रोहतक। राष्ट्र का निर्माण तभी होगा जब युवाओं का सही निर्माण और उन्नति होगी। जोश के साथ युवाओं को होश के साथ आगे बढ़ना होगा। 15 से 30 की आयु में युवा गलत दिशा में भी जा सकता है। अभिभावकों को अपने बच्चों को शुरू से ही सही राह दिखानी चाहिए। ये बातें अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता अधिवक्ता ग्रवित आर्य ने कही।
आईएमटी स्थित अमर उजाला कार्यालय में रविवार को संवाद कार्यक्रम में युवा संगठनों, विद्यार्थियों व आर्य समाज के प्रतिनिधियों ने राष्ट्र के निर्माण में युवाओं की भूमिका व चुनौतियां विषय पर विचार व्यक्त किए।
ग्रवित आर्य ने कहा कि युवा राष्ट्र व समाज में बदलाव की शुरुआत स्वयं अपने से करें। युवाओं को संवारने के लिए माता-पिता आगे आएं। बच्चों को अधिक-अधिक से समय दें ताकि वे भविष्य में अपने व अपने देश के काम कर सकें।
आदित्य आर्य ने कहा कि सोशल मीडिया के सदुपयोग से युवा बहुत आगे तक जा सकते हैं। कई ऐसे परिवर्तन हैं जिनमें युवाओं की सोशल मीडिया पर भागीदारी से बदलाव हुए हैं। संवाद कार्यक्रम में छात्र पवन कुमार व मनीषा ने भी अपने विचार रखे।
सबकी उन्नति में अपनी उन्नति समझनी चाहिए। यह तभी संभव है जब युवा समाज के लिए काम करें। समय निकालकर दूसरों का भला करें और जरूरतमंदों की सहायता करें। -
जोगिंद्र जोगा, छात्र नेता, एमडीयू
युवा व अभिभावक एक-दूसरे से बातचीत नहीं कर रहे हैं। युवा संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। अभिभावकों को बच्चों को पास बैठाकर भविष्य पर बात करनी चाहिए।
-पंकज, शोधार्थी, एमडीयू।
देश का विकास तभी होगा जब हम अच्छे प्रतिनिधि को चुनेंगे। सरकार में राजनीतिक पद के लिए वोट का सही इस्तेमाल करें ताकि सही व्यक्ति देश के लिए बेहतर निर्णय ले सके।
-आयुष राणा, छात्रा एमडीयू।
राष्ट्र निर्माण जन भागीदारी के लिए भले कार्यों से भी होता है। युवाओं को पौधरोपण, जल बचाने, जरूरतमंदों को मुफ्त शिक्षा देने आदि में आगे आना चाहिए।
-अंशु नांदल, एनएसएस स्टेट अवॉर्डी।
सही शिक्षा नहीं मिल रही है। थ्योरी पर अधिक और प्रैक्टिकल विषयों पर कम ध्यान दिया जा रहा है। अगर प्रैक्टिकल की ओर ध्यान दिया जाए तो दूसरे देशों से आगे बढ़ सकते हैं।
-माही, छात्रा, जाट कॉलेज
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हम राष्ट्र और समाज में योगदान तब दे पाएंगे जब पूर्वजों व अभिभावकों के संस्कारों को समझेंगे। शिक्षा जितनी ग्रहण की जाएगी उतना फायदा होगा।
-अंकुश, छात्र, जाट कॉलेज
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युवा एक-दूसरे से सीखते हैं। जिस संगत में रहेंगे, वैसा ही सीखेंगे। काफी युवा नशे की ओर बढ़ रहे हैं क्याेंकि उनको माहौल ही ऐसा मिला है।
-महक, छात्रा, जाट कॉलेज
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युवा अपने स्वार्थ तक ही सीमित न रहें। अपने मुद्दों व विचारों को दूसरों के साथ साझा करें। युवाओं को हर सामाजिक बिंदुओं के लिए स्वतंत्र होकर अपनी बात रखना आना चाहिए। -साहिल अहमद, एमएससी छात्र, जाट कॉलेज