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हरियाणाः पानी बचाओ मुहिम में 65 लाख का घोटाला

Tue, 12 Feb 2013 11:54 AM IST
डॉ. सुरेंद्र धीमान/चंडीगढ़
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जल संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करने के नाम पर हरियाणा के तीन सर्किलों में 65 लाख रुपये का घोटाला हुआ है। सरकार अब 10 एक्सईएन को चार्जशीट करने और नौ ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट करने की तैयारी में है। अधिकारियों ने इस घोटाले की जानकारी जनस्वास्थ्य मंत्री किरण चौधरी से छिपाई है। सोमवार को उनको अमर उजाला से घोटाले की जानकारी मिली तो हैरान रह गईं।
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जनस्वास्थ्य विभाग के आंतरिक विजिलेंस के अधीक्षण अभियंता को 9 जनवरी को जांच के लिए कहा गया। उन्होंने पलवल, रेवाड़ी और भिवानी सर्किल की अपनी जांच रिपोर्ट एक पखवाड़े में तैयार कर सौंप दी।

महकमे के प्रमुख अभियंता एसके बंसल ने जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रधान सचिव सरबण सिंह को 30 जनवरी को रिपोर्ट भेजी। इसमें लिखा गया है कि करीब 65 लाख रुपये की अदायगी ज्यादा की गई। इसमें से 44.41 लाख रुपये की पेमेंट हो चुकी है और 21.08 लाख रुपये की पेमेंट अभी होनी है। विभाग ने यह पेमेंट रोक ली है।
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इनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश
उन्होंने सरकार से एक्सईएन एमएस राणा, विजय सिंह, मदन लाल, डीके गंभीर, ललित अरोड़ा, कर्म चंद, दलीप सिंह श्योराण, श्रीकृष्ण दहिया, फैसल इब्राहिम के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की सिफारिश की है। जो पेमेंट ज्यादा की गई है उसकी वसूली 15 दिनों में ठेकेदारों से करने की सिफारिश की है। ठेकेदार अगर यह पेमेंट वापस न करें तो सभी दस एक्सईएन से यह रकम वसूलने को कहा है।

पानी बचाओ मुहिम का काम करने वाले नौ ठेकेदारों को तीन साल के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया जाए। इससे पहले प्रमुख अभियंता ने इस मामले की स्टेट विजिलेंस ब्यूरो से जांच कराने की सिफारिश की थी, जिसे प्रधान सचिव सरबण सिंह ने मना कर दिया था और विभागीय सतर्कता से जांच कराने का हुकम दिया था।

जांच में पाई गई गड़बड़ियां
प्रमुख अभियंता एसके बंसल ने प्रधान सचिव को भेजी रिपोर्ट में कहा है कि अफसरों ने काम का बंटवारा करके अलाट किया। यानी पूरे काम का एक साथ टेंडर करने के बजाय टुकड़ों में किया गया। ज्यादा रेट पर पेमेंट कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया। पलवल के अधीक्षण अभियंता ने एक्सईएन को 50,000 रुपये से ज्यादा की कोटेशनों को मंजूरी दी।

ऐसे हुआ घोटाला
पानी बचाओ मुहिम के तहत दीवारों पर नारे लिखे जाने थे। प्रदेश में करीब 25 लाख रुपये से यह जागरूकता फैलाई जानी थी। इन सर्किलों से मुख्यालय से ज्यादा पैसे की मांग की गई तो वाउचर मंगाए गए। तब घोटाले की आशंका हुई। पिछले साल जुलाई में प्रारंभिक जांच में घोटाला सामने आ गया था मगर विभाग ने उसे रोकने का प्रयास नहीं किया।

जनस्वास्थ्य विभाग के प्रमुख अभियंता एसके बंसल का कहना है कि प्रधान सचिव के पास संबंधित अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने, ज्यादा पेमेंट रिकवर करने की सिफारिश भेज दी है।

जनस्वास्थ्य मंत्री किरण चौधरी ने कहा कि मुझे प्रधान सचिव ने ऐसे किसी घोटाले की जानकारी नहीं दी है। मुझे आपसे ही यह जानकारी मिली है। मैं घोटाला करने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शूंगी।
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