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सरसों बेचनी है तो फर्द, गिरदावरी, बैंक खाते की कापी और आधारकार्ड नंबर जरूरी

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अमर उजाला ब्यूरो
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सिरसा।
सरकार ने किसानों को खुश करने के लिए सरसों की फसल का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 4000 रुपए कर दिया लेकिन सरसों की फसल को बेचने के लिए किसानों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी कारण सरसों की खरीद की रफ्तार धीमी चल रही है। किसानों को मजबूरन अपनी फसल औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ रही है। किसानों को सरकार के नियम ही समझ नहीं आ रहे हैं। अब तक इस बार सरकारी खरीद मात्र 406 क्विंटल की गई है और निजी एजेंसियों द्वारा 21,402 किंवटल की खरीद की जा चुकी है और किसानों को भाव 3150 से 4000 तक मिला है। अधिकारियों का कहना है कि किसानों को सरसों के सरकारी रेट पाने के लिए एक फर्द, गिरदावरी रिपोर्ट, बैंक खाते की कॉपी व एक आधारकार्ड नंबर अपने साथ ही लाना होगा। इसके साथ ही सरसों साफ-सुथरी व नमी की मात्रा आठ प्रतिशत से कम होनी चाहिए।
सरकार द्वारा सरसों की सरकारी खरीद 4000 रुपये प्रति क्विंटल की घोषणा से किसानों को उम्मीद हुई कि इस बार तो सरसों की फसल से मुनाफा हो जाएगा लेकिन जब किसान सरसों की फसल को मंडियों में लेकर जाने लगे तो पहले तो कई दिन तक सरसों की खरीद शुरू ही नहीं हो सकी। बाद में खरीद शुरू की तो कई प्रकार के नियम किसानों की परेशानी के सबब बन गए। मजबूरन किसानों ने अपनी सरसों कम रेट पर निजी एजेंसियों को बेच दी। किसानों का कहना है कि सरकार की घोषणा से कि एक किसान से 25 क्विंटल सरसों ही सरकारी रेट पर खरीदी जाएगी व राशि भी किस्तों के माध्यम से किसानों को मिलेगी इससे वे असहमत हैं। इनका कहना है कि यदि किसी जमींदार व किसान को पैसों की सख्त जरूरत है तो वह सरकार की किश्तों का इंतजार नहीं करेगा। सरकार नमी ज्यादा होने के नाम पर किसानों को बहकाना बंद करे।
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फसल बेचने के लिए कागजात तो पूरे करने होंगे
सरकार ने सरसों को समर्थन मूल्य 4000 रुपए प्रति किंवटल घोषित किया हुआ है। किसान को अपनी फसल का भाव सही मिले व कोई बिचौलिया गड़बड़ ना कर सके इसके लिए कई शर्तें हैं वो तो किसानों को पूरी करनी होगी। किसान को सरसों बेचने के लिए जमीन की फर्द, गिरदावरी की रिपोर्ट, पहचान पत्र, आधार कार्ड व बैंक के खाते की कॉपी साथ में लानी जरूरी है। इसके अलावा सरसों साफ सुथरी व नमी की मात्रा 8 प्रतिशत से कम होनी चाहिए। तभी पूरा भाव मिल सकेगा।
- जिला विपणन अधिकारी डी पी भांभू

किसानों का पेट काटने में लगी है सरकार
सरकार ने सरसों की फसल का समर्थन मूल्य 4000 रुपए करके वाहवाही तो लूट ली लेकिन किसानों को इसका सीधा फायदा मिले एसी कोई व्यवस्था नहीं की। किसान अपना ही नहीं सारे देश का भी पेट भरता है। जब तक सरकार किसानों की दशा सुधारने की ओर काम नहीं करेगी तब तक किसान आए दिन मरता ही रहेगा। जहां किसान अपना पेट खाली रखकर देश की जनता का पेट भरता है वहीं दूसरी ओर सरकार भी किसानों का पेट काटने में लगी है।
-किसान वीरेंद्र गांव ढुढियावाली

फसल खरीदना ही नहीं चाहती सरकार
बेशक सरसों की सरकारी बोली पर खरीद शुरू हो चुकी है लेकिन किसानों को सरसों में नमी ज्यादा बताई जा रही है। इससे सीधा पता चलता है कि सरकार उनकी फसल को या तो खरीदना ही नहीं चाहती या फिर कम रेटों पर खरीदना चाहती है। किसान को प्रति क्विंटल कम से कम 500 रुपये का घाटा हो रहा है और सरकार एक किसान से 25 क्विंटल सरसों की ही खरीद कर रही है, ऐसे में जिसके बाद फसल ज्यादा है वह क्या करे। वह किसान अपनी बाकी की फसल को प्राइवेट एजेंसी को कम रेटों पर बेचने को मजबूर है। इसके साथ ही सरकार ने नमी प्रतिशतता को 8 प्रतिशत रखा है और जिस भी किसान की सरसों की फसल की नमी 8 प्रतिशत से ज्यादा है उसकी सरसों तब तक नही खरीदी जाएगी जब तक कि नमी आठ प्रतिशत न हो जाए।
-किसान कृष्ण कुमार

मजबूरी में प्राइवेट एजेंसी को ही बेचनी पडे़गी
मैं चार ट्रॉली सरसों बेचने के लिए आया हुआ हूं यहां पर सरसों की खरीद के लिए उसे कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अब सरसों को वापस तो गांव में ले जा नहीं सकता। यहां सरसों बिखरी पड़ी है और खेतों में गेहूं की फसल भी पकने के कगार पर है उसकी भी देखभाल करनी है। ऐसे में सरसों की फसल तो प्राइवेट एजेंसियों को बेचनी पड़ेगी जो भी भाव मिलेगा वही लेना पड़ेगा।
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-किसान धर्मपाल ढुढियावाली

परेशान कर रखा है
सरकार ने समर्थन मूल्य 4000 रुपए करके तो ठीक कर दिया लेकिन 25 क्विंटल की बेचने की शर्त ठीक नहीं है अब इस बार सरसों की पैदावार बंपर हुई तो 25 क्विंटल से ज्यादा सरसों को कहां बेचें। अब प्राइवेट एजेंसियों को बेचने पर प्रति क्विंटल में 500 से 700 रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस बार फसल अच्छी हुई तो भाव नहीं मिल रहा है। अपनी फसल को बेचने के लिए धक्के खाने पड़ रहे है।
-किसान जगदीश कुमार
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