दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे पर रोजाना गुजरने वाले लाखों लोगों को सिरहौल टोल पर मिलने वाले जाम से जल्द निजात मिलेगी। डीएससी और आईडीएफसी के बीच हुए समझौते पर आखिरी मुहर सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान लग सकती है।
दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे पर टोल पर मालिकाना हक को लेकर विवाद लगभग सुलझ गया है। एनएचएआई के जानकारों के अनुसार डीएससी ने आईडीएफसी से 1600 करोड़ लोन के बदले में टोल का मालिकाना हक उसे देने का करार किया है।
आने वाले समय में आईडीएफसी की ओर से फीडबैक वेंचर कंपनी एक्सप्रेसवे का रख रखाव व टोल वसूलने का काम करेगी। दोनों कंपनी के बीच हुए फैसले के बाद आईडीएफसी ने सिरहौल टोल से टोल हटाने का प्रस्ताव तैयार किया है। वह अब केवल खेड़कीदौला टोल पर ही टोल वसूलेगी।
एनएचएआई के अधिकारी के अनुसार 13 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों के बीच हुए करार पर मुहर लगने की उम्मीद है।
सरकार भी कर चुकी है दखलंदाजी
दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे के सिरहौल टोल पर लगने वाले जाम के दौरान होनेे वाली समस्या के बाद प्रदेश सरकार की ओर से भी दखलंदाजी की गई थी। आईडीएफसी और प्रदेश सरकार की ओर से भी टोल हटाने व वसूलने की बीच वार्ता हो चुकी है।