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जिले में पहली बार पंजाबी सिख समाज ने एकजुट होकर किया सम्मेलन, सभी पार्टियों के नेता हुए शामिल, एकजुटता को वोट में बदलने की अपील

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हरियाणा के पंजाबी और सिख संगठित होंगे तो बिस में बढे़गी विधायकों की संख्या: दीदार सिंह नलवी
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सिरसा। हरियाणा के गठन से पहले जब पंजाब में प्रकाश सिंह बादल को जब यह महसूस हुआ कि वह पंजाब का मुख्यमंत्री नहीं बन सकता तो उसने चौधरी देवीलाल को हरियाणा की मांग करने के लिए कहा। अकालियों ने पंजाबी सूबा और हरियाणवियों ने हरियाणा की मांग कर दी। हरियाणा के मूूल निवासियों ने पंजाबियों व सिखों से भेदभाव शुरू कर दिया। इसका उदाहरण हिसार में एक सिख परिवार के साथ कुछ युवकों ने बदतमीजी की तो परिवार ने थाने में शिकायत दी, लेकिन हरियाणवी मूल के एसएचओ ने शिकायत लेने से इंकार कर दिया। ये विचार पंजाबी सिख सम्मेलन में हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के वरिष्ठ उप प्रधान दीदार सिंह नलवी ने मुख्य अतिथि के तौर पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हरियाणा के पंजाबी और सिख संगठित होंगे तो विधानसभा में विधायकों की संख्या बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि यदि अपनी कौम का अस्तित्व बचाए रखना है तो संगठित होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा कि विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल को कोई सीट नहीं मिलेगी। हरियाणा में कोई पंजाबी और सिख वोट नहीं डालेगा। सिख पंजाबी सम्मेलन एक गैर राजनीतिक सम्मेलन हैं और इसमें सभी पार्टियों के नेता शामिल हैं। सम्मेलन के आयोजक परमजीत सिंह माखा ने कहा कि हरियाणा के गठन के बाद उनके गांव हब्बोआना से विधायक करनैल सिंह बने, उन्होंने पंडित चिरंजीलाल को वोट दी थी, लेकिन देवीलाल और बंसीलाल उससे ईर्ष्या करने लग गए। हरियाणा की एक विशेष जाति अपने आप को सुपर समझती है, लेकिन अब पंजाबी और सिखों को अपना हक मांगना नहीं छीनना पड़ेगा। आयोजकों ने सम्मेलन के लिए परमजीत सिंह माखा को तलवार भेंट की। प्रेम सिंह कंबोज ने कहा कि रोहतक में दंगों में विशेष वर्ग पर दर्ज केस वापस ले लिए गए। पूर्व चेयरमैन हरदयाल सिंह गदराना ने कहा कि वह इनेलो में कई साल तक रहा। उनके गांव के ही कुलदीप गदराना कांग्रेस से टिकट के दावेदार है। लेकिन किसी भी पार्टी ने पंजाबी व सिखों को राजनैतिक हिस्सेदारी नहीं दी।
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राष्ट्रीय पंजाबी सभा के प्रदेशाध्यक्ष भूपेश मेहता, कुलदीप सिंह गदराना, राजेंद्र देसूजोधा, पंजाबी सत्कार सभा के अध्यक्ष प्रदीप सचदेवा ने कहा कि पंजाब से अलग होकर जब से हरियाणा प्रदेश अस्तित्व में आया है, तब से पंजाबियों की अनदेखी हुई है। पिछले 5 दशक से आज तक हरियाणा के पंजाबी व सिख समाज की किसी भी क्षेत्र में सुध नहीं ली गई है। अब वह समय आ गया है, जब पंजाबी व सिख समाज के लोगों को अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए संगठित होने की आवश्यकता है। इस अवसर पर मौजूद हजारों पंजाबियों ने एकजुटता के साथ अपने हितों की लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया। इस दौरान मांग जताई गई कि पंजाबी को दूसरी भाषा का दर्जा दिया जाए और पूरी तरह से लागू किया जाए। इस मौके पर मलकीत सिंह पन्नीवाला मोरिका, अखिल भारतीय अरोडा एकता परिवार के अध्यक्ष भूषण ऐलाबादी, खत्री सभा के महासचिव सुखविंद्र सिंह दुग्गल दलबाग सिंह भावदीन, प्रो. राजवंत सिंह रानियां, राहुल कंबोज सिरसा, बलदेव सिंह, गुरनाम सिंह, मेजर सिंह, नछतर सिंह झोरडऱोही, पाला सिंह कंबोज, कुलदीप सिंह गदराना, मंगत हसू, बलदेव सिंह मांगेआना, मजहबी महासभा के संस्थापक मेजर सिंह खत्ररावा, मुल्तान सभा के अध्यक्ष रमेश मेहता, कंबोज सभा के अध्यक्ष कश्मीर सिंह, सेवानिवृत्त जेल अधीक्षक जितेंद्र सेठी, केहर सिंह सिरसा, गुरचरण सिंह मत्तड चेयरमैन मार्केट कमेटी कालांवाली, अंग्रेज सिंह चोरमार भी उपस्थित थे।
फोटो 20, 21
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