सिरसा। जिला की अदालतों में वर्ष 2026 की शुरुआत 50 हजार से 733 लंबित मामलों से शुरू है। जिलेभर में कुल 19 अदालतें हैं और इन मामलों को जल्द निपटारा करना 19 न्यायाधीशों के लिए बड़ी चुनौती से कम नहीं है। समय पर केसों का निपटारा न होने से पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है। इसलिए अदालतों की संख्या बढ़ाना बहुत जरूरी हो गया है।
जिला में सिरसा, ऐलनाबाद, रानियां व डबवाली में अदालत स्थापित है। प्रत्येक न्यायाधीश को हर रोज 100 से अधिक केसों की सुनवाई करनी पड़ रही है। संख्या ज्यादा होने से न्यायाधीश एक केस पर ज्यादा समय नहीं दे पाते। वरिष्ठ महिला अधिवक्ता संजू बाला ने बताया कि न्यायाधीशों पर केसों का भार बहुत ज्यादा है। इसलिए सरकार को चाहिए की केसों की संख्या के अनुसार जिला में न्यायाधीशों की नियुक्ति की जाए। जितने ज्यादा न्यायाधीश होंगे,उतना जल्द ही लोगों को न्याय मिलेगा। फिलहाल सिरसा में 14,डबवाली में 2,ऐलनाबाद में 2 व रानियां में एक न्यायाधीश नियुक्त है। उक्त सभी अदालतों में 50 हजार 733 केस लंबित हैं। इसमें 35 हजार 955 क्रिमिनल व 14 हजार 778 सिविल केस शामिल हैं। संवाद
एक और स्पेशल अदालत स्थापित करने की मांग
जिला में मादक पदार्थ तस्करी व चेक बाउंस के मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने न्यायिक परिसर में स्पेशल अदालत स्थापित की हुई है। उक्त दोनों स्पेशल अदालत में मामलों की संख्या बहुत ज्यादा हो चुकी है। इसलिए इनका निपटारा करने में काफी समय लग रहा है। इसलिए सिरसा बार एसोसिएशन ने हाईकोर्ट से एक और स्पेशल अदालत स्थापित करने की मांग की हुई है। स्पेशल एनडीपीएस अदालत में 3 हजार 843 केस लंबित है और चेक बाउंस केस के मामलों की स्पेशल अदालत में 7 हजार 103 मामले विचाराधीन हैं।
10 लाख की आबादी पर होने चाहिए 50 जज
सिरसा जिला की आबादी करीब 16 लाख है। बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष अधिवक्ता लक्की दुग्गल ने बताया है कि 1987 के कानून आयोग के अनुसार की प्रति 10 लाख जनसंख्या पर 50 न्यायाधीशों की सिफारिश की गई है,लेकिन जिला में जिला एवं सत्र न्यायाधीश समेत 19 न्यायाधीश हैं। अधिवक्ता प्रवीण अहमद ने बताया कि देश की जिला अदालतों में न्यायाधीशों के 5245 पद खाली हैं। जब तक खाली पद नहीं भरे जाएंगे, पीड़ितों को समय पर इंसाफ नहीं मिल सकता।
जिला की अदालतों में लगातार केसों की संख्या बढ़ रही है। उनकी सुनवाई के लिए केवल 19 न्यायाधीश हैं। न्यायाधीशों पर भी केसों का भार बढ़ता ही जा रहा है। इतने केसों की जल्द सुनवाई संभव नहीं। इसलिए न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। ताकि पीड़ितों को जल्द से जल्द न्याय मिले। बार एसोसिएशन ने हाईकोर्ट से एक और स्पेशल अदालत स्थापित करने की मांग भी की हुई है।
-गंगाराम ढाका,प्रधान बार एसो. सिरसा।