अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
डेरा सच्चा सौदा के बलिदानी जत्थे का खुलासा होने के बाद से इंटेलिजेेंस एजेंसियों की नींद हराम हो गई है। सुरक्षा एजेंसियों को डर इस बात का है कि डेरा मामला शांत होने के बाद बलिदानी जत्था सक्रिय न हो जाए। अभी तो प्रशासन ने काफी सख्ताई कर रखी है। डेरा के आसपास सभी इलाकों में कर्फ्यू लगाया हुआ है। इसके चलते डेरा का बलिदानी जत्था शांत है, लेकिन सुरक्षा बंदोबस्त हटाने के बाद ये जत्था सक्रिय हो उठा तो सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है। तमाम संभावित खतरे को भांपते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने उन डेरा प्रेमियों की पहचान करनी शुरू कर दी है जिन्होंने बलिदानी जत्थे में शामिल होने के लिए शपथ पत्र भरे। ऐसे लोगों की संख्या हजारों में है, डेरा में काफी सालों से सेवादार रहे लोगों से खुफिया विभाग के कर्मचारी अंदरखाते जानकारी जुटाने में जुटे हैं। सूत्रों के अनुसार खुफिया तंत्र को काफी लोगों के बारे में पता चला है जो शपथ पत्र देकर बलिदानी जत्थे में शामिल हुए। ये लोग डेरा सच्चा सौदा के पास बनी कॉलोनियों के वासी हैं। इन लोगों पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि जत्थे में शामिल अन्य लोगों का भी पता चल सके। बलिदानी जत्थे में सबसे ज्यादा संख्या महिलाओं की है। इन लोगों ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने की शपथ ली हुई है। इसके अलावा जिन वकीलों ने नोटरी की मोहर लगने के बाद शपथ पत्र अपने साइन किए उन वकीलों से भी सुरक्षा एजेंसियां पूछताछ करने पर विचार कर रही हैं। इन वकीलों से एजेंसियों को काफी अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है। जिला प्रशासन भी इस दिशा में गंभीरता से सोच रहा है। इसके चलते शुक्रवार को प्रशासन की ओर से डेरा सच्चा सौदा के आसपास इलाके में लगाए गए कर्फ्यू में कोई ढील नहीं दी।
शपथ पत्र में लिखी हैं ये बातें
मैंने डेरा सच्चा सौदा सिरसा से नामदान लिया हुआ है। पिछले कुछ सालों से केंद्रीय जांच ब्यूरो डेरा की जांच कर रहा है। इसके जांच अधिकारी डेरा प्रमुख को नजायज केसों में फंसा रहे हैं। मैं जांच एजेंसी की हरकतों से परेशान हूं। मैंने अपनी मर्जी से फैसला लिया है कि जब तक केंद्रीय जांच ब्यूरो डेरा प्रमुख को फंसाने की साजिश नहीं छोड़ते तब तक मैं शांत नहीं बैठूंगा, बेशक मेरा जीवन ही समाप्त क्यों न हो जाए। अगर मेरा जीवन समाप्त हो जाता है तो उसका जिम्मेवार डेरा सच्चा सौदा नहीं, बल्कि इसकी जिम्मेवार सरकार व केंद्रीय जांच ब्यूरो होगा। मैंने खुद बिना किसी दबाव के ये फैसला लिया है, इसलिए मेरा जीवन समाप्त होने के बाद सरकार व केंद्रीय जांच ब्यूरो के बिना और किसी के विरुद्ध कोई भी शिकवा करने का अधिकार नहीं होगा। मैं हल्फ से बयान करता हूं कि मेरा उपरोक्त बयान सही है, इसमें कुछ भी छिपाकर नहीं रखा है। -शपथकार
बलिदानी जत्थे ने की इंटेलिजेंस एजेंसियों की नींद हराम
सरकार को सता रहा है बलिदानी जत्थे के सक्रिय होने का डर
शपथ पत्र भरने वालों की पहचान करने में जुटी सुरक्षा एजेंसियां
जिन वकीलों ने शपथ पत्रों पर अपने साइन किए उनसे होगी पूछताछ