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रैली को सफल बनाने में जुटे अधिकारी, आमजन हुआ परेशान

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अमर उजाला ब्यूरो
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सिरसा।
पुलिस कर्मचारियों और डॉक्टरों की ड्यूटी जींद रैली में लगाए जाने से व्यवस्था पटरी से उतरती दिखी। हालांकि पुलिस प्रशासन ने सब कुछ सामान्य होने का दावा किया है। जिला नागरिक अस्पताल में मरीज परेशान दिखे
तो थानों में फरियादी नहीं दिखाई दिए। एंबुलेंस कक्ष में औसतन रोजाना जहां 70 से 80 से कॉल आती थीं, वहीं वीरवार को 15 कॉल आईं। अस्पताल में ओपीडी भी पहले से कम रही। जहां पहले 350 से अधिक रोगी आते थे वहीं आज 250 के मरीज ही पहुंचे।
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जींद में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की रैली को लेकर सिरसा के दस डॉक्टरों की ड्यूटी जींद में लगाई थी साथ पांच एंबुलेंस भी भेजी गईं थीं। डॉक्टरों की कमी के चलते मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। ज्यादातर उन बीमार व्यक्तियों को परेशानी उठानी पड़ी जिनका इलाज पहले चिकित्सकों से चल रहा था। वो दवाइयों की पर्ची लिये इधर-उधर भटकते देखे गए। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने अन्य चिकित्सकों की ड्यूटियां लगा रखीं थीं। फिर भी कई कमरों में तो ट्रेनिंग पर आए लड़के लड़कियां ही काम चला रहे। जिले में कुल 11 एंबुलेंस ही मौजूद थीं।
चिकित्सा अधिकारी संदीप गुप्ता ने बताया कि अस्पताल से डॉ. जगदीप अग्रवाल सर्जन, डॉ. पवन कुमार ऑर्थोपेडिक, डॉ. सतेंद्र फिजीशियन, डॉ. गरीश शर्मा, डॉ. नीरज, डॉ. रितेश शर्मा की ड्यूटी रैली में लगने के बाद इनके स्थान पर दूसरे चिकित्सकों को अस्थाई तौर नियुक्त किया गया। उन्होंने बताया कि रैली में चिकित्सकों का पैनल जाने के बाद थोड़ी दिक्कत तो मरीजों को हुई फिर भी पूरी कोशिश की गई की कम से कम परेशानी हो। सरकार के निर्देश पर रैली में चिकित्सा स्टाफ का जाना जरूरी था। अब इन रिक्त स्थानों पर तीन दिन के लिए ड्यूटियां निर्धारित की गई हैं।

डॉक्टरों की उलट फेर में नहीं मिली दवाई
नागरिक अस्पताल में पहले इलाज करवा रहे शांति नगर बेगू रोड सिरसा निवासी 60 वर्षीय जोगिंद्र सिंह ने बताया उसे खांसी की तकलीफ रहती है। उसका इलाज पहले से एक डॉक्टर से चल रहा है। उसने बताया कि जब उसने पर्ची ली तो उस पर कमरा नंबर 32 लिखा था वहां गया तो वहां से उसे कमरा नंबर 44 में भेज दिया। कमरा नंबर 44 में गया तो वहां से कमरा नंबर तीन में में भेज दिया दिया। इस प्रकार वह दो दिन से भटक रहा है। उसने बताया कि उसे अपनी पर्ची पर दवाई की तारीख ही आगे बढ़वानी थी, लेकिन चिकित्सकों के उलट फेर के कारण आज फिर बिना दवाई के ही घर जाना पड़ेगा।

पता नहीं डॉक्टर कब आएगा
गांव अभोली निवासी धन्ना राम ने बताया कि उसके पेट में पानी भरा रहता है। उसे काफी तकलीफ हो रही है। वह वीरवार सुबह ही अपने परिजन के साथ के नागरिक अस्पताल आया तो उसे डॉक्टरों के लिए चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उसने बताया के उससे ज्यादा चला फिरा नहीं जाता। अब पता नहीं डॉक्टर कब ड्यूटी पर वापस आएंगे। वह पहले से अपना इलाज नागरिक अस्पताल में करवा रहे हैं।

थाना में दर्ज नहीं हुई कोई एफआईआर
उधर, थाना शहर में पुलिसकर्मियों की ही चहल पहल रही। कुछ लोग पहले से दर्ज केस की स्थिति के बारे में जानकारी लेने आए थे। पहले जहां औसतन चार केस प्रतिदिन दर्ज होते थे। वहीं, वीरवार को कोई नहीं आया। सिटी थाना के कार्यकारी प्रभारी देशराज ने बताया कि क्षेत्र में माहौल शांतिपूर्वक है और आज अभी तक तो कोई मामला दर्ज नहीं हुआ। थाने से कुछ स्टाफ की ड्यूटी रैली के लिए तो लगाई गई है। फिर भी कोई अप्रिय घटाना न हो उसके लिए बाकी स्टाफ पूरी तरह मुस्तैद है।

लोग रहे परेशान, नहीं चली पीसीआर
जींद में अमित शाह की रैली को लेकर पिछले करीब एक सप्ताह से अधिकारियों की खूब कसरत हुई। इस रैली को लेकर पूरे पुलिस प्रशासन और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जींद में डेरा डालने के चलते आमजन को काफी परेशानियों से जूझना पड़ा। बीडीपीओ कार्यालय में अधिकारी एवं कर्मचारी रोजमर्रा की तरह अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद नजर आए लेकिन पुलिस थाने में अव्यवस्था का आलम देखने को मिला।
स्थिति ये थी कि कर्मचारियों के रैली में ड्यूटी लगने के बाद नेशनल हाईवे पर पेट्रोलिंग करने वाली गाड़ी भी चालक और स्टाफ न होने के चलते थाने में खड़ी नजर आई। थाने में कुल 27 कर्मचारियों में से आठ कर्मचारियों की जींद में ड्यूटी लगा दी गई, जबकि कुछ अन्य कर्मचारी विभागीय कार्याें के लिए इधर-उधर गए हुए थे। थाने में दिनभर में तीन से चार शिकायतें आती हैं वीरवार को एक ही आई। वीआईपी ड्यूटी के चलते पुलिस ने पिछले कुछ दिनों से शिकायतों के निपटान पर ब्रेक लगा रखे हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से पुलिस कर्मचारियों की वीआईपी ड्यूटी लगने के कारण फरियादियों को परेशानी दरपेश आई। गौरतलब हो कि ओढां थाना में 21 गांव पड़ते हैं। जब इस बारे थाना प्रभारी जगदीश जोशी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के अभाव में कार्य तो प्रभावित हुआ है, लेकिन जींद की ड्यूटी भी अनिवार्य है।
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डबवाली से महिला अधिकारी बुलानी पड़ी
ओढां थाना में 21 गांवों पर महज एक महिला एएसआई की नियुक्ति है। बुधवार को एक मामले को लेकर पुलिस को उस समय काफी परेशानी हुई जब थाने में एक महिला से संबंधित शिकायत आई। शिकायत में एक महिला ने उसकी बच्ची के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया। थाना की महिला एएसआई के वीआईपी ड्यूटी जाने के बाद पुलिस को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। काफी देर तक चली जद्दोजहद के बाद डबवाली से महिला एसआई को बुलाकर मामला दर्ज करवाना पड़ा।
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