सिरसा। जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग द्वारा जल जीवन मिशन के तहत गांवों में बैक्टीरिया जांच का कार्य किया जा रहा है। अब तक विभाग की ओर से गांवों में पेयजल में 3 हजार बैक्टीरिया की जांच की जा चुकी है। वहीं अब 5 हजार बैक्टीरिया की जांच करनी बाकी है।
जल एवं स्वच्छता सहायक संगठन द्वारा जिला में 338 गांवों में पानी के सैंपल भरकर बैक्टीरिया की जांच की जाएगी। जिले से कुल 8 हजार बैक्टीरिया टेस्ट के सैंपल भरकर जांच करने का लक्ष्य विभाग द्वारा रखा गया है। अभी तक पहले चरण में 3 हजार बैक्टीरिया जांच करने का लक्ष्य पूरा कर लिया गया है। वहीं विभाग के पास नागपुर से पानी का सैंपल लेने के लिए 5 हजार किट ओर पहुंच चुकी हैं। जिससे विभाग द्वारा दोबारा से ग्रामीण क्षेत्र में सैंपल लिए जाने हैं। मुख्य तौर पर इस कार्य में प्रत्येक गांव से 5 महिलाएं इस कार्य को कर रही है। प्रत्येक गांव से 15 पानी के सैंपल लिए जाने हैं। पानी के सैंपल घरों के साथ-साथ गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र, विद्यालय, सरकारी कार्यालय से लिए जा रहे हैं। इस कार्य में जिले के 7 खंडों से 7 ब्लॉक रिसोर्स कॉ-ऑर्डिनेटर को नियुक्त किया गया है। जो अपने स्तर पर महिलाओं को सैंपल लेने के लिए तैयार कर रहे हैं। बैक्टीरिया जांच किट के माध्यम से ये पता लगाया जा रहा है कि गांवों के घरों में कैसा पानी सप्लाई हो रहा है।
तीन महीने में लिए 3 हजार सैंपल
विभाग द्वारा अगस्त माह में बैक्टीरिया जांच के लिए सैंपल लेने काम शुरू किया गया था। जिससे अक्तूबर माह के अंत तक पूरा किया गया। सैंपल लेने का कार्य गांव की महिलाओं द्वारा किया गया। जिनको विभाग के बीआरसी द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। वहीं 5 हजार सैंपल लिए जाने का कार्य 6 महीने में पूर्ण किया जाना है।
95 फीसदी सैंपल पास
ग्रामीण इलाकों में बैक्टीरिया जांच के लिए जा रहे सैंपल में से पांच फीसदी सैंपल फैल आए। जिसको रिसैंपलिंग के लिए लैब में भेजा गया। यह जानने के लिए कि किस कारण से सैंपल फैल हुए हैं। विभाग के अनुसार फैल हुए सैंपलों की रिसैंपलिंग करवाने के बाद पानी के सोर्स को सही करवा दिया है।
किट को प्रयोग करने से पहले सावधानी बरतनी जरूरी
पानी के सैंपल भरने से पहले यह ध्यान देना जरूरी है कि पानी की सप्लाई चलती हो। टेस्ट करने से पहले हाथ अच्छे से धूले होने जरूरी है। तापमान सामान्य 30 से 35 के बीच को होना चाहिए, सैंपल लेते वक्त दूसरी टोंटी पर हाथ न लगाए क्योंकि इससे दूसरी टोंटी के कीटाणु हाथ से सैंपल में जा सकते है, वहीं किट को बच्चों से दूर रखना जरूरी है।
किट के माध्यम से 24 घंटे में बैक्टीरिया है या नहीं का लगता है पता
किट की छोटी बोतल में वाटर सप्लाई चलने के दौरान पानी भरकर रखा जाता है। वहीं 24 घंटे में पानी का रंग काला हो जाता है तो इसमें बैक्टीरिया है। अगर पानी का रंग बदलता नहीं है तो वह शुद्ध है। किट की छोटी बोतल में बैक्टीरिया का सोल्यूशन पहले से ही मौजूद है। अगर मौजूद सोल्यूशन को बैक्टीरिया ने खा लिया तो पानी काले रंग का हो जाएगा। वहीं सैंपल के दौरान अगर कोई पानी काला हो जाता है तो संबंधित जेई व एसडीओ वहां से सैंपल को विभाग की लैब में लेकर जाएंगे और जांच करवाएंगे क्योंकि कई बार कुछ बैक्टीरिया हानिकारण नहीं होते है। लेकिन किट में सभी प्रकार के बैक्टीरिया आएंगे।
जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग की ओर से जिले के गांवों में बैक्टीरिया का काम बीआरसी द्वारा करवाया जा रहा है। बैक्टीरिया जांच के लिए नागपुर से जांच किट मंगवाई गई है। विभाग द्वारा दो चरणों में कार्य किया जाना है।
-रणजीत सिंह, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग।
विभाग की ओर से 338 गांवों में बैक्टीरिया जांच करने का कार्य किया जा रहा है। जिसके पहले चरण में 3 हजार जांच सैंपल लेने का कार्य कर लिया गया है। दूसरे चरण में 5 हजार सैंपल लेने का कार्य किया जाना है । जिसे 6 माह में पूरा किया जाना है। प्रत्येक गांव में पांच महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है। इन्हीं महिलाओं से सैंपल लेने का कार्य किया जा रहा है।
-राकेश सोगलान, जिला सलाहकार, जल एवं स्वच्छता सहायक संगठन।