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कॉमनवेल्थ खेलों से कुश्ती हटाए जाने से पहलवान व कोच निराश

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रोहतक। 2026 के कॉमनवेल्थ खेलों से कुश्ती को हटाए जाने से जिले के 1300 से ज्यादा पहलवानों की तैयारियों को झटका लगा है। हाल ही में बर्मिंघम में हुए कॉमनवेल्थ खेलों में जिले के तीन खिलाड़ियों के पदक जीतने से प्रेरित होकर तैयारी कर रहे सैकड़ों छोटे-बड़े पहलवानों का मनोबल टूट गया है। कुश्ती खिलाड़ी, कोच और उनके अभिभावक निराश और परेशान हैं।
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देश के लिए पदक जीतने की उम्मीद लेकर सुबह-शाम घंटों जी तोड़ अभ्यास कर रहे खिलाड़ियों की उम्मीदें प्रभावित होंगी। कॉमनवेल्थ तक पहुंचने के लिए खिलाड़ी लंबे संघर्ष से होकर गुजरना पड़ता है। इस दौरान सेहत और अभ्यास के लिए मोटा खर्च भी वहन करना पड़ता है। जिला स्तर की बात की जाए तो वर्तमान में विभिन्न अखाड़ों में 1300 से ज्यादा लड़के और लड़कियां कुश्ती की तैयारी कर रहे हैं। छोटूराम अखाड़ा में 120 खिलाड़ी, मेहर सिंह अखाड़ा में करीब 250 खिलाड़ी, रामकरण अखाड़ा में 70 खिलाड़ी, सुनारियां जेल के पास स्थित अखाड़ा में करीब 100 खिलाड़ी, शिव महादेव एकेडमी में करीब 70 खिलाड़ी, बोहर स्थित इंद्रदेव एकेडमी करीब 80 खिलाड़ी, मदीना टोल प्लाजा के पास स्थित अखाड़े में करीब 90 खिलाड़ी, एमडीयू में 40, खिड़वाली सेंटर में 90 खिलाड़ी, सांपला स्थित रामबीर अखाड़ा में 80 खिलाड़ी, सत्यवान अखाड़ा में करीब 60 खिलाड़ी और प्रत्येक गांव में छोटे-बड़े अखाड़ों में सैकड़ों खिलाड़ी अभ्यास कर रहे हैं।
2022 कॉमनवेल्थ खेलों में जिले के तीन खिलाड़ियों ने जीते पदक
अगस्त में बर्मिंघम में हुए कॉमनवेल्थ खेलों में जिले के तीन खिलाड़ियों ने पदक जीत कर देश का नाम रोशन किया। साक्षी मलिक ने 62 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल मुकाबले में कनाडा की खिलाड़ी एना गोंजालेज का हराकर स्वर्ण पदक जीता। पूजा नांदल ने 76 किलोग्राम भारवर्ग में आस्ट्रेलिया की खिलाड़ी को हराकर कांस्य पदक जीता। वहीं जिले के गांव निंदाना के दीपक नेहरा ने फ्रीस्टाइल के 97 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य पदक जीता है।
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सपना टूट गया है
नौ साल से कुश्ती का अभ्यास कर रही हूं। कॉमनवेल्थ में पदक जीतना मेरा लक्ष्य रहा है। इस फैसले से धक्का सा लगा है। ऐसा महसूस हो रहा है जैसे सपना टूट गया हो।
- मानसी, 57 किलोग्राम भारवर्ग, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी
सबसे ज्यादा भारत देश को नुकसान
कॉमनवेल्थ खेलों से कुश्ती को हटाए जाने का फैसला सबसे ज्यादा नुकसान भारत का ही करेगा। जिले के खिलाड़ी हर बार कॉमनवेल्थ खेलों में पदक जीत कर देश का नाम रोशन करते हैं। इस फैसले से हजारों खिलाड़ियों की उम्मीदें टूट गई।
- मंदीप, कोच, छोटूराम स्टेडियम
पहलवानों का टूटेगा मनोबल
कुश्ती में हमेशा देश के खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। पुरुष ही नहीं महिला पहलवान भी कुश्ती में अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। ऐसे में कुश्ती को कॉमनवेल्थ खेलों से बाहर करने के फैसले से खिलाड़ियों का मनोबल टूटेगा।
- अशोक, कोच, चुलियाना अखाड़ा
यह फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है
कॉमनवेल्थ खेलों से कुश्ती हटाए जाने का फैसला सुनकर दिल से दुखी हूं। यह फैसला कुश्ती जगत के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। इस बार हुए कॉमनवेल्थ में कुश्ती की कुल 12 प्रतियोगिताएं हुई। फ्री स्टाइल के छह भारवर्गों की और लड़कियों की छह भारवर्ग की सभी प्रतियोगिताओं में देश के खिलाड़ियों ने पदक जीते।
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- रणवीर ढाका, कोच, मेहर सिंह अखाड़ा
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