अमर उजाला ब्यूरो
डबवाली।
उपमंडल न्यायिक दंडाधिकारी रितू की अदालत ने सोमवार को डीएवी संस्थान को करीब 3.32 करोड़ रुपये जमा करवाने के आदेश दिए। यह राशि डबवाली अग्निकांड पीड़ितों को मुआवजे के तौर पर वितरित की जाएगी। अदालत ने डीएवी संस्थान को मुआवजा राशि 22 दिसंबर 2017 तक जमा करवाने के आदेश दिए हैं। अगर उपरोक्त अवधि तक डीएवी संस्थान मुआवजा राशि जमा नहीं करवाता तो संस्थान के बैंक खाते तथा प्रॉपर्टी अटैच कर ली जाएगी।
अदालत ने यह फैसला डबवाली अग्निकांड पीड़ित संघ की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया। पीड़ितों ने देश की शीर्ष अदालत के फैसले के अनुसार मुआवजा मांगते हुए याचिका में डीएवी संस्थान की प्रॉपर्टी तथा बैंक खाते अटैच करने की मांग की थी। 18 नवंबर 2017 को दोनों पक्षों की जिरह के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। डबवाली अग्निकांड पीड़ितों ने अदालत के फैसले को उचित करार देते हुए सच्चाई की जीत बताया है।
गौरतलब है कि मुआवजे के लिए पिछले 21 सालों से अग्निकांड पीड़ित अदालतों की तारीख भुगत रहे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस टीपी गर्ग आयोग की रिपोर्ट के बाद वर्ष 2009 में पंजाब एवं हरियाणा हाइकोर्ट ने डबवाली अग्निकांड पीड़ितों को 34.14 करोड़ रुपये ब्याज सहित देने के आदेश दिए थे, जिसमें से 45 फीसदी सरकार तथा 55 फीसदी शेयर डीएवी संस्थान को देना था। डीएवी संस्थान ने उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की। जो वर्ष 2013 में खारिज हो गई। इस आदेश के बाद डीएवी ने 17 करोड़ 120 रुपये डबवाली अदालत में जमा करवा दिए थे। मुआवजा राशि के ब्याज को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज कर दिया, जिसमें शीर्ष अदालत ने देरी से भुगतान पर 10 फीसदी ब्याज राशि को घटाकर छह फीसदी कर दिया। लेकिन डीएवी संस्थान ने गलत आंकड़े पेश करके मुआवजा राशि का ब्याज जमा नहीं करवाया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करवाने के लिए डबवाली अग्निकांड पीड़ित संघ ने स्थानीय अदालत में याचिका दायर करके डीएवी संस्थान के बैंक खाते तथा प्रॉपर्टी अटैच करने की मांग की थी।
पीड़ितों की बैठक 14 दिसंबर को
अदालत के निर्णय के संबंध में अग्निकांड पीड़ितों की बैठक 14 दिसंबर को शाम साढ़े पांच बजे अग्निकांड स्मारक पर रखी गई है, जिसमें केस के संबंध में विचार विमर्श होगा। 22वीं बरसी के मौके पर 21 से 23 दिसंबर तक होने वाले कार्यक्रम की रूपरेखा बनाई जाएगी। मुआवजा राशि अदालत में जमा होने के बाद रिटायर्ड जस्टिस टीपी गर्ग की आयोग की रिपोर्ट के अनुसार मुआवजा राशि आवंटित की जाएगी।
-विनोद बांसल, प्रवक्ता, डबवाली अग्निकांड पीड़ित संघ।
258 बच्चों सहित 442 लोगों की जलकर हुई थी मौत
23 दिसंबर 1995 को डबवाली के डीएवी स्कूल के वार्षिकोत्सव में पंडाल में आग लगने से स्कूली बच्चों समेत 442 लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे में तत्कालीन डीएसपी अनिल राव की बेटी की भी मौत हो गई थी। शवों के अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट भी छोटा पड़ गया था। एक मैरिज पैलेस में आयोजित वार्षिक उत्सव के दौरान पंडाल के गेट पर शॉर्ट सर्किट हुआ और चंद मिनटों में आग ने पूरे पंडाल को अपनी चपेट में ले लिया। पंडाल के पास ही खाना बनाने के लिए गैस सिलेंडर रखे थे, जो आग से जल उठे। बिजली के तारों ने भी आग पकड़ ली। पास रखे जनरेटर में भी डीजल होने के कारण आग और भड़क गई। पंडाल के ऊपर तिरपाल की छत बिछाई गई थी। तिरपाल की पॉलिथीन में आग लग जाने से वो पिघलती हुई लोगों पर गिरी और देखते ही देखते लाशों का ढेर बिछ गया। यह अब तक देश का सबसे बड़ा अग्निकांड है।