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झींगा पालन से 5 माह में 50 लाख का मुनाफा

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झींगा पालन तालाब में ऑक्सीजल लेवल को बढ़ाने के लिए लगे एवीयेटर - फोटो : Sirsa
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सिरसा। गांव मिठड़ी के अंग्रेजी में स्नातकोत्तर दो भाइयों ने झींगा मछली का पालन कर मात्र 5 माह में ही 90 लाख रुपये कमाए। इसमें से खर्च निकालकर उनको 50 लाख रुपये का मुनाफा हुआ। एक भाई ने 13 साल अध्यापक बन बच्चों को ए, बी, सी, डी भी सिखाई। लेकिन जब संतुष्टि नहीं मिली तो नौकरी छोड़ अपने छोटे भाई के साथ मिल झींगा मछली का पालन शुरू किया और बन गए औरों के लिए मिसाल। दोनों फिलहाल 25 एकड़ भूमि में झींगा पालन कर अच्छा कमा रहे हैं।
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गुरप्रीत सिंह ने बताया कि उसने अंग्रेजी भाषा में एमए की हुई है और पिछले 13 साल से दशमेश सिंह सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बतौर अध्यापक बच्चों को पढ़ाया है। वहीं छोटे भाई मनप्रीत सिंह ने भी अंग्रेजी भाषा में एमए की है। गुरप्रीत सिंह ने बताया कि स्कूल में पढ़ाने से उनकी आमदनी इतनी नहीं होती थी जिससे घर का गुजारा चल सके। इसलिए दोनों भाइयों ने समाचार पत्रों व सोशल मीडिया के माध्यम से झींगा मछली के पालन के बारे में पता चला। जिससे उन्होंने खुद का काम करने की ठानी और झींगा मछली का पालन शुरू कर दिया। दोनों भाईयों ने तीन साल पहले ढाई एकड़ जमीन को ठेके पर लेकर काम शुरू किया था और अब 8 एकड़ जमीन चोरमार और 17 एकड़ जमीन मिठड़ी में ठेके पर लेकर कुल 25 एकड़ जमीन पर काम कर रहे हैं। 25 एकड़ जमीन 13 तालाब मिठड़ी में बनाए गए है वहीं 6 तालाब चोरमार में बनाए हैं। जिसमें 24 एरीयेटर चोरमार व 52 एरीयेटर मिठड़ी में बनाए हैं।
13 वर्षों तक दशमेश सिंह सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाया जिसमें वेतन इतनी नहीं था कि जिससे घर का गुजारा हो सके। इसलिए खुद का व्यवसाय करने का सोचकर झींगा मछली का पालन करना शुरू किया। इस काम में जिले के मत्स्य विभाग ने भी भरपूर सहयोग किया।
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गुरप्रीत सिंह।
एमए अंग्रेजी करने के बाद कुछ समय एक निजी स्कूल में बच्चों को पढ़ाया। लेकिन कुछ समय में ही गांव वापस आ गया। पहले से ही खुद का व्यवसाय करने का मन में था। इसी दौरान समाचार पत्रों व सोशल मीडिया पर झींगा पालन के बारे में सुना था झींगा पालन संबंधित हर प्रकार की जानकारी प्राप्त कर काम करना शुरू कर दिया।
मनप्रीत सिंह।
430 से 475 रुपये किलो बिकती है झींगा
गुरप्रीत व मनप्रीत ने इस वर्ष में मार्च से लेकर अगस्त माह तक झींगा मछली का पालन किया। जिसमें उन्होंने 12 टन चोरमार और 14 टन मिठड़ी में कुल 26 टन झींगा मछली दोनों जगहों से निकाली। फिर इसे 430 से 475 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से कोलकाता व उड़ीसा की कंपनी को बेचा। जिससे उन्हें करीब 90 लाख रुपये की आमदनी हुई। जिसमें से 40 लाख का खर्चा निकालने के बाद उनको 50 लाख रुपये का मुनाफा हुआ।
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