखित में कर सकता है। उसे वकील करने की कोई जरूरत नहीं होती। उपभोक्ता न्यायालय में सुनवाई तेजी से होती है।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के हितों को लेकर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 कानून को लाया था। इसके तहत उपभोक्ता को सुरक्षा का अधिकार,सूचना का अधिकार, चुनने का अधिकार,सुनने का अधिकार, निवारण का अधिकार और शिक्षा के अधिकार के रूप में 6 बुनियादी अधिकारों की गारंटी दी गई है। इसके तहत उपभोक्ता के साथ शोषण एवं धोखा होने पर वह उपभोक्ता न्यायालय का द्वार खटखटाकर न्याय पा सकता है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता फोरम में कोई भी उपभोक्ता 2 साल तक केस दर्ज करवा सकता है।
अब एक से पांच लाख के केस में उपभोक्ता को फीस जमा करने की जरूरत नहीं है। 10 से 20 लाख तक भी फीस मात्र 200 रुपये और उससे ऊपर 400 रुपये तक फीस जमा करानी होती है। पहले उपभोक्ता फोरम को जुर्माने की 20 लाख तक की पावर थी। अब एक करोड़ का जुर्माना करने की पावर है। एक से 10 करोड़ स्टेट कमीशन और 10 करोड़ से अधिक की नेशनल कमीशन को पावर दी गई है। उससे अधिक के लिए सुप्रीम कोर्ट में केस दायर करना होता है। एक करोड़ तक के मामले जैसे प्लाट व अन्य के लिए जिले में केस दायर किया जा सकता है। फैसले के खिलाफ जाने से पहले 50 फीसदी जुर्माना भरना होगा। उपभोक्ता को परेशान करने वालों को एक से तीन साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
संजू बाला,महिला अधिवक्ता सिरसा।
उपभोक्ता कहीं से भी शिकायत दर्ज कर सकता है
उपभोक्ता विवाद निवारण अधिनियम साल 1986 में बना था। इसका केवल एक ही उद्देश्य ग्राहक के अधिकारों की रक्षा करना है, ताकि कोई भी दुकानदार, मैन्युफैक्चरर, डीलर एवं सर्विस प्रोवाइडर उसके साथ धोखाधड़ी ना कर सके। नए कानून में यह प्रावधान है कि अब कहीं से भी उपभोक्ता शिकायत दर्ज कर सकता है। पहले उपभोक्ता वहीं शिकायत दर्ज कर सकता था, जहां से उसने सेवा ली है।
- एडवोकेट लक्की दुग्गल, उपाध्यक्ष जिला बार एसोसिएशन सिरसा।
पीड़ित किसान को मिला 9 लाख रुपये बीमा क्लेम
अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने के कारण दुर्घटना में अपनी एक टांग गंवाने वाला एक किसान उपभोक्ता न्यायालय से इंसाफ पा सका। उपभोक्ता न्यायालय ने बीमा कंपनी को 6 प्रतिशत ब्याज सहित 9 लाख रुपये क्लेम राशि देने के आदेश दिया। इसके साथ ही बीमा कंपनी को 25 हजार रुपये मुआवजा और पीड़ित किसान की कानूनी लड़ाई में खर्च हुई राशि के तौर पर 10 हजार रुपये देने के आदेश दिए। गांव धिंगतानिया निवासी बलबीर ने सिरसा इंडसइंड बैंक से 30 फरवरी 2016 को किसान क्रेडिट कार्ड बनाया था। कार्ड बनाने के साथ ही रेलिगेयर हेल्थ कंपनी की तरफ से पॉलिसी दी जा रही थी। किसान बलबीर ने 9 लाख का हेल्थ बीमा करवाया। इस बीमे में सारे रिस्क कवर थे। 25 फरवरी 2018 को बलबीर का एक्सीडेंट हो गया। इसमें उसकी टांग टूट गई। इसके बाद बलबीर ने बीमा कंपनी से क्लेम राशि मांगी,लेकिन बीमा कंपनी क्लेम राशि देने में आनाकानी करने लगी। इसके बाद किसान बलबीर ने 29 अक्टूबर 2018 को जिला उपभोक्ता फोरम का द्वार खटखटाते हुए इंसाफ की गुहार लगाई थी।