अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
जिले में अग्निशमन विभाग की हालत बेहद खस्ता है। कही दमकल गाड़ियों की कमी है तो कही कर्मचारी नहीं हैं। अप्रैल माह में गेहूं का सीजन शुरू होते ही आगजनी की घटनाएं बढ़ जाती हैं ऐसे में विभाग ने अब तक कोई व्यवस्था नहीं की हुई है जिससे शहर और गांव जोखिम में हैं। सिरसा दमकल केंद्र में छह गाड़ियां हैं जिन पर शिफ्टों में कर्मचारियों की तैनाती की संख्या देखी जाए तो मात्र चार कर्मचारी ही काम चला रहे हैं। 24 घंटों में तीन शिफ्ट लगती हैं जिनमें एक गाड़ी पर छह कर्मचारी होने चाहिएं। फिलहाल शहर और गांव जोखिम में हैं। अप्रैल के पहले सप्ताह तक कर्मचारियों की कमी पूरी नहीं हुई तो आगजनी से जानमाल का नुकसान हो सकता है।
शहर के दमकल केंद्र के पास छह दमकल गाड़ियां हैं। चार गाड़ी कंडम घोषित कर दी गई हैं। केंद्र पर दस गाड़ी होती हैं यानि अभी तक चार गाड़ियों की कमी है। एक शिफ्ट में दो कर्मचारी और फायरमैन मौजूद रहते हैं। इसके अलावा अगर जरूरत पड़ती है तो आसपास से ड्राइवर बुला लिए जाते हैं। विभाग का कहना है कि उनके पास 28 कर्मचारी हैं जिसमें से हर दिन कोई न कोई कर्मचारी छुट्टी पर भी रहता है। तीन शिफ्टों में इन कर्मचारियों को लगाया जाता है। सिरसा केंद्र में 17 पक्के कर्मचारी, 11 अनुबंध आधारित सहित कुल 28 कर्मचारी हैं। इस केंद्र पर 28 कर्मचारियों की और कमी है। इस कमी के चलते कर्मचारियों को ज्यादा ड्यूटी देनी पड़ रही है। सिरसा केंद्र पर मौजूदा समय में चार गाड़ियों की जरूरत है जिसके बारे में विभाग को लिखा गया है। पहले दमकल विभाग नगर परिषद के अधीन था पर अब सरकार के अधीन है। फायर ऑफिसर अमर सिंह के अनुसार सिरसा केेंद्र में इस समय छह चालक, पांच फायरमैन और छह लीडिंग फायरमैन है। अग्निशमन अधिकारी अमर सिंह और सुखदेव सिंह का कहना है कि कर्मचारी कम हैं जिस कारण दिक्कत आ सकती है।
चार गाड़ियां टर्न ओवर में रहे तो कम से कम 16 कर्मचारियों की रहती है जरूरत
छह में से यदि चार गाड़ियां ही टर्न ओवर में रहें तो कम से कम 16 कर्मचारियों की आवश्यकता रहती है। तीन शिफ्टों में 48 कर्मचारी होने चाहिएं। इससे अधिक गाड़ियां टर्न ओवर में हों तो और अधिक कर्मचारियों की जरूरत रहती है। पर फिलहाल कर्मचारी ही शिफ्ट में काम चला रहे हैं।
चोपटा और डिंग में सिरसा से जाती हैं गाड़ियां
राजस्थान सीमा से सटे चोपटा और फतेहाबाद से सटे डिंग मंडी क्षेत्र में अगर फसलो में आग लग जाती है तो उसे बुझाने के लिए 25 किमी दूर सिरसा से गाड़ियां जाती हैं। जब तक गाड़ी वहां पहुंचतीं हैं तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है। डिंग मंडी में गत वर्ष एक गाड़ी की व्यवस्था की गई थी पर इस बार नहीं है।
चोपटा क्षेत्र में आग लगने पर भट्टू से और डिंग मंडी क्षेत्र में आग लगने पर फतेहाबाद से गाड़ी मंगाई जाती हैं। अगर आग भीषण हो तो ऐसे में वायु सेना केंद्र सिरसा और डेरा सच्चा सौदा की दमकल गाड़ी का सहयोग लिया जाता है।
रानियां और ऐलनाबाद में स्थिति सुधरी
रानियां नगर में दो गाड़ी और 21 कर्मचारी है जिसमें 15 फायरमैन और छह चालक हैं। ऐलनबाद में भी यही स्थिति है। डबवाली में चार गाड़ी हैं और 46 कर्मचारियों में से 26 ही तैनात हैं। डबवाली क्षेत्र में आग लगने पर पंजाब के आसपास के जिलों से भी मदद ली जाती है।
पिछले वर्ष 98 स्थानों पर लगी थी गेहूं की फसल में आग
लीडिंग फायरमैन सुखदेव सिंह ने बताया कि गत वर्ष सिरसा जिले में 98 स्थानों पर गेहूं की फसलों में आग लगी थी जिससे लाखों रुपये का नुकसान हुआ था। दमकल विभाग ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया और आसपास की फसलों को बचाया था। उन्होंने बताया की फसलों में ज्यादातर आग थ्रेसर मशीन से निकली चिंगारी या बिजली की ढीली तारों के टकराने से निकली चिंगारी के वजह से लगी। कुछ मामले में जलती बीड़ी फेंकने से भी आग लगी।