अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
सुप्रीम कोर्ट के एससीएसटी एक्ट में संशोधन के फैसले से नाराज दलित समुदाय की ओर से सोमवार को भारत बंद के आह्वान का सिरसा में व्यापक असर देखने को मिला। लाठियां लेकर दलित समुदाय के हजारों लोग सुबह सड़कों पर निकले तो दहशत व भय के कारण कारोबारियों ने अपनी दुकानें बंद करने में ही भलाई समझी। जिस बाजार में दुकानदारों ने अपने दुकानें बंद करने में आनकानी की तो प्रदर्शनकारी युवाओं ने जबरन उनकी दुकानें बंद करवाई। देखते-देखते सुबह दस बजे शहर के सारे बाजार व पेट्रोल पंप बंद हो गए। शाम तक बंद 80 प्रतिशत सिरसा बंद रहा। दलित प्रदर्शनकारियों ने रेलवे ट्रैक बाधित करने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने बस स्टैंड के पास नेशनल हाईवे पर जाम लगा दिया। एक घंटे तक एनएच पर जाम लगने से लोगों को भारी परेशानी झेलने पड़ी। इसके बाद दोपहर करीब एक बजे उपमंडलाधीश राहुल हुड्डा मौके पर पहुंचे। उपमंडलाधीश समक्ष विभिन्न दलित संगठनों ने अपने रोष का इजहार करते हुए राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
सुबह सात बजे शहर के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले दलित समुदाय के लोग एकजुट होना शुरू हो गए। इसके बाद हजारों की संख्या में दलित हाथों में लाठी लिए शहर के बाजारों की ओर चल दिए। जहां से भी ये गुजरे दशहत के मारे कारोबारियों ने अपनी दुकाने बंद कर दी। इन्होंने जबरदस्ती दुकानों को दुकाने बंद करवाई। तोड़फोड़ के डर से सभी बाजारों व गलियों में स्थित दुकान व बडे़ प्रतिष्ठान बंद हो गए। हजारों प्रदर्शनकारी अंबेडकर चौक के पास पहुंचे तो पेट्रोल पंपों का खुला देखकर उनमें रोष पनप गया। हाथों में लाठियां लिए सैकड़ों दलित युवा पेट्रोल पंप में घुसे और डरा-धमकाकर सभी पेट्रोल पंपों को बंद करा दिया। पेट्रोल पंप बंद होने से वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामान करना पड़ा। जिन वाहनों में पेट्रोल खत्म हो चुका था, उनके चालकों ने वाहन सड़क किनारे खडे़ कर दिए।
अंबेडकर चौक लगा जाम
सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए विभिन्न दलित संगठन अंबेडकर चौक पहुंचे, जिससे अंबेडकर चौक पर जाम की स्थिति बन गई। जाम को देखते हुए पुलिस को ट्रैफिक रुट बदलना पड़ा। वाहन चालकों को बाईपास रास्ते से बरनाला रोड, डबवाली रोड व हिसार की ओर जाना पड़ा। एक घंटे तक दलित संगठनों के पदाधिकारी अंबेडकर चौक पर समुदाय के लोगों को संबोधित करते रहे।
रेलवे ट्रैक बाधित करने की थी मंशा
प्रदर्शनकारियों में सबसे ज्यादा संख्या दलित युवाओं की थी। इनमें से सैकड़ों युवा रेलवे ट्रैक बाधित करने की मंशा को लेकर रेलवे स्टेशन के पास पहुंचे। इनकी मंशा को पहले से भांपते हुए रेलवे पुलिस फोर्स व राजकीय रेलवे पुलिस के जवान मुस्तैदी से स्टेशन पर खडे़ हो गए। दलित युवाओं को समझाया गया कि अगर रेलवे ट्रैक बाधित करने की कोशिश की तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। रेलवे का केस दर्ज होने के डर से दलित युवा रेलवे ट्रैक से हट गए और बस स्टैंड की ओर रवाना हो गए।
दो घंटे बाधित रही बस सेवा
