अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
नगर परिषद के अधिकारियों की कार्यशैली की वजह से सिरसा शहर का विकास ठहर गया है। अधिकारियों द्वारा सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में रुचि नहीं ली जाती, जिसका खामियाजा जनता को उठाना पड़ता है। जिला विकास योजना के मद से नगर परिषद को मिलने वाली ग्रांट वित्त वर्ष 2016-17 में लैप्स हो गई, जबकि चालू वित्त वर्ष में भी इस पर संकट गहरा गया है। मामले में अतिरिक्त उपायुक्त डॉ. मुनीष नागपाल की ओर से नगर परिषद सिरसा के कार्यकारी अधिकारी वीरेंद्र सहारण और पालिका अभियंता राकेश पूनियां को पत्र लिखकर इस बारे में आगाह किया है। चेतावनी दी गई है कि यदि वित्त वर्ष 2017-18 का बजट लैप्स होता है तो इसके लिए दोनों जिम्मेवार होंगे। अतिरिक्त उपायुक्त की ओर से नगर परिषद के दोनों अधिकारियों को विकास कार्यों में लापरवाही के लिए चेताया है।
किसी की नहीं होती सुनवाई
नगर परिषद में कुर्सी पर बैठते ही अधिकारियों की कार्यशैली में बदलाव आ जाता है। उन पर किसी का कोई असर नहीं पड़ता। वे अपनी मर्जी से ही काम करते है। इसी का उदाहरण है कि डी-प्लान के तहत वर्ष 2017-18 के लिए नगर परिषद को दी गई ग्रांट के बिल अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय को नहीं सौंपे गए। अतिरिक्त उपायुक्त द्वारा इस आशय का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि डी-प्लान की समीक्षा बैठक में सात मार्च 2018 को, दूरभाष पर सूचित करने तथा जिला विकास एवं निरीक्षण समिति के अध्यक्ष कृष्ण बेदी द्वारा निर्देश देने पर भी नगर परिषद के अधिकारियों ने विकास कार्य पूरा करवाकर उनके बिल प्रस्तुत नहीं किए। अतिरिक्त उपायुक्त की ओर से इस आशय का भी उल्लेख किया गया है कि नगर परिषद के अधिकारियों का सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के क्रियांनवयन में कोई रुचि नहीं है।
क्या है मामला
जिला विकास योजना (डी-प्लान) के तहत जिला उपायुक्त को हर वर्ष पांच करोड़ रुपये की राशि मिलती है। इस राशि को अतिरिक्त उपायुक्त के माध्यम से विकास कार्यों पर खर्च किया जाता है। अतिरिक्त उपायुक्त द्वारा विभिन्न विभागों से विकास कार्यों का ब्योरा मांगा जाता है और उन कार्यों के लिए ग्रांट जारी की जाती है। जिस विभाग को ग्रांट प्राप्त होती है, वह विभाग विकास कार्य करवाने के बाद उसका बिल अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय में प्रस्तुत करता है। जो विभाग डी-प्लान से मिली राशि का समय पर उपयोग नहीं करता, तब उक्त राशि लैप्स हो जाती है। वित्त वर्ष की समाप्ति 31 मार्च तक विकास कार्यों के पूर्ण होने और उनके बिल प्रस्तुत करने होते हैं। इसके बाद ग्रांट की राशि वापस सरकारी खजाने में चली जाती है और उसका उपयोग अगले वित्त वर्ष में नहीं किया जा सकता।
विकास को तरसते सिरसावासी
नगर परिषद के अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा सिरसा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। अधिकारी विकास कार्यों के प्रति गंभीर नहीं है। अतिरिक्त उपायुक्त की टिप्पणी यह साबित करती है कि नगर परिषद के अधिकारियों की कार्यशैली कैसी है? यह कि एक तरफ लोग विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे है और दूसरी ओर अधिकारियों की ढिलाई की वजह ग्रांट लैप्स हो जाती है। वित्त वर्ष 2016-17 में विकास के लिए डी-प्लान से मिली राशि का लैप्स होना सिरसा की जनता के साथ धोखा है। इसके लिए जिम्मेवार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
डीसी से मिलेंगे: प्रधान
डी प्लान के तहत पहले टेंडर आमंत्रित किए गए थे लेकिन ने खुल नहीं पाए। जिसके चलते 80 लाख रुपये के काम अटके हुए है। अगर तीसरी बार भी टेंडर न खुले तो कार्य कराने के लिए उपायुक्त से अनुमति लेनी होती है। मंगलवार को उपायुक्त से मिले थे। अभी तक समयावधि खत्म होने में तीन दिन पड़े है। इस बारे में बुधवार को उपायुक्त से मिलेंगे समस्या का समाधान हो जाएगा। कोई धनराशि लैप्स नहंी होगी पहले लैप्स हुई थी वह पुरानी बात है।
शीला सहगल, प्रधान नगर परिषद सिरसा।