सुबह करीब 11 बजे सभी दलित संगठनों के लोग प्रदर्शन करते हुए नेशनल हाईवे स्थित बस स्टैंड पर पहुंच गए और जाम लगा दिया। जाम लगने से वाहन चालकों को काफी दिक्कतें झेलनी पड़ी। प्रदर्शनकारियों के रोष को देखते हुए रोडवेज प्रशासन ने बस स्टैंड परिसर से बसें बाहर नहीं भेजी। एक बजे तक प्रदर्शनकारी बस स्टैंड के बाहर डटे रहे। उनके जाने के बाद बस सेवा बहाल कर दी गई। डिपो कार्यशाला प्रबंधन मनोज शर्मा ने बताया कि सुबह सभी रुटों पर बसें निर्धारित समय पर रवाना की गई थी। 11 बजे से लेकर एक बजे तक कोई भी बस अड्डा परिसर से बाहर नहीं भेजी गई। जिन बसों को डबवाली जाना था उन्हें सीधा बाईपास रास्ते से भेज दिया गया। दो घंटे बस न चलने से रोडवेज को हजारों रुपयों का घाटा हुआ है।
दलित हितों की रक्षा करने की मांग
दोपहर करीब एक बजे प्रदर्शनकारियों के बीच उपमंडलाधीश राहुल हुड्डा पहुंचे तो दलित संगठनों ने उन्हें महामहिम राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में दलित संगठनों की ओर से कहा गया है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद दलित समाज पर अत्याचार रोकने के लिए कई कदम उठाए गए, इसी कड़ी में 1989 में अनुसूचित जाति व जनजाति पर अत्याचार रोकने लिए अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम भारत की संसद में पारित कर इसे लागू किया गया था, परंतु इस कानून का प्रभावी ढंग से लागू न होने के कारण इस वर्ग पर अत्याचार लगातार जारी है। सर्वोच्च न्यायालय एसी/एसटी एक्ट के संबंध में नया आदेश जारी किया है, जिससे दलितों की रक्षा के लिए बनाया गया ये एक्ट कमजोर हो गया है। सरकार को समय रहते दलितों के हितों की रक्षा करनी चाहिए एवं सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका बिना देरी के तुरंत दायर की जाए।
एक्ट के दुरुपयोग की चिंता जताई थी
सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को एक आदेश में एससी/एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर चिंता जताई थी और इसके तहत मामलों में तुरंत गिरफ्तारी की जगह शुरुआती जांच की बात कही। एससी/एसटी एक्ट अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को अत्याचार और भेदभाव से बचाने वाला कानून है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इस कानून का डर कम होने और नतीजतन दलितों के प्रति भेदभाव और उत्पीड़न के मामले बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
सुरक्षा का जायजा लेने पहुंचे एएसपी
दलितों के बंद को लेकर शहर में प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कडे़ प्रबंधन किए गए थे। शहर थाना प्रभारी अमित बैनीवाल के नेतृत्व में पुलिस फोर्स प्रदर्शनकारियों के आसपास मौजूद रही। सुबह से ही हर चौक चौराहे पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी। एएसपी नरेंद्र बिजारनियां स्वयं सुरक्षा व्यवस्था का दिनभर जायजा लेते रहे। सीआईडी कर्मी प्रदर्शनकारियों पर पैनी नजर रखते हुए पल-पल की सूचना सीनियर अधिकारियों को देते रहे।
बंद में ये संगठन हुए शामिल
भारत बंद को लेकर जिन दलित संगठनों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रोष जताया उनमें डॉ. भीमराव अंबेडकर स्टूडेंट्स फे डरेशन ऑफ इंडिया, अखिल भारतीय चमार महासभा, वाल्मीकि महासभा, मजहबी सिख महापंचायत, रविदास सभा, अंबेडकर सभा, एससी/बीसी संघर्ष समिति के पदाधिकारी हंसराज, बलराज चालिया, अशोक वर्मा, अशोक ढोसीवाल, रामनारायण, राजकुमार चंदा, संजूबाला एडवोकेट, रेखा सुरलिया, भूषणलाल बरोड़ सहित हजारों दलित समुदाय के लोग शामिल रहे।